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मारुति के लिए निकट अवधि की चुनौतियां

राम प्रसाद साहू |  Mar 18, 2018 09:34 PM IST

दिसंबर के मध्य में कारोबार के दौरान 10,000 रुपये का स्तर छूने के बाद मारुति सुजूकी का शेयर करीब 12 प्रतिशत नीचे आ चुका है। बाजार में गिरावट और वाहन उद्योग में मांग में, खासकर शहरी क्षेत्रों में, नरमी कंपनी के शेयर में गिरावट की प्रमुख वजह रही हैं। हालांकि अब भी मारुति के प्रमुख मॉडलों की खासी मांग है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2019 में कंपनी को क्षमता बढ़ाने को लेकर मशक्कत करनी पड़ सकती है।  फिलहाल कंपनी को प्रतिस्पद्र्धा के स्तर पर चुनौती नहीं मिल रही है, लेकिन जिंसों की कीमतों में तेजी और नई कंपनियों के प्रवेश से माहौल चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इनमें कई रुकावटें अस्थायी हैं और दीर्घ अवधि के निवेशक मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल अधिक से अधिक शेयरों की खरीद के लिए कर सकते हैं।

 
शहर में नरमी, गांव में तेजी 
 
देश के शीर्ष दस शहरों में मांग में कमी आई है, जो चिंता की बात है। इन दस शहरों की वाहन उद्योग की कुल बिक्री में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है। पिछले एक साल से इन शहरों में बिक्री कम रही है। विश्लेषकों का मानना है कि राइड शेयरिंग (उबर/ओला) में तेजी से निजी कारों की मांग कम हो गई है। कैब-शेयरिंग कंपनियों से भी कारों की मांग कम रहने से भी हालत बिगड़ी है। इसके अलावा शहरों में बुनियादी ढांचे की खस्ता हालत एवं आए दिन जाम लगने, साथ ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरुस्त होने से लोगों की कार खरीदने में दिलचस्पी कम हुई है। ब्याज दरें और तेल कीमतें बढऩे के बीच लोगों के कार रखना भी अब अधिक खर्चीला हो गया है। 
 
एचएसबीसी के विश्लेषकों का कहना है कि आर्थिक हालात-कमजोर वृद्धि दर, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का असर और कार्यालयों में नियुक्ति में कमी- की वजह से मांग कमजोर रही है। वित्त वर्ष 2019 के लिए भी माहौल बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है। इस महीने इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च ने अपनी टिप्पणी में वित्त वर्ष 2019 के लिए स्थिर परिदृश्य बरकरार रखा है, लेकिन इसने कहा है कि यात्री वाहन (पीवी) खंड में बिक्री कमजोर रह सकती है। शीर्ष बाजारों में कमजोर मांग के बीच इस ब्रोकरेज कंपनी का मानना है कि वित्त वर्ष 2019 में वाहन क्षेत्र की विकास दर 8 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रह सकती है। कंपनी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मांग, सरकारी कर्मचारियों के बढ़े वेतन-भत्ते एवं नौकरियों में तेजी आदि से ऐसा संभव होगा। इसका मानना है कि इन सब के बीच मारुति लगातार अच्छा प्रदर्शन करेगी। हालांकि वाहन उद्योग की बाकी कंपनियों की बिक्री में शीर्ष बाजारों में 10 प्रतिशत से अधिक कमी आई है, लेकिन मारुति 7 प्रतिशत तेजी के साथ आगे बनी रहेगी। मारुति की बिक्री में ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है, जो इसे मजबूती देती है। 
 
मजबूत उत्पाद, बढ़ती बाजार हिस्सेदारी
 
ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि मारुति की बिक्री वित्त वर्ष 2019 में दो अंकों में पहुंच सकती है। वित्त वर्ष 2017 के 47.4 प्रतिशत से बढ़कर कंपनी की बाजार हिस्सेदारी फिलहाल 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। बलिनो, डिजायर, ब्रीजा और नई स्विफ्ट की इसमें अहम भूमिका रही है। हाल में ही आई नई स्वीफ्ट का ऑर्डर बुक 40,000 है और बाकी सफल मॉडलों की प्रतीक्षा अवधि 4 से 12 हफ्ते तक है। उत्पादन क्षमता मारुति के लिए समस्या हो सकती है। कंपनी की मौजूदा उत्पादन क्षमता 18 लाख कार सालाना है, जिसे यह बढ़ा रही है। कंपनी के गुजरात में साणंद संयंत्र में 250,000 कारों का उत्पादन होता है। विश्लेषकों के अनुसार वित्त वर्ष 2018 में कारों का उत्पादन 17.9 से 18 लाख रह सकता है। दूसरे चरण के विस्तार से कंपनी की क्षमता में 250,000 वाहनों का इजाफा होगा, लेकिन यह जनवरी 2019 तक मुमकिन हो पाएगा। कंपनी ने तीसरे चरण के क्षमता विस्तार का कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन नए संयंत्र में  15 लाख वाहनों का उत्पादन हो सकता है।
 
लागत का दबाव 
 
कच्चे माल की कीमतें बढऩे से कंपनी के मार्जिन पर दबाव है, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार यह कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी से परहेज करेगी। लागत में कमी के प्रयासों के अलावा मांग में सतत बढ़ोतरी, गुजरात में वेंडर की आसानी से उपलब्धता और मातृ कंपनी सुजूकी को कम रॉयल्टी भुगतान आदि बातों से कंपनी को परिचालन से जुड़ा लाभ मिल सकता है। आईआईएफएल के विश्लेषकों का कहना है कि इन कारकों से लागत में बढ़ोतरी से होने वाली मुश्किलों से निजात मिलनी चाहिए। जिन बिंदुओं पर खास नजर रहेगी, उनमें मांग में दोबारा तेजी की रफ्तार और जापानी मुद्रा में मजबूती शामिल हैं। जापानी मुद्रा मजबूत होने से कंपनी पर परिचालन एवं वित्त संबंधी प्रभाव पड़ सकते हैं। किया,  सेक और प्यूजो भारत में परिचालन शुरू करना चाहती हैं, जिससे वित्त वर्ष 2020 में प्रतिस्पद्र्धा बढ़ सकती है।
 
नजरिया 
 
प्रमुख बाजारों में मांग में कमी, बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा और लागत के दबाव के बावजूद ब्रोकरेज कंपनियों को लगता है कि मारुति अपने मजबूत पोर्टफोलियो एवं परिचालन मजबूती की वजह से प्रतिस्पद्र्धा को मात देगी। विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत मांग और सरकारी कर्मचारियों की भारी जेब के अलावा जीएसटी का प्रभाव अब कम होने से छोटे एवं मझोले उद्यम, स्वरोजगारी एवं मोटा वेतन पाने वाले लोग मांग बढ़ा सकते हैं। इस वजह से विश्लेषकों ने शेयर को लेकर सकारात्मक रवैया बरकरार रखा है। मौजूदा बाजार मूल्य पर शेयर वित्त वर्ष 2019 की आय अनुमानों के 27 गुना स्तर पर कारोबार कर रहा है। 
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