होम » Investments
«वापस

हिंडाल्को, वेदांत के लिए मजबूत हैं संभावनाएं

उज्ज्वल जौहरी |  Apr 01, 2018 08:47 PM IST

दीर्घावधि में सुधार के आसार

एल्युमीनियम उत्पादों पर शुल्क लगाने की अमेरिका की धमकी और इसके बाद वैश्विक स्तर पर आधार धातुओं की कीमतों में उथल-पुथल से गैर-लौह कंपनियां वेदांत और हिंडाल्को सुर्खियों में रही हैं। बाजार में नरमी ने हालात और पेचीदा कर दिए हैं। जनवरी के ऊंचे स्तरों के मुकाबले वेदांत और हिंडाल्कों के शेयरों की कीमतें 19-23 प्रतिशत तक कम हुई हैं। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट को अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि इन दोनों कंपनियों की कारोबारी संभावनाएं मजबूत लग रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आधार धातुओं की औसत प्राप्तियां सुधर सकती हैं या कम से कम स्थिर रह सकती हैं। उनके अनुसार वेदांत और हिंडाल्को को क्षमता विस्तार से भी लाभ मिलेगा। वेदांत का कारोबार अधिक विविधता वाला है और इसे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भी लाभ मिलेगा। 

मजबूत प्राप्तियां

इस महीने आधार धातुओं की कीमतों में अनिश्चितता और लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर कीमतें फरवरी के ऊंचे स्तरों से फिसलने के बावजूद विश्लेषकों का कहना है कि एल्युमीनियम और जिंक क्रमागत आधार पर चौथी तिमाही में औसतन ऊंचे स्तरों पर रहे हैं। सालाना आधार पर सभी आधार धातुओं की कीमतें अधिक हैं और ये इन धातु उत्पादकों के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाएंगी। गिनीज सिक्योरिटीज में शोध प्रमुख सोमेन चटर्जी का कहना है कि धातुओं में गिरावट से चिंता जैसी कोई बात नहीं है और 2018 के लिए संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। वास्तव में विश्लेषकों के अनुसार वित्त वर्ष 2020 तक आधार धातुओं की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी जारी रहेगी। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने कहा है कि गैर-लौह शेयरों की मौजूदा बाजार कीमत एल्युमीनियम कारोबार से कम प्रतिफल के अनुमान के कारण हैं, जबकि धातुओं में एल्युमीनियम की मांग की संभावनाएं खासी मजबूत हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हिंडाल्को और वेदांत के कारोबार में कमाई की अच्छी संभावनाओं के बावजूद बाजार इनके शेयरों का मूल्यांकन कम कर आंक रहा है। 

अच्छी स्थिति में वेदांत

वेदांत विविध कारोबारों वाली कंपनी है, जो एल्युमीनियम, जिंक, तांबा आदि खंडों में कारोबार करती है। इसके कुल राजस्व का 10 प्रतिशत हिस्सा तेल एवं गैस कारोबारों से प्राप्त होता है। एल्युमीनियम की बात करें तो कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि इसकी प्रति टन प्राप्ति वित्त वर्ष 2020 में बढ़कर 180,517 रुपये तक हो सकती है। यह वित्त वर्ष 2017 में 135,046 रुपये से सुधरकर वर्ष 2018 में 163,029 रुपये हो गई थी। क्षमता विस्तार से कंपनी के एल्युमीनियम कारोबार में अगले दो सालों में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस वजह से इसके कारोबार में तेजी की संभावनाएं मजबूत हैं, क्योंकि एल्युमीनियम का इसके राजस्व में एक चौथाई योगदान होता है।

जिंक कंपनी के लिए एक महत्त्वपूर्ण कारोबार है। वेदांत की सूचीबद्ध सहायक इकाई हिंदुस्तान जिंक की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और वित्त वर्ष 2018-20 की अवधि में इसमें 20 प्रतिशत तेजी की उम्मीद है। जिंक इंटरनैशनल (अंतरराष्ट्रीय परिचालन) के खनन शुरू करने से बिक्री के आंकड़े और मजबूत होंगे। जिंक इंटरनैशनल की बिक्री वित्त वर्ष 2018-20 के बीच 2.5 गुना बढ़कर 406,744 टन हो सकती है। इन दोनों खंडों में कारोबार पूरी गति से आगे बढ़ रहा है, साथ ही तांबा कारोबार में भी बिक्री और प्राप्तियों के आंकड़े सुधर रहे हैं। इसी तरह, वेदांत का तेल एवं गैस कारोबार (केयर्न इंडिया) भी अच्छे आंकड़े दर्ज कर सकता है। वित्त वर्ष 2018-20 की अवधि के बीच तेल उत्पादन 30 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, वहीं बे्रंट क्रूड तेल कीमतें फिलहाल 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर हैं।

विश्लेषकों का अनुमान है कि तेल से होने वाली वेदांत की औसत प्राप्तियां वित्त वर्ष 2017 में 49 डॉलर के मुकबाले वित्त वर्ष 2018 में 58 डॉलर रह सकती हैं। वित्त वर्ष 2020 यह 62 डॉलर रह सकती हैं। एडिलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि ऊंचे लाभांश का वितरण वेदांत के समझ-बूझ वाली पूंजी आवंटन का हिस्सा है, क्योंकि इसकी पूंजीगत व्यय लगभग समाप्त हो चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह शेयरधारकों का प्रतिफल बढ़ाने के प्रबंधन के रुख को दर्शाता है। 

हिंडाल्को बेहतर स्थिति में

हिंडाल्को ज्यादातर विस्तार कार्य को अंजाम दे चुकी है और अब इसे अधिक राजस्व और मुनाफा मिलने लगा है। इसके साथ ही नकदी का प्रवाह बढ़ने से इसे कर्ज कम करने में मदद मिल रही है। कंपनी के पास स्वयं के इस्तेमाल के लिए कोयला और बॉक्साइट उपलब्ध हैं, इसलिए यह कच्चे माल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से लगभग सुरक्षित है। हिंडाल्को की अमेरिका में अनुषंगी इकाई के प्रदर्शन में महत्त्वपूर्ण सुधार हुए हैं और अमेरिका की शुल्क संबंधी पाबंदी के बाद भी इसका कारोबारी परिदृश्य मजबूत है।  

जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका द्वरा एल्युमीनियम पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने से नोवेलिस की कमाई पर मामूली असर ही पड़ेगा। कनाडा इसका प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश है, जो अमेरिकी शुल्कों से मुक्त रखा गया है, साथ ही कंपनी पुन: इस्तेमाल में लाए जाने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल भी करती है। इन दोनों वजहों से नोवेलिस पर होने वाला कोई भी असर प्रतिकूल साबित होगा। 
कीवर्ड hindalco, vedanta, aluminium,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक