होम » Investments
«वापस

वैश्विक व्यापारिक जंग का असर सभी बाजारों पर

समी मोडक |  Apr 08, 2018 09:42 PM IST

वैश्विक स्तर पर व्यापारिक युद्ध के जोखिम की संभावनाओं की वजह से वैश्विक इक्विटी बाजार में ऊंचे स्तर का उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। फरवरी के आखिर तक लगभग सभी देशों के बेंचमार्क सूचकांकों में तब गिरावट देखी गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पहली बार स्टील और एल्युमीनियम के आयात पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी। भारत जैसे कुछ बाजारों का अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उनके शेयर बाजारों से कम जुड़ाव है,। मगर फिर भी इन बाजारों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया क्योंकि व्यापारिक जंग छिडऩे के डर से विदेशी निवेशकों के बीच जोखिम कम करने की धारणा प्रबल होने लगी। विश्लेषक आगामी हफ्ते में बिकवाली का दबाव महसूस करने लगे है क्योंकि अमेरिका के डाउ जोंस सूचकांक में 2.3 फीसदी की गिरावट आई। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि वह चीनी सामान के आयात पर 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगा रहा है। इसके बाद शुक्रवार को दिन भर में सूचकांक में 3.1 फीसदी तक की गिरावट आई। चीन के एक वाणिज्यअधिकारी ने कहा कि इसका बड़ा जवाब दिया जाएगा। 
 
चीन ने अमेरिका की शुल्क लगाने की घोषणा के बाद 'जैसे को तैसा' वाली रणनीति अपनाई है जिससे निवेशकों में आशंका बढ़ी है और उन्हें व्यापारिक जंग की आशंका नजर आने लगी है। निवेशकों में संरक्षणवाद का डर सता रहा है जिससे वैश्विक वृद्धि में कमी आ सकती है, महंगाई बढ़ सकती है और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हफ्ते बाजार की नजर दो प्रमुख घटनाक्रम पर होगी। इनमें उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता (नाफ्टा) के लिए फिर से होने वाली बातचीत और मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के द्वारा दिया जाने वाला महत्त्वपूर्ण भाषण शामिल है। अमेरिका और चीन के रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट के बीच ही बाजार शी के भाषण से यह संकेत लेगा कि चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ व्यापारिक विवाद के संदर्भ में क्या दांव चल सकता है।  
 
चीन और अमेरिका के बीच तनाव उस वक्त से बढऩे लगा जब अमेरिका ने पिछले हफ्ते चीन से आने वाले करीब 1,300 उत्पादों की सूची जारी करते हुए उन पर ज्यादा आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। उसने यह कदम अमेरिका की बौद्धिक संपदा के गलत इस्तेमाल पर रोक के मकसद से उठाया है। चीन ने भी जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिका से होने वाले सोयाबीन, वायुयान और कार के 50 अरब डॉलर मूल्य के आयातों पर शुल्क लगाने की योजना की घोषणा की। बाजार में दिख रही हाल की अस्थिरता अमेरिकी फैसले की वजह से है जिसने चीन के सामान पर 100 अरब डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा की है। एएमपी कैपिटल के प्रमुख (निवेश रणनीति) शेन ओलिवर का कहना है, 'ट्रंप चीनी सामान के आयात पर 100 अरब डॉलर का शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रख रहे हैं। सबसे अच्छी बात तो यह होगी कि बातचीत करके कोई समाधान निकाला जाए लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है तो 100 अरब डॉलर के इस अतिरिक्त शुल्क से जोखिम और बढ़ेगा।'
 
सिटीबैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के एक अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि व्यापार लागत में 10 फीसदी की बढ़ोतरी वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 1 से 1.5 फीसदी तक की कमी कर सकती है। ब्राजील, भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजार, जिनकी अमेरिकी निर्यात में कम हिस्सेदारी है, के शेयर बाजारों पर भी दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव का असर दिख रहा है। सिटी बैंक के विश्लेषक सुरेंद्र गोयल और विजित जैन ने 25 मार्च की एक रिपोर्ट में कहा, 'भारत पर इसका न्यूनतम असर होगा लेकिन अगर जोखिम वाले हालात बढ़ते हैं तो वैश्विक वृद्धि पर असर पड़ेगा। वैश्विक जोखिम बढऩे से भारतीय बाजार भी प्रभावित होगा जिसका मूल्यांकन फिलहाल प्रीमियम स्तर पर हो रहा है।' 2018 के उच्च स्तर के मुकाबले भारतीय बाजार में फिलहाल 7.6 फीसदी की गिरावट दिख रही है। यह गिरावट घरेलू कारकों की वजह से है। मसलन बैंकिंग फर्जीवाड़ा, राजनीतिक अनिश्चितता और तेल की बढ़ती कीमतों का भी बाजारों पर असर दिख रहा है। वैश्विक व्यापार में तनाव की वजह से हाल में बाजार में गिरावट का रुझान दिखा है।
 
अमेरिकी बाजार में भारत से तीन चीजों का बड़ा निर्यात होता है। इनमें आभूषण, दवाइयां और कपड़े शामिल हैं। अमेरिका की तरफ से होने वाली संभावित व्यापार कार्रवाई की वजह से फार्मास्यूटिकल और आईटी सेवाएं दो ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं जिन्हें ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र में शामिल किया जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि व्यापार जंग बढऩे की स्थिति में धातु के साथ-साथ इन दो अहम क्षेत्रों के शेयरों में भारी गिरावट देखी जा सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि उपभोक्ता शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। इस हफ्ते बाजार में कारोबार भारी रहेगा। निवेशक भी उम्मीद कर रहे हैं कि मार्च तिमाही के नतीजे उनकी खुशी की अहम वजह हो सकते हैं। 
कीवर्ड share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक