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अचानक खर्च पूरे करने के तरीके

प्रियदर्शनी माजी |  Apr 22, 2018 09:59 PM IST

ज्यादातर लोग अपने खर्च की ठीक से योजना बनाना चाहते हैं, लेकिन अमूमन ऐसा नहीं हो पाता है। अचानक यात्रा, घरेलू खर्च, कार की मरम्मत और कभी -कभी बहुत सस्ते दाम पर मिल रही प्रॉपर्टी खरीदने की इच्छा भी आपका घरेलू बजट बिगाड़ सकती है। विनय चावला (42 साल) के साथ भी उस समय कुछ ऐसा ही हुआ, जब उनकी पसंदीदा प्रॉपर्टी बिकने लगी। वह विभिन्न योजनाओं में नियमित निवेश करते थे। लेकिन वह असमंजस में थे कि इस खरीद के लिए किसे बेचा जाए। प्रॉपर्टी खरीद सस्ती नहीं होती है। लेकिन कुछ छोटी प्रॉपर्टी भी होती हैं। अनिता यादव (47 साल) ने एक महंगे घरेलू सामान पर अनियोजित खर्च करने का  फैसला किया।

 
जाहिर है, चावला और यादव का अपना नियमित बजट गड़बड़ा गया। हालांकि दोनों की वित्तीय जरूरतें बिल्कुल अलग हैं। इन दोनों के लिए पैसे की व्यवस्था करने के बहुत से तरीके हैं। वे इन्हें खरीदने के लिए मासिक किस्त का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन अगर वे ब्याज का बोझ बचाना चाहते हैं तो उन्हें बेचने या ऋण लेने के लिए सही योजना की जरूरत होगी।  वित्तीय विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसी स्थितियों से निपटने का आदर्श तरीका लघु अवधि के निवेश का इस्तेमाल करना है। अगर संभव हो तो लक्ष्य आधारित निवेश के साथ छेड़छाड़ न की जानी चाहिए। फिनकार्ट डॉट कॉम के संस्थापक तनवीर आलम कहते हैं, 'ये खर्च पूरे करने के लिए लक्षित निवेश या लंबी अवधि के निवेश को निकालना पहला विकल्प नहीं होना चाहिए।'
 
बैंक खाता या आपात कोष मददगार 
 
नि:संदेह व्यक्ति को सबसे पहले बैंकों में पड़ी अपनी नकदी के इस्तेमाल के बारे में विचार करना चाहिए। बैंकों में जमा नकदी पर 4 से 6 फीसदी का मामूली ब्याज मिलता है। इसलिए अगर इस पैसे से आपके घरेलू बजट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता है तो आकस्मिक खर्च पूरे करने के लिए इस बैंक नकदी का इस्तेमाल करें। इसके अलावा आपात कोष होता है। आम तौर पर यह कोष नौकरी जाने की स्थिति में आमदनी घटने की स्थिति से निपटने के लिए होता है। लेकिन यादव के घरेलू सामान खरीदने जैसी कुछ परिस्थितियों में आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। लैडर7 डॉट कॉम के संस्थापक सुरेश सद्गोपन कहते हैं, 'बिना योजना वाली जरूरतों के लिए आपात कोष का इस्तेमाल करना आपका पहला विकल्प होना चाहिए।' आम तौर पर एक आकस्मिक कोष व्यक्ति के मासिक खर्च के तीन से छह महीने के बराबर होता है। कुछ मामलों में, जिनमें नौकरी बहुत सुरक्षित नहीं है या जहां नकदी की आवक कम-ज्यादा होती है तो आपात कोष के लिए बड़ी राशि रखी जाती है। यह राशि 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर होती है। इस निवेश का इस्तेमाल छोटे अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने में किया जा सकता है। आम तौर ऐसी रकम को बैंक या अल्पावधि म्युचुअल फंडों में रखा जाता है ताकि तुरंत नकदी हासिल की जा सके। 
 
आम तौर पर ये निवेश आसानी से निकाली जाने वाली योजनाओं या लघु अवधि के म्युचुअल फंडों में होता है, इसलिए आकस्मिक कोष के जरिये ऐसे खर्च पूरे करने से ब्याज आमदनी में ज्यादा नुकसान नहीं होगा। हालांकि किसी योजना से बाहर निकलने से पहले उसके एक्जिट लोड, कर के असर, पिछले प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं के बारे में विचार करना भी महत्त्वपूर्ण है।
 
बड़े खर्च के लिए डालें पोर्टफोलियो पर नजर 
 
अगर लघु अवधि के फंडों या बैंक में रखे पैसे से जरूरत पूरी नहीं होती है तो अपने पोर्टफोलियो के अन्य निवेशों के बारे में विचार करें। म्युचुअल फंड निवेश या लाभ वाले शेयरों पर विचार करें। अगर आपका पोर्टफोलियो काफी ठीक-ठाक है तो कुछ मुनाफावसूली से आपको बड़े खर्च पूरे करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए अगर आपको 5 लाख रुपये खर्च करने की जरूरत है तो म्युचुअल फंडों या शेयरों का लाभ उपयोगी हो सकता है। लेकिन यह बात याद रखें कि जिस म्युचुअल फंड में निवेश को एक साल हो गया है, उसमें निकासी पर कर की देनदारी कम होगी। लेकिन अगर निवेश को एक साल से कम समय हुआ है तो ज्यादा कर देना होगा।
 
लेकिन अगर आप चावला की तरह प्रॉपर्टी खरीदने के बारे में विचार कर रहे हैं तो चीजें बिल्कुल अलग हो सकती हैं। इस मामले में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) या अन्य निजी कंपनी की जीवन बीमा पॉलिसी उपयोगी हो सकती है। एक अन्य विकल्प प्रॉपर्टी पर बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से ऋण लेना है। अगर आप बीमा पॉलिसी पर ऋण लेने का विकल्प अपनाते हैं तो बीमा कंपनी सरेंडर वैल्यू का कुछ प्रतिशत छोड़ देंगी।  कई बार सरेंडर वैल्यू परंपरागत प्लानों में 80 फीसदी तक हो सकती है। वसूला जाने वाला ब्याज 10 फीसदी या उससे ऊपर होता है। भारतीय जीवन बीमा निगम की ब्याज दर 9 फीसदी है। अगर आप इस विकल्प को चुनते हैं तो याद रखें कि आपको एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने होंगे। इसमें यह लिखा जाता है कि पॉलिसी के लाभ ऋणदाता को दिए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में पॉलिसी ऋण के लिए गिरवी होती है।
 
हालांकि पॉलिसी को भुनाएं नहीं। इंटरनैशनल मनी मैटर्स में संस्थापक लोवाई नवलखी के मुताबिक बीमा लंबी अवधि की योजना है, जिसका आम तौर पर इस्तेमाल अहम लक्ष्यों की वित्तीय जरूरतें पूरी करने में किया जाता है। इस तरह इस पैसे को बिना योजना वाले खर्च के लिए निकालना आदर्श विकल्प नहीं होगा। इसके अलावा संपत्ति पर ऋण लिया जा सकता है। अगर आपके पास आवासीय या व्यावसायिक संपत्ति है तो आप उस पर ऋण ले सकते हैं। एचडीएफसी जैसी हाउसिंग फाइनैंस कंपनी संपत्ति की कीमत का 60 फीसदी हिस्सा ऋण के रूप में मुहैया करा देगी। इसकी ब्याज दर करीब 9.75 से 10.5 फीसदी होगी। 
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