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इक्विटी फंडों में दीर्घावधि निवेशकों की भागीदारी घटी

सचिन मामबटा |  May 20, 2018 09:55 PM IST

इक्विटी म्युचुअल फंडों में दीर्घावधि निवेशकों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों के अनुपात में तेजी से गिरावट आई है। लगभग 5.03 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी परिसंपत्तियां (कुल इक्विटी परिसंपत्तियों का 50.6 प्रतिशत) 12 महीने से ज्यादा पुरानी नहीं हैं। म्युचुअल फंड उद्योग की संस्था एम्फी से प्राप्त मार्च के आंकड़ों में कहा गया है कि 3.17 लाख करोड़ रुपये (कुल का 31.9 प्रतिशत) की इक्विटी परिसंपत्तियां 6 महीने पुरानी हैं। कुल प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में 24 महीने से अधिक पुरानी इक्विटी परिसंपत्तियों का योगदान मार्च 2018 के अंत में 30.4 प्रतिशत पर दर्ज किया गया। यह 47.2 प्रतिशत के पिछले 10 महीने के औसत की तुलना में काफी कम और 2013 में दर्ज 58.8 प्रतिशत से लगभग आधा है। एम्फी के आंकड़ों से पता चलता है कि दीर्घावधि परिसंपत्तियों की भागीदारी में वर्ष 2013 से ही गिरावट का रुझान देखा गया है। म्युचुअल फंड उद्योग के विश्लेषकों ने होल्डिंग अवधि में इस गिरावट के लिए ऊंचे प्रवाह और अस्थिरता के बीच निवेशकों की पूंजी निवेश के प्रति सतर्कता को करार दिया है। 

 
इक्विटी फंडों के लिए होल्डिंग अवधि गैर-इक्विटी सेगमेंट के समान है जिसमें एक साल तक बरकरार रखी जाने वाली परिसंपत्तियों का अनुपात 59.2 प्रतिशत है, जिनमें लिक्विड योजनाएं जैसे डेट फंड भी शामिल हैं जिनमें निवेशक कभी कभी कुछ दिनों के लिए निवेश करते हैं। ज्यादातर कॉरपोरेट निवेशकों का इक्विटी निवेश लंबे समय तक बरकरार नहीं रहा है। एम्फी के अनुसार पिछले एक साल में लगभग 70 प्रतिशत मौजूदा कॉरपोरेट निवेशकों ने निवेश किया। वहीं छोटे निवेशकों के लिए यह आंकड़ा 38.2 प्रतिशत है। इसका मतलब होगा कि ज्यादातर छोटे निवेशकों ने कॉरपोरेट इक्विटी आवंटन की तुलना में लंबे समय तक निवेश रखते हैं। मौजूदा समय में इक्विटी परिसंपत्तियों में कॉरपोरेट निवेशकों का 1.88 लाख करोड़ रुपये का योगदान है।
 
वैल्यू रिसर्च (फंड ट्रैकर) के मुख्य कार्याधिकारी धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि कई नए निवेशक दीर्घावधि निवेश परिदृश्य एसआईपी के जरिये जुड़ रहे हैं जिससे दीर्घावधि निवेश परिदृश्य और निवेशकों को बाजार अस्थिरता के दौरान जल्दबाजी में निकलने से रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, 'एसआईपी बुक हर महीने बढ़ रही है।' एम्फी के आंकड़ों में कहा गया है कि मार्च में लगभग 71 अरब रुपये का निवेश एसआईपी के जरिये आया। मोतीलाल ओसवाल ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी आशिष सोमैया ने कहा, 'एसआईपी का अनुपात बढ़ा है जिसकी वजह से निवेशक लंबे समय तक निवेश से जुड़े रह सकते हैं। लेकिन यह एक नया घटनाक्रम है और इसके पूरी तरह स्पष्टï होने में समय लगेगा।' उन्होंने इक्विटी परिसंपत्तियों की मौजूदा समय में अपेक्षाकृत कम होल्डिंग अवधि के लिए मौजूदा तेज प्रवाह को संभावित कारण के तौर पर करार दिया। 
 
बी-15 इलाकों (प्रमुख-15 शहरों से अलग क्षेत्र) पर ध्यान केंद्रित कर बाहरी प्रमुख शहरी केंद्रों तक फंडों की पहुंच में सुधार लाने के लिए नियामकीय सक्रियता नए निवेशकों के प्रवेश को बढ़ाने में योगदान दे सकती है। धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि कमजोर रियल एस्टेट प्रतिफल, बैंक ब्याज दरों में नरमी की वजह से विकल्पों का अभाव भी निवेशकों को प्रतिफल की तलाश में म्युचुअल फंडों की ओर लेकर आया है।  लगभग 10 साल पहले (मार्च 2009) में 80 प्रतिशत निवेश लगभग एक साल की अवधि से जुड़ा हुआ था। इक्विटी बाजारों में 2008 के वित्तीय संकट से जुड़ी गिरावट ने उस समय निवेशक धारणा को प्रभावित किया। ज्यादातर निवेशक निकलने से पहले बाजार में सुधार का इंतजार कर रहे थे। मार्च 2014 तक पांच साल की अवधि में ऐसी निवेश परिसंपत्तियों की भागीदारी लगभग 26.2 प्रतिशत पर दर्ज की गई जो एक साल या इससे कम अवधि के निवेश से जुड़ी हुई थीं। मार्च 2015 और 2018 की अवधि के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 44 प्रतिशत हो गया, क्योंकि बाजार में सुधार की वजह से नए निवेशकों ने निवेश में दिलचस्पी दिखाई। मौजूदा समय में निवेशक बाजार से बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं क्योंकि बाजार में मजबूती आई है। यूनियन ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी जी प्रदीप कुमार कहते हैं, 'कुछ मुनाफावसूली दर्ज की गई है, पर हमने बड़े आकार की निकासी दर्ज नहीं की है।' 
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