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भारत इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ेगी चमक

टी ई नरसिम्हन |  Apr 22, 2018 09:55 PM IST

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) का शेयर आय में गिरावट, कुछ परियोजनाओं की ऑर्डर बुकिंग में विलंब आदि की वजह से पिछले तीन महीनों में 25 फीसदी कमजोर हुआ है। फिर भी, विश्लेषकों ने संभावित ऑर्डरों के साथ साथ आय वृद्घि में तेजी की उम्मीद को देखते हुए इस शेयर की रेटिंग में इजाफा किया है। उदाहरण के लिए, रक्षा उपकरण सेगमेंट के लिए भारत का बजट वित्त वर्ष 2019 के लिए 9 प्रतिशत तक बढ़ा है। इसका लाभ प्लेटफॉर्म डेवलपरों और सिस्टम इंटिग्रेटर, खासकर बीईएल को मिलेगा। परियोजना की लगभग 50 प्रतिशत लागत इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर से जुड़ी हुई है और इसमें बीईएल की भागीदारी 45-50 प्रतिशत है। 

 
वित्त वर्ष 2019 में मजबूत ऑर्डर प्रवाह
 
बीईएल ने 2017-18 में 100 अरब रुपये के ऑर्डर प्राप्त किए 160 अरब रुपये के अनुमान से कम है और इसके साथ ही फरवरी के अंत तक इसकी कुल ऑर्डर बुक (क्रियान्वयन के लिए लंबित ऑर्डर) बढ़कर 403.50 अरब रुपये पर पहुंच गई। लेकिन समय पर क्रियान्वयन ने बीईएल को 2017-18 में 100 अरब रुपये का राजस्व दर्ज करने में सक्षम बनाया जो 2016-17 में 88.25 अरब रुपये था। कंपनी के लिए कुल राजस्व में लगभग 85 प्रतिशत रक्षा सेगमेंट से और 15 प्रतिशत सैन्य एप्लीकेशनों से आता है। 
 
हालांकि आकाश मिसाइल ऑर्डर के लिए कीमत को लेकर बातचीत पूरी हो गई है, इसलिए बीईएल को जल्द ही निर्णायक ऑर्डर मिल जाना चाहिए। इसके अलावा लंबी रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (60-70 अरब रुपये), ईडब्ल्यू संयुक्ता (10 अरब रुपये), कमांडर थर्मल इमेजर्स, क्विक रिएक्शन सरफेस-टु-एयर मिसाइल (क्यूआर एसएएम) और आकाश (सेना, दो रेजीमेंट्ïस) के लिए ऑर्डर मौजूदा समय में पाइपलाइन में हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि बीईएल को 2018-19 में 180-190 अरब रुपये के नए ऑर्डर मिलने का अनुमान है। कंपनी युद्घ सामग्री का निर्माण करने के उद्यम में भी प्रवेश कर रही है। वह पहले से ही फ्यूज का निर्माण कर रही है जिसे देखते हुए यह बेहद फायदेमंद विस्तार है। कंपनी आंध्र प्रदेश में 25 अरब रुपये की लागत से दो इकाइयां भी लगा रही है। बीईएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एम वी गौतमा का मानना है कि अगले तीन वर्षों में कंपनी का राजस्व 12-15 फीसदी की सालाना वृद्घि के साथ 150 अरब रुपये पर पहुंच जाएगा। 
 
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
 
प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में, जहां केंद्र की मेक इन इंडिया पहल की लोकप्रियता रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच तेज होनी बाकी है, वहीं विश्लेषकों का कहना है कि बीईएल का परिदृश्य अच्छा दिख रहा है।  एडलवाइस सिक्योरिटीज में विश्लेषक अमित महावर ने कहा, 'मौजूदा समय में, कई बड़े रक्षा अनुबंध रक्षा क्षेत्र के पीएसयू (बीईएल, एचएएल आदि) को नामांकन आधार पर दिए जाते हैं और रणनीतिक भागीदारी मॉडल, मेक इन इंडिया कार्यक्रम समेत अन्य के जरिये निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र को खोले जाने से मध्यावधि में इसमें बदलाव आने की संभावना नहीं है।'
 
जहां पीएसयू के लिए हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, फिर भी बीईएल ने अपने शोध एवं विकास (आरऐंडडी) को मजबूत बनाकर अपनी क्षमताओं में विस्तार किया है। कंपनी ने नए उत्पादों के विकास के लिए आरऐंडडी पर बिक्री का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया है।  इन नए उत्पादों का उसके कारोबार में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान है। आरऐंडी खर्च कुल बिक्री का बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाने की संभावना के साथ नए उत्पाद निर्माण में तेजी आने की संभावना है। कंपनी का लगभग 87 प्रतिशत कारोबार फिलहाल स्वदेशी तौर पर विकसित उत्पादों/प्रणालियों से आता है।  गौतमा का कहना है कि यदि केंद्र सरकार की नीति मेक इन इंडिया कार्यक्रम की ज्यादा सहायक साबित होती है तो वृद्घि की रफ्तार तेज होगी। वह सीमा शुल्क को हटाए जाने के पक्ष में हैं।
 
मार्जिन में कुछ उतार-चढ़ाव
 
बीईएल ने वित्त वर्ष 2017 के लिए 20.5 फीसदी का मजबूत एबिटा दर्ज किया। कंपनी को मुख्य रूप से कच्चे माल की खपत में गिरावट, खासकर जिंस कीमतों में गिरावट और स्वदेशीकरण से जुड़ी पहलों की वजह से मदद मिली है। एडलवाइस का मानना है कि कंपनी के लिए वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ऊंचे सैलरी बिल की वजह से जहां वित्त वर्ष 2018 का समापन 19.7-19.8 फीसदी के कमजोर मार्जिन के साथ हो सकता है, वहीं उसके बाद से इसमें 20 प्रतिशत से अधिक की तेजी आनी चाहिए। 
 
हालांकि बीईएल अपनी छवि को प्योर प्रोडक्ट-सेलिंग कंपनी से ऐसी कंपनी में तब्दील कर रही है जो सिस्टम इंटिग्रेटर के तौर पर अनुबंध हासिल करती है। हालांकि इससे उसका राजस्व और ऑर्डर प्रवाह बढ़ा है, लेकिन मार्जिन पर कुछ दबाव दिख सकता है क्योंकि खरीद उपकरण का मुनाफा उसके स्वयं के उत्पादों की तुलना में कम है।  फिर भी विश्लेषकों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (बीईएल दो आपूर्तिकर्ताओं में से एक है) और एलआर एसएएम जैसे कम मार्जिन वाले ऑर्डरों के क्रियान्वयन के बावजूद आकाश मिसाइल प्रणालियों जैसे ज्यादा मार्जिन वाले ऑर्डरों से मजबूती दर्ज करेगी।
 
निर्यात में संभावना
 
पिछले साल बीईएल ने 3 करोड़ डॉलर के उत्पादों का निर्यात किया। गौतमा का कहना है कि वृद्घि की रफ्तार तेज करने के लिए बीईएल हिंद महासागर क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है और भारत से बाहर (पहला कार्यालय वियतनाम में एक-दो महीने में शुरू हो जाएगा) स्थापित करेगी। कंपनी अपने राजस्व का 5-10 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से प्राप्त करना चाहती है जो अभी 3 फीसदी के आसपास है।  बीईएल ने घरेलू और निर्यात बाजारों की जरूरतें पूरी करने के लिए हाल में एलऐंडटी और महिंद्रा फाइनैंस के साथ भागीदारी की है। फरवरी 2018 के अंत में कंपनी की निर्यात ऑर्डर बुक 9.3 करोड़ डॉलर पर थी। 
 
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