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'कर्नाटक में कांग्रेस जीती तो निफ्टी आएगा 10,000 पर'

पुनीत वाधवा |  May 06, 2018 09:53 PM IST

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक सप्ताह से भी कम समय रह गया है। मेबैंक किम इंग सिक्योरिटीज के मुख्य कार्याधिकारी जिगर शाह ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा है कि बाजारों में अभी तक कर्नाटक में भाजपा के नुकसान की आशंका का असर नहीं दिखा है। उनका कहना है कि इसके अलावा मार्च का वित्तीय परिणाम सत्र भी अब तक अपेक्षित रहा है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
क्या बाजार में आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार की आशंका का असर देखा जा रहा है?
 
बाजार में अभी तक कर्नाटक विधानसभा चुनाव में राजग के नुकसान की कोई आशंका महसूस नहीं की जा रही है। बाजार में अनिश्चितता पैदा होगी और यदि कांग्रेस की जीत होती है तो निफ्टी 10,000 का स्तर छू सकता है। हालांकि यदि त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो बाजार मामूली गिर सकता है। वहीं दूसरी तरफ अनुकूल परिणाम यानी भाजपा को बहुमत मिलने पर बाजार अपने स्तर पर डटा रह सकता है। 
 
एक साल के नजरिये से बाजार से आपको कितने प्रतिफल की उम्मीद है?
 
हमारा मानना है कि निफ्टी-50 कैलेंडर वर्ष 2018 के लिए 20 प्रतिशत आय वृद्घि के आधार पर 10,000-10,500 के दायरे में रहेगा। यदि उम्मीद की तुलना में कंपनियों की आय काफी अलग रहती है, जैसा कि पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला तो चुनाव सीजन का ज्यादा असर नहीं दिखेगा। राज्य चुनाव परिणाम और आम चुनाव की तैयारी को देखते हुए बाजार में अस्थिरता ज्यादा रहने का अनुमान है। यदि मजबूत राजनीतिक संकेत सामने आते हैं तो बाजार इस दायरे के किसी भी दिशा (ऊपर या नीचे) में जा सकता है।  यदि भाजपा 2019 में भारी अंतर से आम चुनाव जीती तो निफ्टी50 सूचकांक 10,500 के स्तर को तोड़ सकता है और 11,200 के अपने पिछले ऊंचे स्तर के भी पार जा सकता है। दूसरी तरफ, यदि गठबंधन सरकार बनने के स्पष्टï संकेत सामने आते हैं तो बाजार फिसलकर 10,000 से नीचे जा सकता है। हालांकि ऐसे संकेत चालू वर्ष 2018 की चौथी तिमाही तक आने के आसार नहीं हैं और इसलिए बाजार तब तक सीमित दायरे में बना रह सकता है। 
 
भारत में निवेश को लेकर  एफआईआई का क्या नजरिया है?
 
एफआईआई भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार संभावनाओं को लेकर मध्यावधि से अल्पावधि नजरिये से सकारात्मक बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और राजकोषीय घाटे के नकारात्मक प्रभाव की वजह से ताजा बिकवाली के बावजूद भारत अपनी भौगोलिक बढ़त, राजनीतिक मजबूती, न्यायिक प्रणाली और तेज वृद्घि की संभावनाओं को देखते हुए विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक बाजार बना हुआ है। मौजूदा समय में उनकी मुख्य चिंताएं सरकार की मजबूती (यानी अगला कार्यकाल) के साथ साथ बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार आदि को लेकर हैं। 
 
मार्च 2018 की तिमाही के वित्तीय परिणाम सत्र के बारे में आपका क्या कहना है? 
 
मार्च 2018 का परिणाम सत्र अब तक उम्मीद के अनुरूप रहा है। सीमेंट, ऑटो और उपभोक्ता कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। कॉरपोरेट उधारी से जुड़े बैंकों द्वारा प्रावधान वृद्घि दर्ज किए जाने की संभावना है जिससे कुल की रफ्तार धीमी बनी रह सकती है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों समेत रिटेल-केंद्रित ऋणदाता मजबूत आय दर्ज कर रहे हैं। दूरसंचार क्षेत्र में दबाव स्पष्टï दिख रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की आय मिश्रित है और इस क्षेत्र में कोई विशेष रुझान नहीं देखा गया है। सॉफ्टवेयर कंपनियों ने विश्लेषकों के अनुमान के अनुरूप नतीजे दर्ज किए हैं। वित्त वर्ष 2019 के लिए 15-20 फीसदी की कुल आय वृद्घि संभावित है जबकि वित्त वर्ष 2018 के लिए यह 6.5 से 7 फीसदी थी। 
 
क्या मौजूदा समय में भारतीय बाजार अधिक महंगे दिख रहे हैं?
 
बाजार उचित मूल्यांकन पर हैं, हालांकि ये एक वर्ष आगे के आधार पर 16 गुना के दीर्घावधि कीमत-आय अनुपात (पीईआर) के मुकाबले मामूली ऊपर हैं। आय के मोर्चे पर यदि कोई बड़ी निराशा पैदा नहीं होती है तो बाजार का पीईआर अपने स्तर पर बना रह सकता है। बॉटम-अप आधार पर, सभी क्षेत्रों/शेयरों में भारी गिरावट की वजह से स्मॉल- और मिड-कैप सेगमेंटï में अच्छे अवसर हैं। 
 
आपके पसंदीदा शेयर कौन से हैं?
 
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