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शेयरधारकों ने उठाए सवाल

उज्ज्वल जौहरी |  Apr 08, 2018 09:44 PM IST

दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला सहित कई अल्पांश शेयरधारक मणिपाल हॉस्पिटल्स के साथ फोर्टिस हेल्थकेयर (एफएचएल) के सौदे पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसी खबर है कि एक निजी इक्विटी कंपनी ने मतदान का अतिरिक्त अधिकार प्राप्त करने के लिए एफएचएल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा दी है। यह भी कहा जा रहा है कि सौदे का विरोध करने के लिए यह अधिक से अधिक छोटे निवेशकों और हेज फंडों को लुभा रही है। इन बातों से हैरान होने की जरूरत नहीं है। सौदे की घोषणा के  साथ ही निवेशकों ने अपनी नाखुशी जता दी थी। सौदे की घोषणा के बाद अगले दिन 28 मार्च को एफएचएल के शेयर में 13 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई थी। निवेशकों की मुख्य चिंता सौदे के मूल्यांकन को लेकर है। बाजार का मानना है कि फोर्टिस के लिए यह फायदेमंद नहीं है। बाजार नए प्रवर्तकों के आने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन इसके साथ ही बेहतर मूल्यांकन की भी उम्मीद कर रहा था। 

 
सौदे के तहत एफएचएल के हॉस्पिटल कारोबार का मणिपाल हॉस्पिटल्स के साथ विलय होना है और इसके बाद बनने वाली नई इकाई स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध कराई जाएगी। एफएचएल के शेयधारकों को एफएचएल के प्रत्येक 100 शेयरों के लिए नई इकाई में 10.83 शेयर मिलेगा। सौदे में फोर्टिस के हॉस्पिटल कारोबार का मूल्यांकन प्रति शेयर 96 से 97 रुपये तय किया गया है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह इस स्वास्थ्य उद्योग के मुकाबले 22 प्रतिशत डिस्काउंट पर है। हालांकि इस सौदे की खास बात यह है कि विलय के बाद अस्तित्व में आने वाली नई इकाई देश में सबसे बड़ी हॉस्पिटल शृंखला में शुमार हो जाएगी और पूरे देश में इसकी मौजूदगी होगी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि नई इकाई में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के प्रस्ताव के मद्देनजर मूल्यांकन एफएचएल शेयरधारकों के लिए हतोत्साहित करने वाला लगता है। इसके उलट संयुक्त हॉस्पिटल कारोबार में एफएचएल परिचालन मुनाफे में 68 प्रतिशत योगदान देगी। 
 
मणिपाल डॉयग्नॉस्टिक कारोबार एसआरएल (20 प्रतिशत एचएचएल और शेष निवेशकों से) में 50.9 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदेगी। एडलवाइस के विश्लेषकों का मानना है कि यह सौदा मणिपाल-टीपीजी के पक्ष में दिख रहा है। उन्हें इस सौदे के सफल होने की अधिक संभावना नजर नहीं आ रही है। मणिपाल हॉस्पिटल्स और टीपीजी सिंगापुर में सूचीबद्ध आरएचटी हेल्थ ट्रस्ट खरीदने के लिए 39 अरब रुपये की प्राथमिक पूंजी देगी। हालांकि इससे हॉस्पिटल कारोबार का परिचालन मुनाफा जरूर सुधरेगा, लेकिन एफएचएल के शेयरधारक थोड़े नुकसान की स्थिति में हैं। एडिलवाइस के विश्लेषकों का मानना है कि एसआरएल में हिस्सेदारी बेचने से मिली 17 अरब रुपये रकम के इस्तेमाल और आरएचटी में भविष्य में हिस्सेदारी बेचने को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 
 
कई सवालों के जवाब अब तक नहीं मिलने से विशेषज्ञ इंतजार कर रहे हैं और विश्लेषक रेटिंग की समीक्षा कर रहे हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि बनने वाली नई इकाई के वित्तीय आंकड़े को लेकर जानकारी सीमित रहने, सौदे के बाद नए प्रबंधन की नीति और सौदा पूरा होने की समय सीमा को लेकर अनिश्चितता (शेयरधारकों की  अनुमति सहित कई निमाकीयी अनुमति की जरूरत) आदि के कारण वह रेटिंग की समीक्षा कर रही है। सौदा पूरा होने तक उन्हें शेयर कीमतों में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की उम्मीद नहीं है। सौदे के आधार पर उन्होंने फिलहाल प्रति शेयर 116 रुपये मूल्य तय किया है। 
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