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कृषि रसायन कंपनियों के लिए अनुकूल हालात

राम प्रसाद साहू |  Apr 01, 2018 08:47 PM IST

सुधरते वैश्विक कृषि रसायन चक्र और घरेलू तौर पर अनुकूल स्थिति से कृषि उत्पाद कंपनियों को लाभ हासिल होने की उम्मीद है। इन घटनाक्रम से कंपनियों के उत्पादों की मांग बढ़ेगी और इससे उन्हें शानदार बिक्री दर्ज करने में मदद मिलेगी। वैश्विक कृषि रसायन बाजार में तीन वर्ष की सुस्ती के बाद सुधार दिखना एक बड़ा बदलाव है। अमेरिकी कृषि विभाग की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि सोयाबीन और अन्य अनाज में स्टॉक कम होने से मांग बढऩी चाहिए। इसके अलावा एथेनॉल और बायोडीजल लिंकेज की वजह से कच्चे तेल की कीमत और कृषि उत्पादों के बीच मजबूत संबंध से कृषि उत्पाद कीमतों में तेजी आनी चाहिए। 

 

अन्य कारक है घरेलू मांग। सरकारी उपायों और खाद्य मुद्रास्फीति से घरेलू मांग में मजबूती आई है। इलारा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने इस महीने एक रिपोर्ट में कहा, 'हम 2018 के फसल वर्ष में प्रवेश कर चुक हैं। हमें विश्वास है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब में हाल में 1 लाख करोड़ रुपये की घोषित कृषि ऋण माफी के  साथ साथ वित्त वर्ष 2019 के बजट के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के वादे से कृषि रसायन उद्योग के लिए वृद्घि चक्र को मजबूती मिलेगी।' विश्लेषक निर्माण क्षमता, निर्यात अवसर और मजबूत घरेलू उत्पाद पोर्टफोलियो की वजह से यूपीएल और रैलिस इंडिया पर दांव लगा रहे हैं। नियामकीय मोर्चे पर, पेस्टीसाइड्ïस मैनेजमेंट बिल के क्रियान्वयन (जिसमें पंजीकरण पर सख्त अनुपालन पर जोर दिया गया है), किसानों के लिए मुआवजे और जुर्माने से संगठित कंपनियों के व्यवसाय में बदलाव आ सकता है। यहां तीन ऐसी कंपनियों पर प्रकाश डाला जा रहा है जो भविष्य में बदलावों का तेजी से लाभ उठाने में सक्षम होंगी।

 

यूपीएल

 

भारत की सबसे बड़ी कृषि रसायन कंपनी बड़े अवसर हासिल करने के लिए उचित स्थिति में है क्योंकि 3-4 अरब डॉलर के उत्पाद अगले तीन से चार वर्षों के दौरान पेटेंट से अलग हो जाएंगे। यह निर्माण में यूपीएल के बैकवर्ड इंटिग्रेशन के अनुकूल है। इसके अलावा कंपनी को बीज (सहायक कंपनी एडवांटा के जरिये), एग्रोकेम, फुमिजेंट्ïस और स्टोरेज की पूरी कृषि वैल्यू चेन में उपस्थिति भी मददगार है।  भारत और लैटिन अमेरिका के वृद्घि वाले बाजारों के अलावा, कंपनी चीन, नाइजीरिया और केन्या समेत अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रही है। मजबूत ब्रांडों के इस्तेमाल और विस्तार, बेहतर उत्पाद मिश्रण, नए उत्पादों, और लागत तर्कसंगत बनाने से यूपीएल को वित्त वर्ष 2017-20 की अवधि के दौरान राजस्व और आय 12-16 प्रतिशत बढ़ाने में मदद मिल सकती है। बीओबी कैपिटल मार्केट्ïस के विश्लेषकों के अनुसार मजबूत आय संभावना, 20-25 प्रतिशत की शानदार प्रतिफल अनुपात, 28 अरब रुपये की नकदी और विविधीकृत बिजनेस मॉडल ऐसे कारण हैं जिन पर निवेशक शेयर के संदर्भ में विचार कर सकते हैं। 

 

रैलिस इंडिया

 

कंपनी अनुबंध शोध एवं निर्माण (सीआरएएमएस) और घरेलू व्यवसाय की मदद से निर्यात में वृद्घि के दोहरे लाभ की संभावना से संपन्न है। हाल की तिमाहियों में निर्यात अच्छा रहा है और प्रमुख्य वैश्विक बाजारों में अनुकूल चैनल इन्वेंट्री, नए उत्पाद पंजीकरण और नए फार्मास्युटिकल मोलक्यूल में सुधार को देखते हुए इसमें और मजबूती आने का अनुमान है। कंपनी को अपने दहेज संयंत्र पर मजबूत उत्पाद और ऑर्डरों में तेजी आने से परिचालन दक्षता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।  भारत में कंपनी वित्त वर्ष 2012-16 के दौरान बाजार भागीदारी में 240 आधार अंक की गिरावट दर्ज कर चुकी है। ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के अनुसार कंपनी अब अपनी कुछ खोई हुई भागीदारी लौटाने में कामयाब हो रही है। उसे नए उत्पादों की स्वीकार्यता और अपने डीलरों के लिए प्रमुख उत्पादों पर बेहतर ऋण शर्तों से मदद मिल रही है। कंपनी के वितरण नेटवर्क, नए लॉन्च और ब्रांडेड कृषि सॉल्युशनों को देखते हुए विश्लेषकों को उम्मीद है कि वह वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान घरेलू बाजार में सालाना 10 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज करेगी, जबकि उसने वित्त वर्ष 2011-17 में तीन फीसदी की धीमी वृद्घि दर्ज की थी। मजबूत बीज योगदान (मेटाहेलिक्स) और निर्यात से मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। कंपनी का शुद्घ लाभ वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान सालाना 20 फीसदी बढऩे का अनुमान है और यूपीएल की तरह इसका प्रतिफल अनुपात 20 फीसदी से ऊपर मजबूत है।

 

पीआई इंडस्ट्रीज

 

राजस्व में कस्टम सिंथेसिस एंड मैन्युफैक्चरिंग (सीएसएम) के योगदान वाली पीआई इंडस्ट्रीज कृषि रसायन सेगमेंट में वैश्विक सुधार का लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में है। कंपनी के प्रबंधन का मानना है कि सीएसएम व्यवसाय वित्त वर्ष 2019 में मजबूत वृद्घि के दौर में लौटेगा। कंपनी की ऑर्डर बुक 1.15 अरब डॉलर के साथ लगातार मजबूत हुई है, जो सालाना आधार पर 40 प्रतिशत तक के वृद्घि है।  क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक मांग में सुधार से ऑर्डर बुक के राजस्व में तब्दील होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। उनका मानना है कि राजस्व वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान सालाना 20 फीसदी की दर से बढ़ेगा। घरेलू व्यवसाय (राजस्व में 30 प्रतिशत भागीदारी) का प्रदर्शन दिसंबर तिमाही में धीमा रहा, पर नए उत्पाद लॉन्च की मदद से अब इसमें सुधार आने की संभावना है। वित्त वर्ष 2018 में 6 उत्पाद लॉन्च और खरीफ तथा रबी सीजन में कुछ और उत्पादों के पेश किए जाने की योजना के साथ घरेलू वृद्घि में इसका सकारात्मक असर दिख  सकता है। सीएसएम राजस्व और घरेलू व्यवसाय में सुधार ओने से पीआई इंडस्ट्रीज वित्त वर्ष 2018-20 के दौरान 15 फीसदी की सालाना वृद्घि दर्ज की सकती है। 
कीवर्ड agri, farmer, fertilizer,

  
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