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वाहन ऋण कारोबार को गति देंगे व्यावसायिक वाहन

टी ई नरसिम्हन |  Mar 25, 2018 10:01 PM IST

 वाहन खरीदारी के लिए ऋण देने के कारोबार में लगीं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के ऋण आवंटन में अच्छी वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। वाहनों की जबरदस्त बिक्री, खासकर व्यावसायिक वाहनों (सीवी) की जबरदस्त मांगऔर मौजूदा रुझान जारी रहने की उम्मीदों के बीच इन कंपनियों के ऋण आवंटन में तेजी आ सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार बुनियादी ढांचा एवं ग्रामीण क्षेत्रों पर सरकार के अधिक जोर और वृहद आर्थिक हालात के दम पर वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान वाहन वित्त कारोबार की वृद्धि दर मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वित्त वर्षों में यह दर 12 प्रतिशत रही थी। 

 
वित्त वर्ष 2018 में इस खंड में साख आवंटन की वृद्धि दर मजबूत रही है। आईसीआरए रिसर्च के अनुसार एनबीएफसी का खुदरा ऋण आवंटन पिछले एक साल में 16 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में 6.6 लाख करोड़  रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2017 में इसमें 15 प्रतिशत तेजी आई थी। एनबीएफसी के खुदरा ऋण आवंटन में वाहन ऋण खंड की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। इनमें व्यावसायिक वाहन, यात्री वाहन, दोपहिया एवं तिपहिया वाहन, ट्रैक्टर, निर्माण उपकरण और पुराने टै्रक्टर शामिल हैं। वाहन खरीदारी के लिए ऋण देने वाले एनबीएफसी खंड की कंपनियों चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस और इंडोस्टार कैपिटल फाइनैंस का कहना है कि अगले 3 से 5 साल के दौरान इस खंड को मांग अधिक रहने से लाभ मिलना चाहिए। चोलामंडल इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस के कार्यकारी वाइस-चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एन श्रीनिवास ने कहा कि मूल्यांकन के लिहाज से वाहन खंड में सभी क्षेत्र आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन व्यावसायिक वाहन खंड की वृद्धि दर ऊंची रहेगी। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का कहना है कि बुनियादी क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों में तेजी, माल ढुलाई दर अधिक रहने, देश के पूर्वी भाग में खनन से जुड़ी मांग और कुछ राज्यों में वाहनों पर क्षमता से अधिक  वजन लादने पर प्रतिबंध से व्यावसायिक वाहन खंड में मांग मजबूत बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। एफएमसीजी में मजबूती, ई-कॉमर्स और रेफ्रिजरेटेड ट्रकों की बढ़ती मांग से इस खंड में हल्के वाणिज्यिक वाहनों की मांग मजबूत दिख रही है। 
 
पुराने वाहनों की मांग अधिक होने से भी वित्त प्रदाता कंपनियों के नजरिये से संभावनाएं मजबूत हैं, क्योंकि यह खंड अधिक मार्जिन देता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने व्यावसायिक वाहनों के लिए मांग असरदार बनी हुई है। वित्त वर्ष 2018 के पहले नौ महीने में चोला व्हीकल फाइनैंस ने 137.2 अरब रुपये आवंटित किए हैं। इस तरह, सालाना आधार पर इसमें 36 प्रतिशत तेजी आई है। चोलामंडलम की कुल प्रबंनाधीन परिसंपत्तिों का 72 प्रतिशत हिस्सा वाहन ऋण कारोबार से आता है। हालांकि, ऊंची परिचालन लागत के मद्देनजर श्रीनिवासन का कहना है कि कंपनी को नवाचार और तकनीक के इस्तेमाल के जरिये परिचालन लागत में कमी लानी चाहिए। कंपनी मार्जिन बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, जो वित्त वर्ष 2018 के पहले नौ महीनों में 9.6 प्रतिशत रहा था। 
 
श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस (एसटीएफसी) के सीईओ और एमडी उमेश रावनकर का कहना है कि व्यावसायिक वाहनों की बिक्री 2012 में शीर्ष पर पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद मंदी आ गई थी और अब मांग के लिए एक बार फिर जगह बनी है। अच्छे मॉनसून, अपेक्षाकृत अधिक मजबूत अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर सरकार के अधिक खर्च करने से बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है। उनके अनुसार अगले तीन से चार साल के दौरान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिक्री मजबूत रहेगी। बीएस 4 से बीएस 6 प्रणाली की तरफ बढऩे से वाहन कंपनियों को बड़े निवेश की जरूरत होगी, जिसका नतीजा वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में मिल सकता है। हालांकि पुराने वाहन खंड में कीमतें स्थिर रह सकती हैं, जिससे मार्जिन बरकरार रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, 'अगर कोई बड़ा उलट-फेर नहीं हो तो हमारे लिए 2022 तक सकारात्मक स्थिति रहेगी।' एसटीएफसी का मानना है कि एनबीएफसी की वृद्धि दर 18-20 प्रतिशत और वाहन ऋण खंड के लिए यह 15 प्रतिशत रह सकती है। वित्त वर्ष 2018 के पहले नौ महीनों में मार्जिन 7.49 प्रतिशत रहा था।
 
इंडोस्टार कैपिटल फाइनैंस के कार्यकारी वाइस-चेयरमैन और सीईओ आर श्रीधर ने कहा कि व्यावसायिक वाहन खंड में 2020 तक 14-15 प्रतिशत रफ्तार से आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'नई पॉलिसियां व्यावसायिक वाहन खंड में मांग बढ़ा सकती हैं, लेकिन विभिन्न कारोबारों में निजी इस्तेमाल के लिए पुराने वाहनों की भी खासी मांग देखी जा सकती है।' कंपनी पुराने वाहनों के कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। खंडों के लिहाज से देखें तो एनबीएफसी वाहन ऋण पोर्टफोलियो में 85 प्रतिशत हिस्सा व्यावसायिक वाहन और कार/यूटिलिटी व्हीकल्स ऋण की हिस्सेदारी है। 
 
एनबीएफसी में व्हीकल फाइनैंस पोर्टफोलियो में व्यावसायिक वाहन के लिए ऋण आवंटन का हिस्सा 51 प्रतिशत है और 2020 तक इसमें चक्रवृद्धि दर पर 15 प्रतिशत तेजी दर्ज हो सकती है। व्यावसायिक वाहन वित्त बाजार में एनबीएफसी अपनी 65 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखेगी। कार और यूटिलिटी वाहन के लिए ऋण मुहैया करने वाले खंड की एनबीएफसी व्हीकल फाइनैंस में 34 प्रतिशत हिस्सेदारी है और अगले तीन वित्त वर्षों में इसमें चक्रवृद्धि दर पर 18 प्रतिशत तेजी आने की उम्मीद है।  नए व्यावसायिक वाहनों के मुकाबले पुराने वाहनों के लिए ऋण देने में अधिक मार्जिन है। विशेषज्ञों के अनुसार वाहन वित्त क्षेत्र की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां 6.7 प्रतिशत है, जो सूक्ष्म वित्त, बुनियादी ढांचा खंड के लिए ऋण के मुकाबले अपेक्षाकृत कम है और आवास वित्त, जायदाद पर ऋण और गोल्ड लोन आदि के मुकाबले थोड़ी अधिक हैं। 
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