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नौजवान और नया रोजगार, क्रेडिट कार्ड और कर्ज पाने में मुश्किलें अपार!

प्रियदर्शिनी माजी और संजय कुमार सिंह |  Apr 15, 2018 08:14 PM IST

क्रेडिट स्‍कोर की ठौर

इस कार्ड का इस्तेमाल जिम्मेदार तरीके से करते हुए अपना क्रेडिट स्कोर बनाना चाहिए ताकि दूसरे कर्ज में दिक्कत न आए
सावधि जमा खाते की रकम के मुकाबले कार्ड की सीमा थोड़ी कम होगी
युवा पेशेवर जिनका भले ही वेतन खाता हो, इसके बावजूद बैंक उन्‍हें क्रेडिट कार्ड देने से इनकार कर सकते हैं क्योंकि उनका कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं होता है
ऐसे लोगों को सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड का विकल्प अपनाना चाहिए
इसके लिए उन्हें सावधि जमा खाता खोलना होगा

युवा लोगों के लिए वाकई यह विचित्र स्थिति है। अगर किसी युवा ने कभी कर्ज नहीं लिया तो उसके लिए ऋण लेना वाकई टेढ़ी खीर है। बैंक किसी ग्राहक को बिना क्रेडिट स्कोर के कोई क्रेडिट कार्ड या निजी ऋण देने से हिचकते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि जब तक उन्हें कोई क्रेडिट कार्ड या निजी ऋण नहीं मिलेगा तब तक उनका क्रेडिट स्कोर भी नहीं बनेगा। ऐसे लोगों को अपना क्रेडिट रिकॉर्ड तैयार करने के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल करने की जरूरत है या फिर कर्ज के वैकल्पिक स्रोत तलाशने होंगे।

ईवाई फिन टेक एडॉप्शन इंडेक्स 2017 की ताजा शोध रिपोर्ट के मुताबिक बैंक क्रेडिट स्कोर उपलब्ध न होने या अधूरा होने पर सीधे कर्ज देने से मना कर देते हैं। आमतौर पर छात्रों, कर्ज बढ़वाने वाले ग्राहकों, बैंकों के नए ग्राहकों, लघु एवं मध्यम उद्यमों को अमूमन कर्ज देने से मना किया जाता है जबकि ये सब मिलकर बाजार का करीब 90 फीसदी हिस्सा होते हैं। डिजिटल कर्ज देने वाली कंपनी स्टैशफिन के आंकड़ों के मुताबिक महज 6-7 फीसदी आबादी को ही कर्ज मिल पाता है। पिछले तीन सालों में करीब एक अरब युवा पेशेवर काम करने लगे हैं लेकिन शहरी वयस्क युवाओं तक क्रेडिट कार्ड की पहुंच महज 1.7 फीसदी तक ही है। यह अंतर बरकरार है क्योंकि कई परंपरागत ऋणदाता नए लोगों को कर्ज नहीं देते हैं। 

कैसे बने क्रेडिट स्कोर

युवा पेशेवर को सबसे पहले क्रेडिट कार्ड के लिए अपने उस बैंक से संपर्क करना चाहिए जहां उसका वेतन आता है। आमतौर पर बैंक वेतनभोगी खाताधारकों को क्रेडिट कार्ड की पेशकश करते हैं भले ही उनका क्रेडिट स्कोर नहीं बना हो। हाल के समय में क्रेडिट कार्ड का अनुरोध करने वाले कई युवाओं के अनुरोध को नामंजूर किया जाने लगा है।

क्रेडिट स्कोर को सुधारने में मदद करने वाली कंपनी 'क्रेडिट सुधार' के सह संस्थापक अरुण राममूर्ति का कहना है, 'ऐसा इस वजह से हो रहा है क्योंकि बैंक इस वक्त बेहद सतर्क है।' बिना क्रेडिट स्कोर वाले लोगों के पास विकल्प यह होता है कि वे अपने बैंक या किसी दूसरे बैंक को एक सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के लिए कहें। फीचर और इस्तेमाल के लिहाज से यह कार्ड सामान्य क्रेडिट कार्ड की तरह ही होता है। 

इसमें एकमात्र फर्क यही है कि बैंक इस कार्ड को जारी करने से पहले कुछ जमानत लेता है। बैंक एक सावधि जमा खाता खुलवाते हैं और इसके बाद क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं। इस तरह का कार्ड जारी करते वक्त बैंक को कर्ज लेने वाले व्यक्ति के क्रेडिट प्रोफाइल की चिंता नहीं करनी पड़ती क्योंकि अगर वह व्यक्ति क्रेडिट कार्ड की रकम नहीं चुकाता तो बैंक जमा रकम से पैसे वसूल सकता है। ऐसे कार्ड में राशि की सीमा अमूमन सावधि जमा की रकम की तुलना में कम होता है। मिसाल के तौर पर आईसीआईसीआई बैंक के कोरल क्रेडिट कार्ड में सावधि जमा रकम की 85 फीसदी तक क्रेडिट सीमा होती है। अगर युवा पेशेवर इस सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो बैंक 8-9 महीने बाद इस कार्ड को सामान्य क्रेडिट कार्ड में बदल सकते हैं। किसी व्यक्ति द्वारा सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को दी जाती है। ऐसे में क्रेडिट स्कोर भी तैयार होने लगता है और वह व्यक्ति दूसरी तरह के कर्ज के लिए भी पात्रता हासिल कर लेता है।

क्रेडिट स्कोर में सुधार

अगर किसी व्यक्ति का क्रेडिट से जुड़ा पहले का कोई ब्योरा नहीं है इसका मतलब यह हुआ कि उसका क्रेडिट स्कोर बेहद खराब होगा। लेकिन स्कोर तब भी खराब हो सकता है जब उस व्यक्ति ने पहले अपने क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल किया हो। भुगतान न करने की स्थिति में ग्राहकों को सबसे पहले बैंक से संपर्क करना चाहिए। फिर बकाया रकम का भुगतान करना चाहिए और इस तरह उनका रिकॉर्ड सही हो जाएगा। जब ग्राहक ऐसा कर लेते हैं तो उन्हें भविष्य में बेहतर क्रेडिट रिकॉर्ड का ध्यान रखना चाहिए।वे सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड और कम राशि वाले उपभोक्ता सामान के लिए ऋण का इस्तेमाल कर सकते हैं जो आमतौर पर कम क्रेडिट स्कोर वाले लोगों के लिए होता है। ऐसे ग्राहकों को निजी ऋण और क्रेडिट कार्ड नहीं मिल सकता है क्योंकि उन्हें असुरक्षित कर्ज देने में बैंकों को भरोसा नहीं होता है। ऐसे में ग्राहकों को अपना बेहतर क्रेडिट रिकॉर्ड बनाने के लिए भी क्रेडिट सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए। उन्हें भुगतान में देरी नहीं करनी चाहिए और न भुगतान में चूक करनी चाहिए। क्रेडिट कार्ड से ज्यादा खरीदारी भी नहीं करनी चाहिए। कई लोग 10-12 बैंकों से पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड लेने के लिए संपर्क करते हैं।

राममूर्ति कहते हैं, 'अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट से यह जानकारी मिलती है कि आपने कई बैंकों से क्रेडिट कार्ड या कर्ज के लिए बातचीत की है तो इससे अंदाजा होगा कि आप कर्ज के लिए व्यग्र हैं और इससे आपका स्कोर कम होगा।' आपको कभी भी पूरी क्रेडिट सीमा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। राममूर्ति कहते हैं, 'आपको अपने कार्ड पर 40-50 फीसदी से ज्यादा क्रेडिट सीमा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।'

डिजिटल ऋणदाताओं से करें संपर्क

अगर बैंक आपके निवेदन को स्वीकार नहीं करता है तो आपको मदद की जरूरत होगी। ऐसे में आप डिजिटल कर्ज देने वाली कंपनियों और पी2पी कर्जदाताओं से संपर्क कर सकते हैं। वे उन लोगों को कर्ज मुहैया कराते हैं जिनका क्रेडिट स्कोर खराब होता है या जिनका क्रेडिट स्कोर ही नहीं होता। इन डिजिटल कर्जदाताओं में लोनटैप, अर्लीसैलरी, पेसेंस, मनीटैप और क्यूबेरा शामिल है।  ये मंच उन लोगों को कर्ज देते हैं जो क्रेडिट के क्षेत्र में नए हैं और जिनका क्रेडिट स्कोर 600 से कम है या फिर स्कोर ही नहीं है।

क्यूबेरा के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) आदित्य कुमार कहते हैं, 'क्रेडिट स्कोर अहम है जिससे किसी व्यक्ति की दोबारा भुगतान करने की क्षमता का अंदाजा मिलता है लेकिन यह किसी व्यक्ति की ऋण पात्रता का अंदाजा देने के लिए पर्याप्त नहीं है।' ये कर्जदाता नए डेटा स्रोत, एडवांस डेटा एनालिटिक्स और प्रोप्राइटेरी (मालिकाना) जोखिम प्रबंधन मॉडल का इस्तेमाल करते हैं जिससे आवेदक की पुनर्भुगतान क्षमता तय होती है। वे जिन वैकल्पिक डेटा स्रोत पर निर्भर होते हैं उनमें किसी व्यक्ति का सोशल नेटवर्क प्रोफाइल, एसएमएस डेटा, ईमेल आदि शामिल होता है जिससे उसकी खर्च की आदत और बचत के स्तर का अंदाजा होता है।

स्टैशफिन के संस्थापक तुषार अग्रवाल कहते हैं, 'परंपरागत कर्जदाता केवल क्रेडिट स्कोर पर निर्भर होते हैं। लेकिन हम परंपरागत और दूसरे डेटा पर भी ध्यान देते हैं जिससे कर्ज लेने वाले की दूसरी स्थितियों का भी अंदाजा मिलता है। प्रोप्राइटेरी जोखिम मॉडल का इस्तेमाल कर हम कर्ज लेने वाले व्यक्ति की क्षमता और भुगतान करने की उसकी इच्छा का अंदाजा लगा सकते हैं।'

पीअर टू पीअर (पी2पी) कर्जदाता भी इस सेगमेंट को कर्ज देने के लिए आगे आ रहे हैं जिसे बैंक अभी तरजीह नहीं देते हैं। फिलहाल करीब 32 पी2पी कर्जदाता हैं जिनमें फेयरसेंट, लेंडबॉक्स, आईलेंड और लेनडेनक्लब शामिल है। ये प्लेटफॉर्म उन लोगों को जोडऩे को इच्छुक हैं जो पैसे चाहते हैं। वे जोखिम मूल्यांकन के लिए वैकल्पिक क्रेडिट स्कोरिंग तरीके का इस्तेमाल करते हैं।  हालांकि वित्तीय तकनीकी कंपनियां कर्ज देने में तेजी दिखाती हैं और वे ज्यादा ब्याज दर पर ऋण देती हैं। ब्याज दर 11.99 और 36 फीसदी के दायरे में होती है। जिन कर्जदारों की आमदनी 30,000 रुपये तक होती है और जिनका क्रेडिट स्कोर 700 से कम होता है, उनसे ज्यादा ब्याज दर वसूली जाती है। ब्याज दर कर्जदार की कंपनी, उम्र और कई दूसरे कारकों पर निर्भर होती है। 
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