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दवा कंपनियों के लिए कम नहीं होंगी दिक्कतें

राम प्रसाद साहू |  Apr 08, 2018 09:43 PM IST

वित्त वर्ष 2018 फार्मा उद्योग के लिए खास नहीं रहा और वित्त वर्ष 2019 से भी कोई खास उम्मीदें नहीं हैं। 1 अप्रैल से दवाओं को मिलने वाली मंजूरी में तेजी, साथ ही दूसरी दवाओं के लिए भी प्रतिस्पद्र्धा तेज होने से दवा क्षेत्र की कंपनियों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (यूएसएफडीए) के नए दिशानिर्देश से पिछले कुछ महीनों से दवाओं की अनुमति दिए जाने की गति कम हो गई थी, क्योंकि कंपनियों को इसके अनुरूप व्यवस्थित होने में समय लगा। अब कंपनियों के नए दिशानिर्देशों के पालन करने से अप्रैल से दवाओं की अनुमति देने में अधिक समय नहीं लगेगा, जिससे प्रतिस्पद्र्धा और अधिक बढ़ जाएगी। क्रेडिट सुइस के अनुभव अग्रवाल और चंकी शाह का मानना है कि कुछ दवाओं पर अब पहले के मुकाबले कम मुनाफा मिलने से दवा उद्योगों के मुनाफे पर खासा असर पड़ेगा। उन्हें अगले दो सालों के दौरान एब्रिविएटेड न्यू ड्रग ऐप्लीकेशन (एएनडीए) में 50 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है और इससे कीमतों में दो अंकों में गिरावट आ सकती है।  

 
विनिर्माण के मोर्चे पर दिशानिर्देशों के पालन में निरंतरता नहीं रहने से हालात और बिगड़ गए हैं। हाल में अपने निरीक्षणों में अमेरिकी एफडीए ने जो बातें कही हैं, उनसे स्थिति बदतर हो गई है। ग्लेनमार्क, ल्यूपिन, अरबिंदो और सिप्ला जैसी कंपनियों के विनिर्माण संयंत्रों में हाल के महीनों में नियमों के उल्लंघन के कई मामले सामने आए हैं। स्पार्क कैपिटल के हरिथ अहमद और कृष्णा प्रकाश आर का कहना है कि एक ही तरह के अवलोकन और महत्त्वपूर्ण संयंत्रों में लंबे समय तक मुद्दे लटके रहने और इनका समाधान नहीं हो से निवेशकों को हताशा हुई है। इन दोनों का कहना है कि अमेरिकी एफडीए ने भारतीय संयंत्रों को लेकर अपने निरीक्षण के निष्कर्षों में बदलाव करने से चिंताएं और बढ़ गई हैं। दवा क्षेत्र की कंपनियां अपने आधार कारोबार पर दबाव कम करने के लिए सभी दांव चल रही थीं। हालांकि इस मोर्चे पर उनकी प्रगति कमाबेश धीमी रही है। जिन क्षेत्रों में भारतीय दवा कंपनियों ने निवेश किए हैं, उनमें प्रतिस्पद्र्धा काफी बढ़ गई है। इन क्षेत्रों में डर्मेटोलॉजी, ऑप्थल्मोलॉजी, ओंकोलॉजी और हॉर्मोनल ड्रग्स शामिल हैं। स्पार्क कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि अवसरों के सही इस्तेमाल के लिए क्रियान्वयन का स्तर पहले की अपेक्षा सुधारना होगा। 
 
मिसाल के तौर पर सन फार्मा (और इसकी सहयोग माइलन) को आवश्यक परीक्षणों के बाद सूजन में के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा टिल्ड्रा के लिए अनुमति मिली है। हालांकि अवसर बड़ा है, लेकिन कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार कई प्रतिस्पद्र्धी दवाओं के कारण इसे व्यावसायिक बाधाओं समेत अन्य दूसरी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। दूसरी प्रतिस्पद्र्धी दवाओं को देखते हुए इसके लिए कई व्यावसायिक बाधाएं भी हैं। 
 
जहां तक कैडिला हेल्थकेयर की बात है तो देर-सबेर लियाल्डा के लिए तेवा (टेवा)और माइलन से टक्कर मिलने का मतलब होगा कि जिस उत्पाद के लिए कम प्रतिस्पद्र्धा की उम्मीद थी, उससे मिलने वाला मुनाफा आगे चलकर कम हो जाएगा। दूसरी दवाओं की बात करें तो कंपनी को पोटेशियम साइट्रेट (गुर्दे की दवा) में भी स्ट्राइड्स शशुन और तेवा से प्रतिस्पद्र्धा का सामना करना पड़ रहा है। टॉपरॉल जैसी कंपनियों के लिए कुछ नई संभावनाएं भी हैं और वित्त वर्ष 2019 में दवाओं की कतार उनकी लंबी है, लेकिन कैडिला के लिए कीमतें कम होने का जोखिम अधिक है, क्योंकि यह अपने अपने अमेरिकी राजस्व का 45 प्रतिशत हिस्सा अपने शीर्ष तीन उत्पादों से हासिल करती है। 
 
नियामकीय चुनौतियों, अप्रैल से अधिक उत्पादों को अनुमति और महंगे उत्पादों वाले कारोबार में ह्रïास की भरपाई करने में जेनरिक दवाओं के असफल रहने के मद्देनजर निवेशकों को तस्वीर साफ होने तक इंतजार करना चाहिए, खासकर अमेरिकी बाजार से राजस्व में निरंतरता बहाल होने तक धैर्य रखना चाहिए। केवल कम मूल्यांकन को देखते हुए निवेश करने से बचें। 
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