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वित्त वर्ष 2019 में नुकसान घटाने पर जोर देगी ल्यूपिन

अनीश फडणवीस और उज्ज्वल जौहरी |  May 20, 2018 09:57 PM IST

लागत में कमी और नए उत्पादों की बदौलत दवा निर्माता कंपनी ल्यूपिन वित्त वर्ष 2019 में 19 से 21 प्रतिशत का ब्याज, कर, मूल्य ह्रïास आदि पूर्व आय (एबिटा) दर्ज करना चाहती है। वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में कंपनी को 7.83 अरब रुपये का नुकसान हुआ है। उत्तरी अमेरिका में दवाओं की बिक्री में सालाना आधार पर 21.1 प्रतिशत गिरावट मोटे तौर पर चौथी तिामही में कंपनी के राजस्व में 5.2 प्रतिशत गिरावट के लिए जिम्मेदार रही। भारत, एशिया-प्रशांत (जापान सहित), यूरोप, पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में बिक्री बढऩे के बावजूद कंपनी मजबूत आंकड़े पेश नहीं कर पाई। 

 
अमेरिका में बिक्री कमजोर रहने से कंपनी को झटका लगा, लेकिन कुछ परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में ह्रïास ने कंपनी के लिए सारा खेल बिगाड़ दिया। गैविस ग्रुप के अधिग्रहण के हिस्से के रूप में कुछ अमूर्त संपत्तियों के मूल्यांकन में आई कमी के लिए 14.64 अरब रुपये का एक बारगी प्रावधान करना पड़ा। ल्यूपिन के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्प्ता ने कहा, 'बाजार में बदलती परिस्थितियों के कारण गैविस के अधिग्रहण पर हमें एक बारगी कुछ प्रावधान करने पड़े। मोटे तौर पर अमेरिका में ऑपिऑड्स (दर्द निवारक दवाएं) के लिए ऐसा करना पड़ा।' 2015 में 88 करोड़ डॉलर में दवा निर्माता कंपनी गैविस के अधिग्रहण के बाद कंपनी के पोर्टफोलियो में ऑपियॉड्स आईं। अमेरिका में इन दवाओं पर नकेल कसे जाने से इनकी बिक्री में कमी आई है।
 
ल्यूपिन के मुख्य वित्तीय अधिकारी रमेश स्वामीनाथ ने कहा,'कुछ दवाओं की बिक्री में कमी जरूर देखने को मिली है और इसे देखते हुए हमने प्रावधान भी किए हैं। हम इन दवाओं की बिक्री लगातार कर रहे हैं, लेकिन इनकी बिक्री में कमी आई है।' अगर इन दवाओं की बिक्री में आई कमी के लिए आंकड़े समायोजित करें तो शुद्ध मुनाफा 3.58 अरब रुपये रहा होगा। जैसा कि ब्लूमबर्ग ने संकेत दिया था, यह विश्लेषकों के अनुमान 3.38 अरब रुपये के अनुसार ही रहता। आने वाले समय में कंपनी को लगता है कि अमेरिका में कीमतों पर दबाव बरकरार रहेगा। ल्यूपिन इन दवाओं की बिक्री में कमी से निपटने के लिए नए उत्पाद उतारना चाहती है। चौथी तिमाही में कंपनी ने अमेरिकी बाजार में 11 नए उत्पाद उतारे हैं और 23 दवाएं पूरे साल में आई हैं। यह एक तरह से सकारात्मक है, क्योंकि अमेरिका में इन दवाओं की बिक्री मार्च तिमाही में थोड़ा सुधार हुआ है। आने वाले समय में इस रुझान पर सबकी नजर रहेगी।
 
कंपनी की मुख्य कार्याधिकारी विनीता गुप्ता ने कहा कि अमेरिका को छोड़कर सभी दूसरे देशों में बिक्री में तेजी दिखी है। उन्होंने कहा कहा कि कंपनी महिलाओं की दवा सोलोसेक सहित अमेरिका में नई दवाएं उतारना चाहती है।  हालांकि कंपनी के ब्रांड मेथार्जिन ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन आने वाले समय में जेनरिक दवाओं का दबाव झेलना पड़ सकता है। सोलोसेक दवा जून में बाजार में आने वाली है और विश्लेषकों के अनुसार मेथार्जिन की बिक्री में कमी से नुकसान की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। 
 
अमेरिका में कीमतों पर दबाव के मद्देनजर कंपनी ने भविष्य के लिए कोई अनुमान व्यक्त नहीं किया है, वहीं स्वामीनाथन को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2019 में कंपनी 19 से 21 प्रतिशत मुनाफा मार्जिन बरकरार रख सकती है। प्रबंधन ने यह भी तर्क दिया है कि वह इसके इंदौर और गोवा संयंत्रों को मिले चेतावनी पत्र का समाधान निकालने की राह पर है। प्रबंधन ने कहा कि इस महीने में आगे चलकर अमेरिकी दवा नियामक को जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। चेतावनी पत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान नए उत्पादों के उतारने के लिए महत्त्वपूर्ण होगा और अमेरिका में बिक्री बढ़ाने में मददगार साबित होगा। कंपनी अमेरिका में बिक्री में गिरावट थामने की कोशिश में जुटी है और विश्लेषकों का कहना है कि आय में वृद्धि में सहायक बातें आने वाले समय में दिखेंगी। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि ल्यूपिन का शेयर निकट अवधि में दबाव में दिख रहा है, लेकिन अमेरिका में नई दवाओं की बिक्री की अनुमति और चेतावनी पत्र के समाधान पर प्रगति होने से कंपनी को मदद मिलेगी।  
 
ल्यूपिन के प्रबंध निदेशक ने कहा, 'वित्त वर्ष की समाप्ति हमने सकारात्मक रुख के साथ की है। कॉम्प्लेक्स जेनरिक दवाओं के लिहाज से हमने महत्त्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं और अमेरिका, यूरोप और जापान में विशेष दवाओं के साथ आगे बढ़े हैं। इसके साथ ही भारत जैसे तेजी से उभरते बाजारों में मजबूत कारोबार दर्ज किया है। हमारी प्राथमिकता गोवा और इंदौर संयंत्रों को मिले चेतावनी पत्र का समाधान खोजने की है।'
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