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शेयर दें उधार और कमाएं बिना जोखिम ब्याज

तिनेश भसीन |  Apr 29, 2018 10:09 PM IST

लंबी अवधि के निवेशकों के पास अपने शेयरों को उधार देने और ब्याज के रूप में बिना जोखिम वाली अतिरिक्त आय कमाने का विकल्प वर्षों से मौजूद है। लेकिन एक तो जागरूकता का अभाव और दूसरा उधार लेने वाले निवेशकों की मांग न होने से शेयरों को उधार देने और लेने (एसएलबी) की व्यवस्था परवान नहीं चढ़ पाई। लेकिन अब इसमें जल्द ही बदलाव के आसार हैं। पिछले दिनों भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि चरणबद्घ तरीके से डेरिवेटिव शेयरों का भौतिक निपटान अनिवार्य किया जाएगा। फिलहाल ये निपटान नकदी में किए जाते हैं यानी जिस कीमत पर आपने खरीदा है और बेचा है, उन दोनों कीमत का अंतर या तो नकद या फिर डेबिट के जरिए चुकाया जाता है।

 
भौतिक निपटान एनएसई ने विकल्प और वायदा के 46 शेयरों के साथ भौतिक निपटान जरूरी कर दिया है। जुलाई सीरीज से इन शेयरों के डेरिवेटिव सौदों कारोबारियों को इनकी डिलिवरी लेनी होगी। (फिजिकल सेटलमेंट) में कारोबारियों को ली गई डेरिवेटिव पोजीशन पर सेटलमेंट वाले दिन शेयरों की डिलिवरी लेनी होगी। कारोबारी के लिए ऐसा करने का आसान तरीका है कि वह शेयर खरीदने के बजाय मौजूदा निवेशक से किसी खास कीमत पर शेयर उधार ले ले। सैमको सिक्योरिटीज में शोध प्रमुख उमेश मेहता कहते हैं, 'जैसे ही बाजार नियामक डेरिवेटिव के भौतिक निपटान पर अमल शुरू करेगा, वैसे ही ज्यादा से ज्यादा कारोबारियों को अपनी देनदारी पूरी करने के लिए शेयर उधार लेने की जरूरत होगी। इसका मतलब है कि ज्यादा से ज्यादा ब्रोकर निवेशकों को यह सेवा मुहैया कराएंगे ताकि निवेशक कुछ दिन के लिए अपने शेयर उधार देकर ब्याज कमा सकें। शेयर उधार देने वालों के लिए यह बिना जोखिम वाली रकम है, क्योंकि एसएलबी से संबंधित नियम सख्त हैं और एक्सचेंज से नियंत्रित हैं।' जिस निवेशक के डीमैट खाते में लंबे समय से शेयर रखे हुए हैं यानी वह उनकी खरीद-फरोख्त नहीं करता बल्कि उनको रखे रखता है तो वह अपने ब्रोकर से संपर्क कर सकता है। जरूरी फॉर्म भरकर और दस्तावेज देकर वह ब्रोकर के जरिए शेयर उधार दे सकता है। जब इस फॉर्म पर हस्ताक्षर हो जाते हैं और संबंधित प्रमाण दे दिए जाते हैं तो निवेशक दो सप्ताह के अंदर शेयर उधार देना शुरू कर सकता है।  जीरोधा के सीओओ वेणु माधव कहते हैं, 'ऋणदाता के तौर पर आप ब्रोकर को ऑर्डर दे सकते हैं। इस ऑर्डर में आप शेयर का नाम, उधार की तादाद, अवधि और प्रति शेयर उधारी शुल्क का जिक्र कर सकते हैं। इसी तरह शेयर उधार लेने वाला भी ऑर्डर दे सकता है और उसमें शेयर का नाम, मात्रा अवधि और उधारी शुल्क (जो वह चुकाने को तैयार हो) के बारे में बता सकता है। ऑर्डरों का मिलान एक्सचेंज पर किया जाता है और लेन देन पूरा किया जाता है। शेयर उधार देने वाले से जितने शेयर वह उधार देता है, उसकी कुल रकम का 25 प्रतिशत तुरंत लिया जाता है, जिससे कि हां कहने के बाद वह डिफॉल्ट न करे।' उधार लेने वाले की डिफॉल्ट की समस्या से बचने के लिए उससे शेयर कीमत का 125 प्रतिशत हिस्सा मार्जिन के तौर पर रखवाया जाता है। उधारी शुल्क अलग से लिया जाता है। रोजमर्रा के आधार पर मार्क-टू-मार्केट नुकसान की निगरानी की जाती है जिससे कि उधार लेने वाला डिफॉल्ट न करे। अनुबंध खत्म होने के बाद शेयर उधार देने वाले को अपने शेयर वापस मिल जाते हैं और जिसने उधार लिए हैं, उसे मार्जिन लौटा दिया जाता है। 
 
यदि उधार लेने वाला जल्द अपना पैसा वापस चाहता है या शेयर देने वाला जल्दी शेयर वापस चाहता है तो इसकी भी व्यवस्था की जाती है। इस सूरत में शेयर उधार लेने वाला चाही गई फीस के साथ जल्द पुनर्भुगतान का अनुरोध करता है। वहीं जल्द शेयर वापस लेने के मामले में शेयरदाता शुल्क के साथ शेयर वापस लेने का अनुरोध करता है। बाजार कारोबारियों का मानना है कि निवेशकों के लिए एसएलबी में अच्छी-खासी संभावनाएं हैं। माधव कहते हैं, 'निवेशक को अपने बेकार पड़े शेयरों को उधार देने पर बगैर किसी जोखिम के थोड़ा-बहुत ब्याज कमाने का मौका मिल जाता है।' इस समय निवेशक 6 से 8 प्रतिशत के औसत सालाना ब्याज की उम्मीद कर सकते हैं। जैसे जैसे बाजार में यह व्यवस्था विकसित होगी, वैसे ही इस ब्याज में कमी आएगी। अक्सर इस तरह के शेयर 30 दिन तक के लिए उधार दिए जाते हैं। एसएलबी व्यवस्था में लाभांश, बोनस, शेयर विभाजन और राइट इश्यू जैसी कंपनी गतिविधियों का खयाल रखा जाता है। शेयर उधार देने वाले को अपने शेयरों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं होती है। मान लीजिए कि अगर कोई कंपनी लाभांश दे रही है तो शेयर उधार लेने वाला इसे प्राप्त करेगा और फिर यह लाभ आपको मिल जाएगा।
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