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आवास ऋण दर हो ज्यादा तो बैंकों को चुनने में ही फायदा

तिनेश भसीन |  Apr 29, 2018 10:09 PM IST

ऋणदाता जब अपनी बेंचमार्क दरें बढ़ाते हैं, नए ग्राहकों की ऋण पात्रता में कमी आ जाती है। लेकिन सीमांत लागत आधारित उधारी दरों (एमसीएलआर) पर जिन लोगों ने कर्ज लिया है, उन पर ज्यादा असर नहीं होगा। लेकिन अगर आपका ऋण एमसीएलआर से जुड़ा हुआ नहीं है या आपने किसी हाउसिंग फाइनैंस कंपनी (एचएफसी) से ऋण ले रखा है तो आपको ब्याज दर ज्यादा होने (मान लीजिए 9 प्रतिशत से अधिक) पर अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत होगी।  एचडीएफसी ने दिसंबर 2013 के बाद पहली बार हाल में अपनी उधारी दरें 20 आधार अंक तक बढ़ाई हैं। मार्च में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने भी अपनी एमसीएलआर में 15 से 20 आधार अंक तक का इजाफा किया है।

 
जैसे ही आवास ऋण ब्याज दरों में तेजी आनी शुरू होती है, इसका असर कर्जदारों की पात्रता पर पड़ता है। यदि व्यक्ति 8.4 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 साल की अवधि के लिए 50 लाख रुपये के ऋण हेतु पात्र है तो दर में 20 आधार अंक की वृद्घि होने पर उसकी पात्रता में 70,000 रुपये या कुल ऋण के 1.4 प्रतिशत तक घट जाएगी। हालांकि यह प्रभाव भले ही बहुत ज्यादा नहीं लगे मगर ज्यादातर विश्लेषक ब्याज दरों में और वृद्घि का अनुमान जता रहे हैं। पैसाबाजार डॉटकॉम के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'ऋणदाता भविष्य में आवास ऋण की दर थोड़ी सी बढ़ा सकते हैं।' यदि आप ऋण को लेकर कोई मकान खरीदने की योजना बना रहे हैं तो अप्रैल में ही सौदा करना बेहतर साबित हो सकता है।
 
विश्लेषकों का कहना है कि नए कर्जदारों के लिए बेहतर यह है कि वे आवास ऋण के लिए एचएफसी और एनबीएफसी के बजाय बैंकों का चयन करें। उनका मानना है कि मौजूदा ग्राहकों के लिए एमसीएलआर प्रणाली अन्य मानकों की तुलना में ज्यादा पारदर्शी है। एचएफसी और एनबीएफसी से नए ग्राहकों को बढिय़ा सौदा मिलता है जबकि पुराने ग्राहकों को अपने ऋण पर ज्यादा ब्याज दर चुकानी पड़ती है। ऑनलाइन उधारी प्लेटफॉर्म रुबिक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी मानव जीत कहते हैं, 'अगर आपकी ऋण जरूरत कुल संपत्ति कीमत की की 75 प्रतिशत या इससे कम है और आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है तो फिर आप बैंक से आवास ऋण लें।'
 
अगर आप पहले से ही ऐसे किसी एचएफसी या एनबीएफसी से जुड़े हुए हैं जो 9 प्रतिशत या इससे अधिक ब्याज दर पर ऋण मुहैया करा रही हैं, तो अपना बैलेंस स्थानांतरित कराने का यह सबसे सही समय है। कुकरेजा का कहना है, 'यदि आपके ऋण पर ब्याज दर मौजूदा दर की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक हो तो मौजूदा ऋणदाता के साथ जुड़े रहने के बजाय अन्य विकल्प तलाशना बेहतर होगा।' यदि आप ताजा दरों को लागू करने को कहें तो एचएफसी या एनबीएफसी आपको तवज्जो नहीं भी दे सकती हैं। लेकिन यदि आप अपना बकाया ऋण स्थानांतरित कराने के लिए आवेदन करते हैं तो ये वित्तीय कंपनियां आपसे बातचीत के लिए राजी हो सकती हैं और दरें घटा सकती हैं। चूंकि फ्लोटिंग दर के ऋणों को समय से पहले बंद कराने (चुकाने) पर कोई प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं है, इसलिए ऋणदाता अपने ग्राहकों को खोना नहीं चाहते। हालांकि कोई भी कदम उठाने से पहले ऋण की बची हुई अवधि की जांच कर लें। पर विचार कर लें।
 
शेष ऋण भुगतान अवधि के संदर्भ में देखें तो कभी कभी मौजूदा ऋणदाता के साथ जुड़े रहना भी समझदारी भरा निर्णय हो सकता है, क्योंकि ब्याज वाले हिस्से का भुगतान लगभग हो चुका होता है। बैंक के ग्राहकों का ऋण यदि एमसीएलआर से जुड़ा हुआ नहीं है तो वे तब तक ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे जब तक कि उनके ऋण की ब्याज दर में संशोधन न किया जाए। अगर आपने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का ऋण ले रखा है और 8.4 फीसदी का ब्याज चुका रहे हैं तो 20 आधार अंक की वृद्घि से आपकी ईएमआई 633 रुपये तक बढ़ जाएगी।  जीत कहते हैं, 'अगर आप आधार दर व्यवस्था से जुड़े हुए हैं तो अपने ऋण को एमसीएलआर वाले ऋण में तब्दील करें। कुछ बैंक इसे बदलने के लिए थोड़ा सा शुल्क लेते हैं, लेकिन लंबी अवधि में आपको इसका लाभ मिलेगा।' 
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