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प्रतिस्‍पर्धियों से बेहतर स्थिति में सिप्ला

उज्ज्वल जौहरी |  Apr 01, 2018 08:49 PM IST

बिक्री में लगातार तेजी

पिछले साल नवंबर में ऊं चे स्तर पर पहुंचने के बाद सिप्ला के शेयर में 18 प्रतिशत गिरावट आ चुकी है। विश्लेषकों की नजर में शेयर में मौजूदा गिरावट कई वजहों से निवेश का अवसर देती है। पहली अहम बात यह है कि दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य सेवा बाजार अमेरिका में कंपनी की संभावनाएं खासी मजबूत हैं, क्योंकि यह वहां कई नई दवाएं लाने वाली है। मिसाल के तौर पर सोमवार को कंपनी ने एलोक्सी की जेनेरिक दवा लाने की घोषणा है। एलोक्सी का इस्तेमाल केमोथेरेपी के बाद जी मिचलाने या दस्त के इलाज में होता है। 

ब्रांडेड दवाओं का अनुमानित बाजार सालाना 46 करोड़ डॉलर है और अब हेल्सिन हेल्थकेयर एसए के साथ समझौते के जरिये कंपनी की जेनरिक दवाओं के बाजार में आने से खासा राजस्व मिलना चाहिए। सेंट्रम ब्रोकिंग के रंजित कपाडिय़ा का कहना है कि अमेरिका में बिक्री बढ़ाने के लिए सिप्ला अपनी नई दवाओं के अलावा लाइसेंसिंग की संभावनाओं का भी भरपूर इस्तेमाल कर रही है। अमेरिकी कारोबार में दिलचस्पी बनी रहने के साथ सिप्ला के दूसरे बाजारों जैसे अफ्रीका और तेजी से उभरते बाजारों में कारोबार मजबूती से बढ़ रहा है।

अमेरिकी बाजार में सभावनाएं 

अमेरिकी बाजार में देर से कदम रखना सिप्ला के लिए फायदेमंद हो रहा है। अपनी कई प्रतिस्पद्र्धी कंपनियों के मुकाबले सिप्ला को कम दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी बाजार में लगातार बढ़ती मौजूदगी से कमाई में लगातार इजाफा होना चाहिए। गोल्डमैन सैक्स का कहना है,'अमेरिका में अब तक कम उपस्थिति से कीमतों में दबाव और नियामकीय अनुपालन की बढ़ती चर्चाओं के बावजूद वहां के बाजार में सिप्ला के लिए खासी संभावनाएं हैं।'

विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की अमेरिका में सालाना बिक्री 40 करोड़ डॉलर है और इसमें अच्छी खासी तेजी बनी रहेगी। अगर मौजूदा बिक्री में 10 प्रतिशत की गिरावट आती है और 15-20 नए उत्पादों से 11 करोड़ डॉलर अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हुई तो भी अमेरिका में शुद्ध राजस्व में बढ़ोतरी 7 करोड़ डॉलर (17.5 प्रतिशत) रहेगी। दीर्घ अवधि में सिप्ला को श्वसन, स्नायू तंत्र, कैंसर और बायोसिमिलर दवाएं लाने के प्रयासों में अच्छी सफलता मिलनी चाहिए। फिलहाल इसके इन्हेलेशन प्रोडक्ट जैसे अलब्यूटेरॉल की जेनरिक दवा, एडवेयर और स्तन कैं सर के इलाज में काम आने वाली एबरेक्सेन पर सबकी नजर रहेगी। इन उत्पादों के 2020 तक बाजार में आने की संभावनाएं हैं, जिसके बाद कंपनी की संभावनाएं और मजबूत होंगी।  

नियामकीय मुद्दे

इस साल जनवरी में अमेरिकी खाद्य एवं दवा नियामक (एफडीए) ने कंपनी के गोवा संयंंत्र का 8 बार निरीक्षण किया। अमेरिका में कंपनी की कुल बिक्री में इस संयंत्र का योगदान 40-60 प्रतिशत तक है। सिप्ला ने कहा कि एफडीए का निरीक्षण उत्पाद की अनुमति दिए जाने से पूर्व होने वाली औपचारिकताओं से जुड़ा था। ये सभी निरीक्षण प्रक्रियात्मक प्रवृत्ति के थे और कंपनी ने एफडीए को सभी आवश्यक सूचनाएं मुहैया कराई हैं। फिलहाल सिप्ला का कहना है कि यहां विनिर्मित होने वाली या भविष्य के लिए नई दवाओं की अनुमति लेने में कंपनी को कोई परेशानी नहीं होगी। कंपनी ने कहा कि संयंत्र के निरीक्षण के बाद से उसे दो दवाओं की अनुमति भी मिल गई है।

विश्लेषक भी इस अवलोकन को सूचना की अक्षुण्णता से जोड़ कर नहीं देखते हैं। एचएसबीसी के विश्लेषकों का कहना है कि सिप्ला निकट अवधि में एफडीए अवलोकन को सफलतापूर्वक बंद कर सकती है। इस तरह, इसने शेयर के लिए सकरात्मक रुख और 680 रुपये का लक्ष्य मूल्य बरकरार रखा है।

मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि आने वाले समय में निरीक्षण जैसे घटनाएं शायद ही बढेंगी। विदेशी ब्रोकरेज कंपनियां सिप्ला की आय में संभावनाओं में तेजी को लेकर उत्साहित हैं। अमेरिका और दूसरे भौगोलिक क्षेत्रों में बिक्री की अच्छी संभावनाओं और लागत मेंं कमी के साथ तार्किक मूल्यांकन के ये ब्रोकरेज कंपनियां कंपनी को लेकर सकारात्मक हैं। मैक्वारी ने 670 रुपये का लक्ष्य मूल्य बरकरार रखा है। बिक्री में सुधार और मार्जिन से जुड़ी संभावनाओं को लेकर सिप्ला बड़ी दवा कंपनियों की फेहरिस्त में शामिल है। 

घरेलू बिक्री में तेजी लगातार जारी है। दिसंबर तिमाही में इसमें 15 प्रतिशत इजाफा हुआ था, जो ल्यूपिन, सन फार्मा और डॉ. रेड्डïीज जैसे कंपनियों की 3 से 8 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले कहीं अच्छा है। श्वसन, त्वचा और कैंसर जैसे रोगों के उपचार खंड में कंपनी की बढ़त से प्रतिस्पद्र्धा सीमित रहेगी। इससे विकास दर में निरंतरता बनी रहेगी और विश्लेषकों के अनुसार मुनाफे पर भी इससे अच्छा असर पड़ेगा। 
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