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एचएएल आईपीओ: मजबूत संभावनाओं की उड़ान

राम प्रसाद साहू |  Mar 18, 2018 09:32 PM IST

भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल) को भविष्य में मजबूती मिलने का अनुमान है। स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान या तेजस की निर्माता बढ़ते रक्षा बजट और 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम की सबसे बड़ी लाभार्थी होगी, क्योंकि भारत की रक्षा संबंधित 60 प्रतिशत जरूरतों को फिलहाल आयात के जरिये पूरा किया जाता है।  रक्षा खरीद परिषद द्वारा लगभग 820 अरब रुपये की पूंजीगत खरीद के साथ कंपनी के उत्पादों को बढ़त मिल सकती है। कंपनी के उत्पादों में हल्के लड़ाकू विमानों से लेकर हेलीकॉप्टर और ट्रेनर तक शामिल हैं। 

 
उत्पादों और सेवाओं से राजस्व प्राप्त करने वाली कंपनी एचएएल 685 अरब रुपये की मजबूत ऑर्डर बुक से संपन्न है। यह उसकी वित्त वर्ष 2017 की बिक्री का चार गुना है और 24-30 महीने की औसत क्रियान्वयन अवधि को देखते हुए इससे अच्छे राजस्व की संभावना बढ़ी है। भविष्य में अल्पावधि में दो नई ऑर्डर संभावनाएं दिख रही हैं। कंपनी 83 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए एमके 1ए) और 15 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर की आपूर्ति करने की संभावना तलाश रही है, जो फिलहाल रिक्वेस्ट-फॉर-प्रपोजल स्टेज में हैं। यदि कंपनी इस पर आगे बढ़ती है तो उसकी ऑर्डर बुक काफी मजबूत हो जाएगी क्योंकि एलसीए ऑर्डर लगभग 600 अरब रुपये का है और हेलीकॉप्टर अनुबंध की वैल्यू 45 अरब रुपये पर अनुमानित है।
 
कंपनी के लिए मार्जिन वृद्घि (वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में 15 प्रतिशत पर) परिचालन दक्षता और लागत लाभ के जरिये हासिल की जा सकती है, क्योंकि कंपनी के संयंत्र और शोध इकाइयां भारत में स्थित हैं। स्वदेशीकरण के उच्च स्तर से भी मुनाफे में सुधार आ सकता है। कंपनी कर्ज-मुक्त है, क्योंकि उसकी ज्यादातर कार्यशील पूंजी उन ग्राहकों द्वारा समर्थित है, जो अग्रिम भुगतान करते हैं। दरअसल, बैलेंस शीट पर 110 अरब रुपये की नकदी में से 90 अरब रुपये ग्राहक अग्रिम से आ रहा है। 
 
हालांकि वित्त वर्ष 2017 में कंपनी के पास 185 अरब रुपये का राजस्व था, लेकिन ऑर्डर प्रवाह और राजस्व पहचान परियोजना के अंत में हो रही है जिससे बिक्री एक साथ दर्ज की जा सकती है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष की पहली छमाही में बिक्री सिर्फ 52.7 अरब रुपये की रही, हालांकि कंपनी ने संकेत दिया कि दूसरी छमाही पहली की तुलना में बेहतर थी और इसलिए बिक्री भी मजबूत रहनी चाहिए।  हालांकि राजस्व की इस प्रकृति ने ताजा आंकड़ों के आधार पर कंपनी का मूल्यांकन कठिन बना दिया है। जहां कंपनी की वैल्यू वित्त वर्ष 2017 की आय के 16 गुना पर है, वहीं यह वित्त वर्ष 2018 के सालाना राजस्व की 35 गुना है। रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स का मूल्यांकन अनुमानित प्रति शेयर आय के 23 गुना पर है। इसे देखते हुए एचएएल के निर्गम की कीमत उचित है और इसमें खुदरा निवेशकों को 25 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। 
 
सेना उसकी मुख्य ग्राहक हैं और उसके राजस्व में इन सेवाओं का 90 प्रतिशत से ज्यादा योगदान है। कंपनी द्वारा नागरिक क्षेत्र में हाथ आजमाने से नए राजस्व अवसर पैदा हो सकते हैं। कंपनी के प्रबंधन का मानना है कि एचएएल ने सिविलियन वैरिएंट डोर्नियर डू-228 एयरक्राफ्ट का निर्माण शुरू किया है और उड़ान योजना के जरिये क्षेत्रीय रूटों को जोडऩे के लिए किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए इन एयरक्राफ्ट के लिए मांग मजबूत रहेगी। इसके अलावा, कंपनी एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर इंजनों के स्वदेशी डिजाइन और विकास के साथ साथ मानवरहित आकाशीय वाहनों के निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में भी हाथ आजमा रही है। 
 
स्वदेशी एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्मों के विकास से न सिर्फ प्रमुख उत्पादों के निर्यात बाजार को खोला जा सकेगा बल्कि कलपुर्जा और सेवाओं के बाजार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे निर्यात राजस्व का अनुपात बढ़ाने में मदद मिलेगी जो मौजूदा समय में 3 फीसदी पर है। साथ ही इससे जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। स्वदेशी निर्माण के अलावा एचएएल को रूस और पश्चिमी देशों की रक्षा कंपनियों से लाइसेंस के तहत उत्पादों के निर्माण और रखरखाव व्यवसाय से भी राजस्व प्राप्त होता है। 
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