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तंदुरुस्त कारोबार के लिए सिप्ला को धार

उज्ज्वल जौहरी |  Apr 29, 2018 10:07 PM IST

सिप्ला ने पिछले एक महीने में एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स को प्रदर्शन के मामले में पीछे छोड़ दिया है। कंपनी पिछले एक साल में अपनी प्रतिस्पद्र्धी दवा कंपनियों को भी प्रतिफल के लिहाज से पछाडऩे में सफल रही है। मार्च के निचले स्तर के मुकाबले इसमें करीब 11.5 प्रतिशत तेजी आ चुकी है, हालांकि इसके पीथमपुरा संयंत्र में अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) चक्कर लगा चुका है। बाजार मोटे तौर पर मजबूत संभावनाओं की वजह से सिप्ला में भरोसा दिखा रहा है। वित्त वर्ष 2017-18 में सिप्ला के लिए आय वृद्धि दर का अनुमान 30 प्रतिशत से अधिक रखने के बाद विश्लेषकों ने 2018-19 और 2019-20 प्रत्येक में आय में 20 प्रतिशत से अधिक तेजी आने का अनुमान व्यक्त किया है। 

 
एफडीए के निरीक्षण से नहीं परेशानी
 
कंपनी ने कहा कि 2 और 3 अप्रैल के बीच इसके पीथमपुरा संयंत्र का निरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया थी। सिप्ला और विश्लेषकों का कहना है कि एफडीए के इस निरीक्षण से कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। एक अच्छी बात यह है कि अमेरिका में सिप्ला की कुल बिक्री में इस संयंत्र की खास हिस्सेदारी नहीं होती है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे निरीक्षण की ज्यादा अहमियत नहीं है और इनका समाधान आसानी से हो सकता है।
 
प्रमुख बाजारों में विस्तार
 
भारत एवं अन्य दूसरे तेजी से उभरते बाजारों सहित सिप्ला ज्यादातर प्रमुख बाजारों में बढिय़ा कारोबार कर रही है, यहां तक नियमों-शर्तों के लिहाज से सख्त देश में भी कंपनी मजबूती से आगे बढ़ रही है। इससे कंपनी की कमाई की रफ्तार अच्छी रहनी चाहिए। घरेलू बाजार, जिससे कंपनी अपने कुल राजस्व का 40 प्रतिशत हिस्सा अर्जित करती है, की वृद्धि दर दिसंबर तिमाही में करीब 15 प्रतिशत रही थी। इसके मुकाबले डॉ. रेड्डïीज लैब, ल्यूपिन या सन फार्मा (3 से 8 प्रतिशत) की वृद्धि दर कमजोर रही है। 
 
कंपनी के लिए मार्च 2017-18 तिमाही और चालू वित्त वर्ष मजबूत रहने की उम्मीद की जा रही है। सिप्ला की श्वास एवं कैंसर दवा खंडों में उपस्थिति को सीमित प्रतिस्पद्र्धा का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए यह अधिक मुनाफा दे रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि चौथी तिमाही में कंपनी की घरेलू बिक्री में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है। अफ्रीका सिप्ला के कारोबार के लिए अगला महत्त्वपूर्ण बाजार है। इसकी कंपनी की कुल बिक्री में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है। अफ्रीका में फ्रंट -एंड -प्रजेंस होने से दिसंबर 2017 तिमाही में कंपनी की बिक्री सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर रही थी। सिप्ला अमेरिकी बाजार में बाद में आई है, लेकिन यह अब दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य बाजार में तेजी से पांव पसार रही है। कंपनी की बिक्री में अमेरिकी बाजार की छोटी हिस्सेदारी से कंपनी को दवा कीमतों  में आई कमी से जूझने में मदद मिली है। जिन कंपनियों की अमेरिकी बाजार में अधिक उपस्थिति है, उन्हें दवा कीमतों में कमी से अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सिप्ला के उत्पादों को मंजूरी मिलने की दर अच्छी है, जिसके इसके कारोबार को मजबूती मिल रही है। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का कहना है कि कम आधार प्रभाव और नई दवाओं की मंजूरी के लिए आवेदन में खासी तेजी से सिप्ला अमेरिकी बाजार में शानदार वृद्धि दर्ज करती दिख रही है। विश्लेषकों के अनुसार सिप्ला ने 2016-17 में 32 एब्रिविएटेड न्यू ड्रग ऐप्लीकेशंस (एएनडीए) सौंपे और 2017-18 में भी इसने 20 आवेदन दिए। कंपनी की दो जेनरिक दवाएं प्लमीकोर्ट और डेकोजेन मार्च 2017-18 में समाप्त तिमाही में कारोबार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन दोनों दवाओं की शुरुआत दिसंबर 2017 तिमाही में हुई थी और इसका लाभ चौथी तिमाही में दिखेगा। ब्रिटेन में भी कंपनी के प्रदर्शन पर नजर होगी। सिस्टमैटिक्स शेयर्स में विश्लेषक रणवीर सिंह का कहना है कि सिप्ला आकर्षक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि पीथमपुरा संयंत्र का निरीक्षण कोई गंभीर मसला नहीं है और इससे सिप्ला के कारोबार पर कोई असर नहीं होगा। 
 
ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिस्पद्र्धी कंपनियों के मुकाबले सिप्ला के लिए कारोबार वृद्धि और कमाई की संभावनाएं अच्छी हैं। अमेरिका और अन्य बाजारों में अच्छी बिक्री और लागत कम करने के उपायों के मद्देनजर पिछले महीने मॉर्गन स्टैनली ने सिप्ला को लेकर उत्साह बरकरार रखा था। 
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