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बाजार में उतार-चढ़ाव आए तो निवेश बचाकर कैसे रकम कमाएं

संजय कुमार सिंह |  Mar 25, 2018 10:05 PM IST

पिछले साल कमोबेश इसी वक्त शेयर बाजार तेजी से चढ़ रहे थे और ब्याज दरें गिर रही थीं। अब दोनों तस्वीरें एकदम बदल चुकी हैं। अगर आप वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले अपने निवेश पोर्टफोलियो पर दोबारा विचार करने की योजना बना रहे हैं तो बहुत सोच-समझकर ही उसमें बदलाव करें। आपके बदलाव ऐसे होने चाहिए, जिनसे आपका निवेश इन बदलावों का सामना कर सके और आपको फायदा पहुंचाए।

 
शेयर में कैसा रहे दांव
 
लार्ज-कैप फंडों ने पिछले एक साल के दौरान औसतन 11.94 फीसदी प्रतिफल दिया है। इसे देखते हुए अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 60 से 70 फीसदी हिस्सा लार्ज-कैप फंडों में ही रखना आपके लिए मुनासिब होगा क्योंकि ये फंड उतार-चढ़ाव को झेलने में ज्यादा सक्षम हैं। रिलायंस म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) शैलेश राज भान ने कहा, 'लार्ज-कैप शेयरों की कीमतें इस समय मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर मूल्य की तुलना में ज्यादा आकर्षक हैं। इस साल पूरे बाजार के लिए आमदनी का माहौल भी पिछले सला की तुलना में बेहतर रहने के आसार नजर आ रहे हैं। पिछले साल कीमत कम थी, इसका भी फायदा मिलेगा और आमदनी में इजाफे में इससे काफी मदद मिलेगी। इसलिए लार्ज-कैप कंपनियां मिड और स्मॉल कैप कंपनियों की तुलना में बेहतर जोखिम का बेहतर प्रतिफल मुहैया कराती हैं।'
 
उन्होंने कहा कि लार्ज-कैप कंपनियों ने परिचालन कुशलता सुधारी है, इसलिए वृहद आर्थिक सुधार से उन्हें फायदा होगा। ऐसा तीसरी तिमाही के नतीजों में भी देखने को मिला है। हाल में बाजार में गिरावट से लार्ज-कैप कंपनियों के शेयर तीन साल की निवेश अवधि के लिहाज से ज्यादा आकर्षक बन गए हैं।  मिड और स्मॉल-कैप फंडों की श्रेणी को पिछले एक साल के दौरान 18.72 फीसदी का औसत प्रतिफल मिला है। बाजार में हाल में जो गिरावट आई है, उसमें भी लार्ज कैप के मुकाबले इन फंडों को ज्यादा चोट सहनी पड़ी है। लेकिन आप इनसे पूरी तरह परहेज न करें और अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 30 से 40 फीसदी आवंटन मिड और स्मॉल कैप में करें क्योंकि इनमें तेज वृद्धि की संभावना होती है।
 
सुंदरम म्युचुअल के सीआईओ (इक्विटी) एस कृष्णकुमार ने कहा, 'अगले कुछ वर्षों में लार्ज-कैप की आमदनी में 17 फीसदी सालाना की चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से इजाफा हो सकता है। लेकिन उसी दौरान मिड और स्मॉल कैप कंपनियों की आमदनी 22 फीसदी सीएजीआर की दर से बढ़ सकती है।' उन्होंने कहा कि मिड और स्मॉल कैप कंपनियां बहुत अधिक हैं, इसलिए फंड प्रबंधकों के पास शेयर चुनने के बहुत अधिक विकल्प होते हैं। इस श्रेणी में जिन शेयरों की कीमत बहुत कम और संभावनाएं बहुत अधिक हों, उन्हें चुनने से तगड़ा प्रतिफल मिल सकता है।
 
निश्चित आय योजना कैसी?
 
ब्याज दरों में इजाफा होने के कारण लंबी अवधि वाले फंडों से मिलने वाले प्रतिफल पर असर पड़ा है। इसे देखते हुए आपके डेट फंड पोर्टफोलियो का अधिक से अधिक निवेश अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म फंड यानी बेहद कम अवधि वाले फंडों तथा शॉर्ट टर्म फंड यानी कम अवधि वाले फंडों में लगना चाहिए। लंबी अवधि वाले बॉन्ड फंडों यानी डायनेमिक बॉन्ड फंड आदि में केवल 25 फीसदी निवेश होना चाहिए। सावधि जमाओं (एफडी) पर मिलने वाले ब्याज की दर भी बढ़ गई है। लेकिन आप केवल 6 से 9 महीने की एफडी में निवेश करें ताकि आप अपने पास मौजूद रकम को बाद में ऊंची दरों (यह मानते हुए कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहेगी) पर निवेश किया जा सके। जो व्यक्ति 20 से 30 फीसदी आयकर वाली श्रेणी में आते हैं, उन्हें अन्य डेट योजनाओं के बारे में विचार करना चाहिए। इन योजनाओं में 7.75 फीसदी प्रतिफल देने वाले भारत सरकार के बॉन्ड, द्वितीयक बाजारों में उपलब्ध कर मुक्त बॉन्ड और डेट म्युचुअल फंड आदि शामिल हैं। 
 
रियल एस्टेट की कैसी रहेगी तस्वीर
 
रियल्टी की सेहत पिछले काफी अरसे से पतली है और खास तौर पर आवासीय क्षेत्र में कमजोरी बनी ही हुई है। नई शुरू होने वाली परियोजनाओं के बारे में जेएलएल इंडिया के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि देश के 7 प्रमुख शहरों में 2014 से ही नई आवासीय परियोजनाओं में 18 फीसदी की वार्षिक चक्रवृद्घि दर से गिरावट आ रही है। जेएलएल इंडिया के सीईओ और कंट्री हेड रमेश नायर ने कहा, 'दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलूरु जैसे बाजारों में मकानों की संख्या और खरीदफरोख्त ज्यादा रहती है। लेकिन पिछले 24 महीनों में वहां भी जितनी नई इकाइयां आई हैं, उनसे ज्यादा बेची गई हैं। इस दौरान संपत्ति की कीमतें कमोबेश स्थिर ही बनी रही हैं। इस समय डेवलपर अपनी परियोजनाओं को पूरी करने और डिलिवरी देने पर ध्यान दे रहे हैं और अपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर ही उनका पूरा जोर है।' नायर को लगता है कि नए वित्त वर्ष में मकानों की बिक्री में तेजी नजर आएगी। यदि ऐसा होता है तो पहले ही खरीदारी कर लें क्योंकि बिक्री तेज होने पर डेवलपर छूट देना बंद कर देंगे और ऐसी योजनाएं भी बंद हो जाएंगी, जिनसे आपको भुगतान में सहूलियत होती है।
 
कितना चमकेगा इस साल सोना
 
यूं तो सोने को सदा के लिए फायदेमंद बताते हैं, लेकिन पिछले एक साल में इस पीली धातु का प्रदर्शन औसत स्तर का ही रहा है। इस दौरान उसने केवल 6.61 फीसदी प्रतिफल दिया है। अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ती नजर आ रही है। अगर यह मामला गर्मी पकड़ता है तो सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं। इस समय दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित पूंजी का एक बड़ा हिस्सा डॉलर की शक्ल में ही जमा रखते हैं। क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के वरिष्ठ फंड प्रबंधक (वैकल्पिक निवेश) चिराग मेहता ने कहा, 'अगर देश अमेरिका के साथ अपने व्यापार में कमी लाते हैं और दूसरे देशों के साथ कारोबार में इजाफा करते हैं तो उनके केंद्रीय बैंक भी डॉलर में अपनी जमा रकम कम करेंगे। लेकिन डॉलर घटाने के बाद भी अगर वे दूसरे देशों की मुद्रा का बड़ी मात्रा में भंडारण नहीं करना चाहेंगे तो वे सोने की खरीद बढ़ा सकते हैं।'
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