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वसीयत में आजीवन यूलिप का इस्तेमाल

तिनेश भसीन |  May 06, 2018 08:17 PM IST

ऐसा लगता है कि समृद्ध और अति धनाढ्य लोगों (एचएनआई) ने मामूली या बिना किसी कर के अपनी संपत्ति पीछे छोडऩे के लिए धन के निवेश का नया तरीका ढूंढ लिया है। ये यूनिट लिंक्ड होल लाइफ पॉलिसी हैं। इन पॉलिसियों के तहत कोई भी धारक अपने जीवनकाल में बचत कर सकता है और मृत्यु होने पर धनराशि अपने उत्तराधिकारियों के लिए छोड़ सकता है। आजीवन योजनाएं कई वर्षों से वजूद में हैं। पहले वे परंपरागत योजनाओं के रूप में उपलब्ध थीं, जिनमें कम प्रतिफल मिलता था। अब वे सभी खूबियां यूलिप में उपलब्ध होने से बीमित व्यक्ति बाजार आधारित प्रतिफल भी अर्जित कर सकता है।  

 
बीमा कंपनियों का कहना है कि आजीवन यूलिप 'छोटे न्यास' की तरह हैं, जो पॉलिसीधारक को अपनी धनराशि वसीयत में देने में मदद कर सकते हैं। एडलवाइस टोकियो लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ दीपक मित्तल कहते हैं, 'किसी न्यास में दानदाता यह तय करते हैं कि किसी लाभार्थी को कितनी और क्या संपत्ति मिलेगी और इसके लिए शर्तें तय करते हैं। न्यास  संपत्तियों को सुरक्षित बनाने में भी मदद करते हैं। एक आजीवन यूलिप में बीमित व्यक्ति प्रीमियम का फैसला कर सकता है। पॉलिसी को विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम का इस्तेमाल कर सुरक्षित बनाया जा सकता है।' एजेंटों के जरिये बेचे जाने वाले अन्य यूलिप की तरह आजीवन यूलिप योजनाओं में भी शुरुआती वर्षों में लागत ज्यादा होती है, जो धीरे-धीरे घटती जाती है। व्यक्ति को इस योजना की लागत में अहम कमी लाने के लिए लंबे समय (15 साल या उससे अधिक) तक बने रहने की जरूरत होगी। 
 
सेबी में पंजीकृत एक निवेश सलाहकार अरविंद राव कहते हैं, 'अगर हम म्युचुअल फंडों जैसी अन्य निवेश योजनाओं के मुकाबले यूलिप के नुकसान को अलग रख भी दें तो भी यूलिप ज्यादा उम्र के पॉलिसीधारकों के लिए ज्यादा महंगे होंगे। अगर कोई व्यक्ति इस योजना को 45 या 50 साल की उम्र के बाद खरीदता है तो मॉर्टेलिटी चार्ज अच्छा-खासा होगा।'
 
विशेष मामलों में कारगर 
 
अन्य यूलिप और आजीवन यूलिप में मुख्य अंतर पॉलिसी की अवधि का है। आम यूलिप की औसत अवधि 20 साल होती है, जो अधिकतम 30 साल हो सकती है। लेकिन आजीवन यूलिप की अवधि पॉलिसीधारक की उम्र पर निर्भर करती है। एडलवाइस टोकियो लाइफ का वेल्थ अल्टिमा और टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस का फॉच्र्यून मैक्सिमा यूलिप बीमित व्यक्ति को 100 साल की उम्र तक कवर करते हैं। पीएनबी मेटलाइफ होल लाइफ वेल्थ प्लान पॉलिसीधारक की उम्र 99 साल होने तक जारी रहता है। पॉलिसीधारक इन योजनाओं के जरिये ज्यादा लंबी अवधि के लिए बचा सकते हैं। 
 
आजीवन यूलिप में बीमित राशि आम यूलिप से ज्यादा भी हो सकती है। आम यूलिप में यह सालाना प्रीमियम का 10 गुना होती है। पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस के प्रमुख (उत्पाद) खालिद अहमद ने कहा, 'हालांकि कवर पूरे जीवन के लिए होता है, लेकिन ग्राहक की उम्र के आधार पर कवर की मात्रा सालाना प्रीमियम के 10 गुना से 35 गुना के बीच होती है।'  एक आजीवन यूलिप में बीमित राशि के आकलन का तरीका अलग होता है। माना कि कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र में आजीवन यूलिप लेता है। उसके कवर के आकलन के लिए 70 में से उम्र को निकालकर 2 का भाग दिया जाएगा। इस उदाहरण में यह 15 गुना (70-40/2) होगा। बीमित व्यक्ति को अपनी जरूरत के आधार पर कई विकल्प मिलते हैं। अहमद कहते हैं, 'यूलिप का अच्छा पक्ष इसमें फेरबदल की सुविधा है। आप बिना किसी लागत के इक्विटी से डेट फंड में जा सकते हैं या उम्र के हिसाब से पोर्टफोलियो की रणनीति का विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें डेट और इक्विटी में आवंटन उम्र पर आधारित होता है। आप अपनी नकदी आवक की योजना बनाने के लिए यह फैसला भी ले सकते हैं कि आप कितने लंबे समय प्रीमियम चुकाना चाहते हैं।'
 
हालांकि जब यूलिप की म्युचुअल फंडों जैसी अन्य निवेश योजनाओं से तुलना की जाती है तो इनके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। म्युचअल फंड में अगर आपका फंड ठीक नतीजे नहीं दे रहा है तो आप अपना फंड हाउस बदल सकते हैं। म्युचुअल फंडों में लागत का ढांचा भी ज्यादा पारदर्शी है। यूलिप में 5 साल की अवधि का लंबा लॉक इन होता है। इसलिए निवेश सलाहकारों का मानना है कि हरेक व्यक्ति के लिए आजीवन योजनाएं उपयुक्त नहीं हैं। राव कहते हैं, 'यूलिप उस व्यक्ति के लिए कारगर रहेंगे, जो उस पर निर्भर दिव्यांग या परिवार से इतर अन्य किसी व्यक्ति के लिए धनराशि छोडऩा चाहते हैं। अगर वह व्यक्ति अपने वसीयतनामे के जरिये ऐसा करने का प्रयास करता है तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है और इसमें लाभार्थी को अपना पैसा मिलने में लंबा वक्त लग सकता है।' अगर किसी व्यक्ति के पास प्रॉपर्टी समेत बहुत सी संपत्तियां हैं तो उसे अपनी संपत्तियां वसीयत में देने के लिए वसीयत या न्यास की जरूरत होगी। परिवार के किसी नजदीकी सदस्य को किसी संपत्ति को हस्तांतरित करने का सबसे आसान और कर के लिहाज से किफायती तरीका इसे उपहार के रूप में देना है।
 
झांसे से बचें 
 
बहुत से एजेंट आजीवन यूलिप को यह कहकर बेच रहे हैं कि ये विरासत कर बचाने का सबसे बेहतर तरीका है और यह कर जल्द ही लागू किया जा सकता है। एनए शाह एसोसिएट्स में पार्टनर अशोक शाह कहते हैं, 'इसकी न कोई औपचारिक घोषणा हुई है और न ही ऐसा कोई संकेत मिला है कि सरकार जल्द ही विरासत या एस्टेट कर लागू करने की योजना बना रही है।'
 
सेवानिवृत्ति योजना के रूप में करता है काम 
 
बीमा कंपनियों का कहना है कि बहुत से लोग विरासत में छोडऩे के बजाय अपनी सेवानिवृत्ति योजना के लिए आजीवन यूलिप में निवेश कर रहे हैं। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में जीवन बीमा प्रमुख संतोष अग्रवाल ने कहा, 'नियमित पेंशन योजनाओं में पॉलिसीधारकों को एक एन्युइटी खरीदनी पड़ती है, जिसमें धनराशि का दो-तिहाई निवेश करना अनिवार्य है। वह एकमुश्त धनराशि का एक-तिहाई हिस्सा ही निकाल सकता है।' एन्युइटी में कम प्रतिफल भी मिलता है। एन्युइटी से आय पर मामूली दर से कर भी लगता है। अग्रवाल का मानना है कि आजीवन यूलिप पेंशन के लिए निवेश का बेहतर तरीका हो सकते हैं। लेकिन उनका सुझाव है कि आजीवन यूलिप लेने से पहले उसकी लागत का पता किया जाना चाहिए। वह कहती हैं कि इसमें कवर अधिक होता है, इसलिए मोर्टेलिटी चार्ज काफी ज्यादा हो सकता है। 
 
अगर कोई व्यक्ति आजीवन यूलिप में निवेश करता है तो पांच साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि खत्म होने के बाद वह नियमित निकासी योजना या पैसे की जब-तब जरूरत के लिए आंशिक निकासी का विकल्प चुन सकता है। ऐसी निकासी पर कोई कर नहीं लगेगा। मित्तल कहते हैं, 'हमने देखा है कि 30 से 40 साल की उम्र के लोग विरासत योजना के लिए आजीवन यूलिप को चुन रहे हैं, जबकि 40 से अधिक उम्र के लोग इसे सेवानिवृत्ति योजना के लिए चुन रहे हैं।' हालांकि ज्यादातर निवेश सलाहकारों का कहना है कि सेवानिवृत्ति बचत जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए यूलिप पर म्युचुअल फंडों को तरजीह दी जानी चाहिए। सर्टिफाइड फाइनैंशियल प्लानर मल्हार मजूमदार आगाह करते हैं, 'निवेशकों को लंबी अवधि के अपने सभी फंड एक कंपनी में नहीं रखने चाहिए।'
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