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पूंजीगत वस्तु कंपनियों के लौटने लगे अच्छे दिन

उज्ज्वल जौहरी |  Mar 25, 2018 10:01 PM IST

पिछले कुछ सालों से आय में कमी का रोना रो रही पूंजीगत वस्तु कंपनियों के लिए अब अच्छे दिन नजर आने लगे हैं। निजी क्षेत्र से पूंजीगत व्यय में कमी, नवंबर 2016 में नोटबंदी और जुलाई 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से इस क्षेत्र के निवेशकों के लिए इंतजार लंबा हो गया था। हालांकि  अब परिस्थितियां बदल रही हैं। अच्छी खबर यह है कि परियोजनाओं के आवंटन में तेजी आई है और इनका क्रियान्वयन भी बेहतर ढंग से हो रहा है। इससे इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए राजस्व से जुड़ी संभावनाएं और बेहतर हो सकती हैं। 

 
लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) को हाल में मिले नए कारोबारी सौदे, थर्मेक्स की झोली में आए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट ऐंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) को-जेनरेशन सौदे और इस क्षेत्र की कई अन्य कंपनियों के ऑर्डर बुक में तेजी बेहतर भविष्य की ओर इशारा कर रहे हैं। दिसंबर 2017 तिमाही के नतीजों से कई कंपनियों के लिए हालात सुधरने  के पहले ही संकेत मिल चुके हैं। प्रभुदास लीलाधर के कुणाल शेठ और श्रेयस जैन ने पहले कहा था कि कई तिमाहियों तक निराशा हाथ लगने के बाद वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की सभी कंपनियां एक सुखद आश्चर्य से रूबरू हो गईं। इससे पहले कंपनियों को कई तिमाहियों तक निराशा और उनके मुनाफा अनुमानों में कमी का सामना करना पड़ा था। 
 
नए कारोबारी सौदों की आमद से बिजली पारेषण एवं वितरण, तेल एवं गैस, सड़क, शहरी परिवहन, रेलवे, रक्षा और जल आदि खंडों की भविष्य की संभावनाओं को लेकर अनुमान भी सकारात्मक रहे। एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने कहा कि उनके पोर्टफोलियो में पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियों की परियोजनाओं के क्रियान्वयन में दिसंबर तिमाही में तेजी दर्ज की गई। सुधार के कुछ अन्य संकेत भी मिले हैं। इस क्षेत्र की कंपनियों के हाथ नई परियोजनाएं लग रही हैं। रिलायंस सिक्योरिटीज के विश्लेषक रूपेश सांखे का कहना है कि कई खंडों में सुधार हुए हैं और यह बात जनवरी और फरवरी के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों में दिख गई थी। सांखे का मानना है कि रेलवे, अधोसंरचना (सड़क एवं राजमार्ग) और बिजली पारेषण एवं वितरण इस क्षेत्र को दमखम देते रहेंगे। हालांकि अब तक निजी क्षेत्र से पूंजीगत व्यय में भले ही उतनी तेजी नहीं दिखी हो, लेकिन भारतीय कंपनियों की क्षमता का इस्तेमाल बढऩे से इसमें तेजी जरूर आएगी। सरकार की तरफ से होने वाला आवंटन भी अहम भूमिका निभाएगा।
 
पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की कंपनियों में एलऐंडटी, सदभाव इंजीनियरिंग, कमिंस इंडिया, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और केईसी इंटरनैशनल प्रभुदास लीलाधार की पहली पसंद हैं। ब्रोकरेज कंपनी के अनुसार एलऐंडटी बहीखाते और मुनाफे पर लगातार ध्यान केंद्रित करती रही है, जिस वजह से यह उसकी पसंद बनी हुई है। एलऐंडटी की पूंजीगत वस्तु एवं बुनियादी क्षेत्र में मौजूदगी है और कारोबार की गति बढ़ाने और कर्ज में कटौती के इसके प्रयासों की वजह से ज्यादातर निवेशक इसके शेयर को लेकर सकारात्मक हैं। गिनीज सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख सुमन चटर्जी का कहना है कि एलऐंडटी अपने सभी खंडों में लाभ में रहने की स्थिति में है, इसलिए वृहद बाजार में कमजोरी के बाद भी शेयर का कारोबार लगातार मजबूत रहा है। 
 
कंपनी के इंजीनियरिंग ऐंड प्रोक्योरमेंट खंड में 14 प्रतिशत तेजी आने से दिसंबर तिमाही में कंपनी ने घरेलू परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी जबरदस्त वापसी की। कंपनी के लिए सालाना आधार पर नए ऑर्डर का प्रवाह भी 38 प्रतिशत बढ़ा। जेफरीज के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के लिए निवेश की गई पंूजी और इक्विटी पर प्रतिफल अनुपातों में तेजी जारी है और आर्थिक हालात से मिलने वाले दम और बहीखाते में सुधार से इसके शेयर को मजबूती मिलेगी।  बिजली पारेषण एवं वितरण खंड में केईसी इंटरनैशनल कारोबारी माहौल में सुधार का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही है। सांखे और दूसरे विश्लेषकों का मानना है कि केईसी और कल्पतरु पावर ट्रांसमिशन को पारेषण एवं वितरण क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे अवसरों से लाभ मिलेगा। एबीबी, केईसी और कल्पतरु पावर को पारेषण एवं वितरण खंड में खासी तवज्जो मिल रही है। 
 
पारेषण एवं वितरण खंड में राज्य बिजली वितरण बोर्ड मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इतना ही नहीं, रेलवे भी विद्युतीकरण और अन्य परियोजनाओं पर अधिक व्यय कर रहा है, जो इन कंपनियों के पक्ष में है। बिजली उत्पादन उपकरण खंड में भी तेजी आ रही है, हालांकि विश्लेषकों के अनुसार उत्पादन स्थापित क्षमता से कम रहने से निकट अवधि में मांग से जुड़े हालात कमजोर रह सकते हैं। 
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