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सोना बढ़ाएगा आपकी रकम की चमक?

संजय कुमार सिंह |  Apr 15, 2018 08:13 PM IST

फायदे का सौदा

विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को संतुलित बनाने के लिए उसमें सोना शामिल करना चाहिए
वर्ष 2002 में सोने में तेजी की शुरुआत हुई थी और वर्ष 2012 तक यह तेजी बरकरार रही
वर्ष 2013 से 2015 तक सोने में कमजोर प्रतिफल दर्ज किया गया तथा वर्ष 2016 में इसके प्रतिफल में मामूली सुधार आया
वर्ष 2016 में जहां इसमें 11.23 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, वहीं 2016 में 5.34 फीसदी का सुधार दर्ज किया गया

इस साल शेयर बाजार दबाव में हैं। दुनिया भर की यही स्थिति है। जमीन-जायदाद में सुस्ती है। बॉन्ड में भी आशंका के बादल हैं। तो क्या सबसे सुरक्षित समझा जाने वाला सोना निवेश के लिहाज से बेहतर है? क्रिप्टो मुद्राओं के घटते जुनून के बीच क्या सोना अच्छा प्रतिफल दे सकता है? विशेषज्ञों की राय है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को संतुलित बनाने के लिए उसमें सोने को शामिल करना चाहिए। सोने ने इस साल अब तक करीब 5 फीसदी की तेजी दर्ज की है। वर्ष 2002 में सोने में तेजी की शुरुआत हुई थी और वर्ष 2012 तक यह तेजी बरकरार रही। वर्ष 2013 से 2015 तक सोने ने कमजोर प्रतिफल दर्ज किया। उसके बाद 2016 में इसके प्रतिफल में मामूली सुधार आया। 2016 में जहां इसमें 11.23 फीसदी की तेजी दर्ज की गई वहीं 2016 में 5.34 फीसदी का सुधार दर्ज किया गया। इस साल अभी तक सोने में 4 फीसदी से अधिक की तेजी आ चुकी है। 

सोने में मौजूदा तेजी की मुख्य वजह है अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा तनातनी। दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां आयातित सामान पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा की है जिससे आशंका हो गई है कि इस टकराव का वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। बरसों में तैयार वैश्विक आपूर्ति शृंखला भी इस जंग की चपेट में आ सकती है। दोनों देशों के टकराव से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार सुस्त हो सकती है और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। इसी आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक भी सुरक्षित समझे जाने वाले सोने में पैसा लगाने को प्रेरित हुए हैं।

व्यापार जंग का केंद्रीय बैंकों के पास जमा डॉलर भंडार पर भी प्रभाव पड़ेगा। चूंकि डॉलर का इस्तेमाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में होता है। इसलिए कई केंद्रीय बैंकों के पास भारी मात्रा में डॉलर के भंडार हैं। अगर दरों को लागू करने और अन्य नियामकीय बाधाओं की वजह से व्यापार के तौर-तरीके में बदलाव आता है तो कई केंद्रीय बैंक अपने डॉलर भंडार में कमी कर सकते हैं और उन देशों की मुद्राओं का भंडार बना सकते हैं जिनके साथ वे ज्यादा व्यापार करते हैं। यह भी हो सकता है कि ऐसे देशों के केंद्रीय बैंक अपने कारोबारी भागीदारों की मुद्रा के जमा भंडार को लेकर ज्यादा आश्वस्त महसूस न करें। उस सूरत में वे अपने पास अधिक सोना जमा कर सकते हैं। 

इस समय अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, जापान आदि समेत दुनियाभर के कई केंद्रीय बैंक दरों में आक्रामक वृद्धि की बात कर रहे हैं और अपनी सस्ती मुद्रा में कमी कर रहे हैं। इन सबके कारण दुनियाभर में तरलता में कमी आ सकती है। वैश्विक वित्तीय संकट के बाद दुनियाभर के परिसंपत्ति बाजार भारी भरकम नकदी सहायता के आदी हो गए थे।  क्वांटम ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के वरिष्ठ फंड प्रबंधक (वैकल्पिक निवेश) चिराग मेहता कहते हैं, 'यदि केंद्रीय बैंक नकदी में कमी का जोखिम लेते हैं तो यह पांसा उलटा भी पड़ सकता है। जाहिर है, ऐसी स्थिति सोने के लिए अच्छी होगी।'

जैसे-जैसे वृद्धि में सुधार आ रहा है, अमेरिका जैसे विकसित देशों में मुद्रास्फीति भी बढ़ेगी। यदि केंद्रीय बैंक नकदी को लेकर धीमे-धीमे सख्ती करते हैं तो मुद्रास्फीति भी भाग सकती है। अधिक मुद्रास्फीति के माहौल में सोने का प्रदर्शन अच्छा रहने के आसार हैं। इस प्रकार, सोने की चमक काफी हद तक इससे जुड़ी हुई है कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंक जोखिम उठाए बगैर क्या अपनी नरम मौद्रिक नीति बंद कर पाएंगे? अगर वे विफल रहते हैं तो सोने की चमक और बढ़ सकती है। मौजूदा माहौल में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी हिस्सा सोने का भी रखना चाहिए। यह निवेश आवंटन का वह स्तर है जिससे पोर्टफोलियो में अस्थिरता कम होगी और प्रतिफल में मजबूती ओगी। यदि आप लंबे समय तक निवेश बनाए रखते हैं तो सॉवरिन गोल्ड बॉन्डों में निवेश करें जो 2.50 प्रतिशत का सालाना ब्याज देते हैं। 

हालांकि स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार कर रहे सॉवरिन गोल्ड बॉन्डों में ज्यादा तरलता नहीं है। यदि आपको बेचना पड़े तो अंकित मूल्य से 6 प्रतिशत के आसपास डिस्काउंट पर बिक सकता है। लेकिन अगर आप संक्षिप्त अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो कम लागत वाले गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) के जरिये निवेश करें।
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