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अगर है अपना कारोबार तो खरीदिए मत.. लीज पर लीजिए कार

तिनेश भसीन |  May 06, 2018 08:19 PM IST

जब कार की बात आती है तो मुश्किल से ही कोई व्यक्ति इसे खरीदने के बजाय लीज पर लेने के बारे में विचार करता है। लेकिन जो लोग हर 3-4 साल में कारें बदलते हैं और रखरखाव एवं मरम्मत की सरदर्दी नहीं लेना चाहते, उनके लिए कारें लीज पर लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। 

 
लीज पर ज्यादा सहूलियत  
 
लीजप्लान इंडिया के वाणिज्यिक निदेशक प्रशांत पुणतांबेकर कहते हैं, 'व्यक्ति की जरूरत के आधार पर लीज कंपनी  पैकेज में फेरबदल कर सकती है। इसमें उन सभी परेशानियों का ध्यान रखा जाता है, जिनसे ग्राहक बचना चाहता है।' लीज खत्म होने के बाद व्यक्ति लीज पर देने वाली कंपनी को वाहन लौटा देता है और अगर वह चाहता है तो नई कार ले सकता है। लीज पर लेने से व्यक्ति कार के मूल्यांकन और उस खरीदार को ढूंढने की परेशानी से बच जाता है, जो उस कार को अपनी मनमाफिक कीमत पर खरीदेगा। हालांकि लीज पर कार लेने की सहूलियत की कीमत चुकानी पड़ती है। अगर आप अपनी जेब से चुकाए गए पैसे को देखते हैं तो ऋण पर भी कार खरीदना ज्यादातर मामलों में सस्ता पड़ेगा। साथ ही, लीज पर लेना आम लोगों के बजाय कारोबारियों के लिए ज्यादा तर्कसंगत है क्योंकि अगर वाहन को कारोबार के लिए लीज पर लिया गया है तो कारोबारी ऊंची कर छूट हासिल कर सकते हैं। एक कारोबारी के रूप में लीज पर लेने या न लेने के फैसले से पहले आपको इस पर विचार करना चाहिए कि क्या आप सहूलियत के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं। 
 
वित्तीय स्थिति 
 
लीज के तहत आपको पहले से तय अवधि और दूरी के लिए वाहन को निश्चित मासिक लीज किराये के भुगतान के एवज में इस्तेमाल करने का अधिकार मिलता है। लीज पर वाहन देने वाली कंपनियों का कहना है कि आम तौर पर ज्यादातर ग्राहक 3 से 4 साल के लिए वाहन लीज पर लेते हैं। लीज अनुबंध ग्राहक की जरूरतों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि लीज पर देने वाली कंपनी ही रखरखाव मरम्मत और बीमे का जिम्मा उठाए तो आपको परिचालन लीज का अनुबंध करना होगा। इसमें व्यक्ति को केवल ईंधन भराने के लिए भुगतान करना होगा, जबकि कुछ मामलों में टायर घिसने पर उन्हें बदलवाना भी पड़ता है। इसका विकल्प वित्तीय लीज है। बहुत से कंपनियां जब अपने कर्मचारियों को वाहन मुहैया कराती हैं तो वे ऐसी ही लीज को तरजीह देती हैं। इसमें व्यक्ति सभी लागत वहन करता है और जब लीज की अवधि खत्म हो जाती है तो लीज पर देने वाले से कार खरीद लेता है। 
 
लीज पर कार देते समय लीजिंग कंपनी कोई सिक्योरिटी डिपॉजिट या अन्य कोई डाउनपेमेंट नहीं लेती है। लेकिन वह ग्राहक या उसके कारोबार की वित्तीय हालत जरूर देखती है। ग्राहक को अपनी साख के मूल्यांकन के लिए लीज पर कार देने वाली कंपनी को नो योर कस्टमर (केवाईसी) दस्तावेज, वित्तीय ब्योरा, कर रिटर्न आदि देने होते हैं। कुछ मामलों में अगर ग्राहक कंपनी के मापदंडों पर खरा नहीं उतरता है तो लीज पर देने वाली कंपनी बैंक गारंटी भी मांग सकती है। 
 
ऋण बनाम लीज
 
अगर आप करीब 7,30,000 की कीमत वाली कार लीज पर लेने की योजना बना रहे हैं तो मुंबई जैसे शहर में लीज किराया करीब 19,200 रुपये होगा। यह चार साल की लीज होगी, जिसमें हर साल गाड़ी के अधिकतम 60,000 किलोमीटर चलने की सीमा होगी। अगर आप पहले से तय सीमा से ज्यादा गाड़ी चलाते हैं तो आपसे अतिरिक्त पैसा वसूला जाएगा।  अगर आप वही कार 9 फीसदी ब्याज दर पर चार साल के ऋण पर लेते हैं तो आपको 15 फीसदी डाउनपेमेंट करना होगा, जो करीब 1,09,500 रुपये होगा। 85 फीसदी ऋण पर आपकी ईएमआई करीब 15,441 रुपये होगी। लीज में आपको चार साल में कुल 9,21,600 रुपये चुकाने होंगे। वहीं ऋण पर कार लेने में आपकी जेब से 8,50,668 रुपये जाएंगे। हालांकि ऋण पर कार लेने से आपको बीमा, रखरखाव और मरम्मत पर पैसा खर्च करना होगा, लेकिन चार साल की अवधि के बाद वाहन आपके पास रहेगा। 
 
कर्ज की तरह काम 
 
जिस तरह व्यक्ति ऋण पर मासिक किस्त (ईएमआई) चुकाता है, उसी तरह उसे लीज में मासिक किराया चुकाना पड़ता है। कुछ कारोबारी लीज को तरजीह देते हैं क्योंकि इसमें डाउन पेमेंट की जरूरत नहीं होती है। इससे उनकी नकदी बच जाती है। लीज किराये का आकलन निर्धारित अवधि तक इस्तेेमाल करने के बाद कार की बचने वाली कीमत के आधार पर होता है। कार की बचने वाली कीमत का अनुमान कार के मॉडल, पंजीकरण के शहर, अवधि, किलोमीटर जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर लगाया जाता है। 
 
माईन्यूकार डॉट इन में उपाध्यक्ष (परिचालन) स्निग्धा भुइया का कहना है, 'लीज कीमत तय करने के प्रमुख कारक लीज की अवधि और सालाना उपयोग हैं। अगर अवधि और एक साल में तय दूरी अधिक हुई तो लीज किराया भी ज्यादा होगा। अगर अवधि और तय दूरी कम हुई तो यह कम होगा। किसी भी व्यक्ति को लीज पर लेने से पहले अपने उपयोग का मोटा अनुमान लगाना चाहिए।' माईन्यूकार डॉट इन की वेबसाइट ने विनिर्माताओं और लीज पर कार देने वाली कंपनियों से साझेदारी की है ताकि लीज पर लेने वालों को बेहतर विकल्प मिल सके। 
 
कारोबार में ऊंची कर छूट का फायदा 
 
जब आप कारोबार के लिए कार लीज पर लेते हैं तो किराये के रूप में चुकाए गए पूरे पैसे पर कर छूट का दावा किया जा सकता है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और लीडर (पर्सनल टैक्स) कुलदीप कुमार कहते हैं, 'अगर कार ऋण लेकर खरीदी जाती है तो कारोबारी मूल्य हृास और वाहन ऋण के ब्याज पर पर ही छूट का दावा कर सकते हैं। इसके अलावा रखरखाव, मरम्मत, बीमा और ईंधन पर खर्च पैसे के लिए भी छूट का दावा किया जा सकता है।' लेकिन केवल कर की वजह से ही कार लीज पर नहीं लेनी चाहिए। कार लीज पर लेने या खरीदने के बीच अंतर का लागत एवं सहूलियत को मद्देनजर रखते हुए आकलन करना चाहिए। 
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