होम » Investments
«वापस

सेल: वर्ष 2019 में कारोबार 11 प्रतिशत बढऩे की संभावना

उज्ज्वल जौहरी |  May 20, 2018 09:57 PM IST

इस कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) के शेयर में 28 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। हालांकि  बाजार के उत्साह में कमी नहीं आई है, लेकिन सरकार नियंत्रित सेल के क्षमता विस्तार कार्यक्रम में देरी होने और वैश्विक स्तर पर व्यापार को लेकर छिड़ी जंग की वजह से इस्पात क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ा है। इन वजहों से प्रतिफल के आंकड़े कमजोर रहे हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि मांग में तेजी और अन्य कारणों से इस्पात प्राप्तियों में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। इससे इस्पात पर अमेरिकी शुल्क से निपटने में मदद मिली है।

 
अगर सेल दिसंबर तिमाही की तरह ही प्रदर्शन में सुधार जारी रखती है तो बाजार का नजरिया कंपनी के हित में रह सकता है। दिसंबर तिमाही में कंपनी ने 10 तिमाहियों के बाद मुनाफा दर्ज किया था। एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च ने जून तिमाही की शुरुआत में कहा था कि आधुनिकीकरण का काम पूरा होने और विस्तार परियोजनाओं से सेल को मुनाफा सुधारने में मदद मिली थी।  दिसंबर तिमाही में प्राप्ति में क्रमागत आधार पर 60 डॉलर (4,000 रुपये प्रति टन) प्रति टन की तेजी आई और मौजूदा तिमाही में इसमें 10 से 15 डॉलर (600 से 1,000 रुपये) की बढ़त देखी गई है। यह सेल के लिए अच्छी बात रही है, क्योंकि इनका सेल के पोर्टफोलियो में बड़ी हिस्सेदारी होती है। बुनियादी परियोजनाओं में तेजी और घरों की मांग के कारण इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी। 
 
रिबार और वायर रॉड कीमतों में 28 प्रतिशत तेजी आई जबकि फ्लैट प्रोडक्ट्स की कीमतों में दिसंबर तिमाही में 15 प्रतिशत की तेजी आई। क्रिसिल रिसर्च के राहुल पृथियानी कहते हैं, 'भारत में इस्पात खंड में पहले के मुकाबले अधिक सुदृढ़़ हालात से बाहर से आए इस्पात उत्पादों की कीमतों और घरेलू कीमतों में अंतर कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही अधिक उपयोगिता और बिक्री, साथ ही बेहतर कीमतें इस्पात क्षेत्र की कंपनियों के मुनाफे  के लिए सकारात्मक होंगी।'
 
राउरकेला, बोकारो, आईआईएससीओ ऐंड दुर्गापुर में विस्तार परियोजनाएं पूरी होने से सर्वाधिक मदद मिली। इससे कच्चे इस्पात की कुल सालाना क्षमता 2.02 करोड़ टन हो गई है, जो देश में सबसे अधिक है। इससे एक बेहतर उत्पाद मिश्रण तैयार होगा, साथ ही मूल्य वद्र्धित उत्पादों और बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे पहले आधुनिकीकरण एवं विस्तार योजनाओं में देरी से लागत में खासी तेजी आ रही थी। इसके साथ ही परिचालन प्रदर्शन बढ़ते खर्च की भरपाई नहीं कर पा रहे थे। अब इन मुद्दों से निपटा जा सकेगा और दिसंबर तिमाही में इसके संकेत मिल गए। 
 
सेल द्वारा इन संयंत्रों की शुरुआत के बाद उत्पादन बढ़ाने और परिचालन में स्थिरता लाने से मुनाफा में तेजी आने की उम्मीद है। इलारा कैपिटल के विश्लेषकों का मानना है कि अधिक उत्पादन और घरेलू बाजार में मजबूत मांग से सेल को वित्त वर्ष 2017-20 के दौरान 11 प्रतिशत वृद्धि के साथ 1.8 करोड़ टन सालाना बिक्री का आंकड़ा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। दिसंबर तिमाही में कंपनी का परिचालन मुनाफा बढ़कर 3,946 रुपये हो गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2017 की मार्च तिमाही में प्रति टन 767 टन नुकसान दर्ज किया गया था। इस रुझान में तेजी आने की उम्मीद है। 
 
इलारा कैपिटल के अनुसार प्रति टन मुनाफा वित्त वर्ष 2019 तक बढ़कर 6,482 रुपये हो सकता है। एचएसबीसी का भी मानना है कि वित्त वर्ष 2018 में जारी कंपनी का शानदार प्रदर्शन मार्च तिमाही में भी जारी रहेगा। इन दोनों ब्रोकरेज कंपनियों का मानना है कि पिछले चार सालों में वित्त वर्ष 2019 में पहली बार मुनाफा में आने के बाद वित्त वर्ष 2019-20 में सेल की औसत सालाना वृद्धि दर 11 प्रतिशत और परिचालन आय में 46 प्रतिशत इजाफा हो सकता है। 
कीवर्ड SAIL, steel,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक