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बाजार गिर जाए तो भी सिप से निवेश करते जाएं

संजय कुमार सिंह और जयदीप घोष |  Apr 08, 2018 09:44 PM IST

जब 25 साल की मानव संसाधन पेशेवर सोनम ठकराल ने एक इक्विटी फंड में अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के प्रतिफल को देखा तो वह यह जानकर निराश हुईं कि उसने ऋणात्मक प्रतिफल यानी घाटा दिया है। उन्होंने यह एसआईपी पिछले साल शुरू की थी। ठकराल की तरह देश भर के खुदरा निवेशक, विशेष रूप से पिछले साल एसआईपी के जरिये बाजारों में प्रवेश करने वाले निवेशक इन दिनों बहुत चिंतित हैं। इसकी वजह यह है कि उनके अपने निवेश पर प्रतिफल ऋणात्मक हो गया है। 

 
इसके बावजूद फंड प्रबंधक एसआईपी को शेयर बाजारों में लंबे समय के निवेश का सबसे बेहतर तरीका बता रहे हैं। इस समय 2 करोड़ से अधिक एसआईपी हैं जिनसे म्युचुअल फंड उद्योग में हर महीने 6600 करोड़ रुपये आते हैं।  कई वैश्विक मसलों की वजह से बाजार का रुझान कमजोर पड़ गया है। इन मसलों में अमेरिका के व्यापार युद्ध शुरू करने की धमकी देना और उसके केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इस साल तीन बार और दरें बढ़ाने का संकेत देना है। इसके अलावा घरेलू दिक्कतें भी हैं। सुंदरम म्युचुअल के मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटी) एस कृष्ण कुमार ने कहा, 'शेयरों पर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर और लाभांश वितरण लगाए जाने और पंजाब नैशनल बैंक घोटाले से निवेशकों का रुझान प्रभावित हुआ है।'
 
यह उतार-चढ़ाव जल्द ही खत्म होने के भी आसार नहीं हैं। कोटक एसेट मैनजेमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा, 'अगले 15 महीने उतार-चढ़ाव भरे रहने के आसार हैं। राजनीतिक अनिश्चितता, राजकोषीय घाटे से लेकर चालू खाते के घाटे तक बिगड़ते आर्थिक संकेतक, व्यापार युद्ध आदि से बाजारों में अस्थिरता बनी रहेगी। अच्छे मॉनसून और आमदनी में सुधार से गिरावट थम सकती है।' पिछले कुछ महीनों के दौरान करीब 9 फीसदी की भारी गिरावट से एक-तिहाई इक्विटी योजनाओं का प्रतिफल 0.18 फीसदी से 16 फीसदी तक घटा है। इन योजनाओं में निवेशकों ने पिछले साल पैसा लगाया था। 
 
गिरते बाजारों से फायदा 
 
अपनी एसआईपी बंद करने या जुड़े लाभ को निकालने का फैसला लेने से पहले आपको इस तथ्य पर विचार करना चाहिए। अगर आपने 3 से 5 वर्षों या अधिक समय तक निवेश जारी रखा तो आपको संभवतया अच्छा खासा मुनाफा मिलेगा। इसलिए फिलहाल इक्विटी से निकलने की कोई वजह नहीं है। अगर आपने पिछले साल ही निवेश शुरू किया है तो गिरता हुआ बाजार आपके लिए फायदेमंद साबित होने के आसार हैं। ऊंची नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर म्युचुअल फंड यूनिट खरीदने के बजाय आपको उतनी ही निवेश राशि में ज्यादा यूनिट मिलेंगी। उदाहरण के लिए अगर आप उस फंड में हर महीने 10,000 रुपये निवेश करते हैं, जिसकी एनएवी 200 रुपये है तो आपको हर महीने 50 यूनिट मिलेंगी। अगर अगले महीने एनएवी गिरकर 175 रुपये पर आ जाता है तो आपको 57.14 यूनिट मिलेंगी। अगर उसके बाद एनएवी बढ़कर 250 हो जाती है तो इन अतिरिक्त 7.14 यूनिट से आपको 535.5 रुपये मिलेंगे। निस्संदेह बाजारों को सुधरने में एक या दो महीने से ज्यादा समय लग सकता है। लेकिन जब वे सुधरेंगे तो आपको अपने पास अतिरिक्त यूनिटों का फायदा मिलेगा। 
 
एसआईपी बंद न करें 
 
विशेषज्ञ यह सुझाव देने में एकमत हैं कि युवा निवेशकों को अपनी एसआईपी जारी रखनी चाहिए और बाजारों से पैसा नहीं निकालना चाहिए। शाह कहते हैं, 'एसआईपी का मूल मकसद ही बाजार के उतार-चढ़ावों में निवेश करना है। जब गिरावट की वजह से बाजार का मूल्यांकन कम हो जाता है तो अपनी एसआईपी बंद करना बुद्धिमानी वाला कदम नहीं होगा।' वे कहते हैं कि बीते वर्षों में ऐसे दौर आए हैं, जब एसआईपी प्रतिफल 2008-09 और 2012-13 में एसआईपी प्रतिफल ऋणात्मक रहे। शाह ने कहा, 'जो लोग कम या ऋणात्मक प्रतिफल की वजह से रुक जाते हैं और अपनी एसआईपी बंद कर देते हैं, वे बाजार में तेजी आने पर मौका गंवा देते हैं। लगातार निवेश करने वाले निवेशकों को फायदा मिलता है।'
 
ऐसा करने से ऊंचे मूल्य पर निवेश करने का भी जोखिम होता है। पिछले साल मार्च में निफ्टी करीब 23 के प्राइस टू अर्निंग (पीई) रेश्यो पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी मिडकैप 50 (33 से 49) और निफ्टी स्मॉल कैप 50 (45 से 56) और ज्यादा मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे थे। सेबी में पंजीकृत एक निवेश सलाहकार पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'अगर आप बाजारों में ऊंचे मूल्यांकन पर प्रवेश करते हैं तो इस बात के आसार होतेे हैं कि आपको निकट भविष्य में कमजोर प्रतिफल मिलेगा।'
 
 साथ में दी गई सारणी भी इसे बयां करती हैं। हालांकि अगर आप अपना एसआईपी लगातार जारी रखते हैं तो आपको लंबी अवधि में अच्छा प्रतिफल मिलने की संभावना है। इक्विटी में निवेश करते समय आपको निवेश अवधि कम से कम 7 से 10 साल रखनी चाहिए। राघव ने कहा, 'अगर आपने बाजार के ऊंचे स्तरों पर भी निवेश किया है तो यह संभव है कि 7 से 10 साल में हम एक अन्य ऊंचाई पर होंगे, जिसका स्तर पिछली ऊंचाई के स्तर से काफी ऊंचा होगा।'
 
कुछ फेरबदल की दरकार 
 
हाल की तेजी में मिड और स्मॉल-कैप फंडों ने लार्ज-कैप फंडों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। आम तौर पर ये फंड तेजी से बढ़ते बाजार में तेजी से बढ़ते हैं और बाजार में गिरावट के समय तेजी से गिरते हैं।  अगर आपने अपने पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा मिड और स्मॉल-कैप फंडों में निवेश किया है तो आपको इसमें बदलाव करना चाहिए। आदर्श स्थिति यह है कि आपको अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 70 से 75 फीसदी हिस्सा लार्ज-कैप फंडों में रखना चाहिए। लार्ज-कैप फंडों में ज्यादा स्थायित्व होता है। इसके अलावा इक्विटी पोर्टफोलियो का 25 से 30 फीसदी हिस्सा मिड और स्मॉल-कैप फंडों में निवेश किया जाना चाहिए। 
 
बहुत से युवा निवेशकों ने अपना पूरा पैसा शेयरों में लगाया हुआ है। उनके द्वारा निवेश की गई राशि में बढ़ोतरी होने पर इसे फिक्स्ड इनकम और सोने में भी निवेश किया जाना चाहिए। एक विविधीकृत पोर्टफोलियो शुद्ध इक्विटी पोर्टफोलियो की तुलना में कम उतार-चढ़ाव वाला होता है। एक फाइनैंशियल प्लानर अर्णव पांडया ने कहा, 'हर छह महीने में यह देखें कि आपका फंड श्रेणी के औसत और बेंचमार्क से कमजोर प्रदर्शन न करे।'
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