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बुजुर्ग करें 8 फीसदी ब्याज दर पर 10 साल के लिए निवेश

संजय कुमार सिंह |  May 20, 2018 09:59 PM IST

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) में निवेश की सीमा दोगुनी करने की मंजूरी दे दी है, जिसके बाद इसमें 7.5 लाख रुपये के बजाय 15 लाख रुपये लगाए जा सकेंगे। सरकार के इस कदम का वरिष्ठï नागरिक स्वागत कर रहे होंगे। योजना में निवेश की अंतिम तारीख भी बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 कर दी गई है। पहले यह योजना 4 मई को बंद होनी थी। ऐसे में देखना होगा कि इस योजना और सेवानिवृत्त लोगों को नियमित आय मुहैया कराने वलाी कुछ अन्य निश्चित आय योजनाओं में कौन भारी पड़ती है, किसमें कितने फायदे हैं और कितने नुकसान। वय वंदना योजना के अलावा इस श्रेणी में वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस), डाकघर मासिक आय योजना (पीओएमआईएस) और सावधि जमा (एफडी) भी शामिल हैं। 

 
जहां तक प्रतिफल की दर का सवाल है, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना 8.3 फीसदी प्रतिफल देती है। लेकिन यह भुगतान हर तीन महीने में मिलता है। यह उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए असुविधाजनक हो सकता है, जिन्हें मासिक आमदनी की जरूरत है।  प्रधानमंत्री वय वंदना योजना 8 से 8.3 फीसदी प्रतिफल देती है। प्रतिफल दर भुगतान के विकल्पों पर निर्भर करती है। मासिक भुगतान होने पर 8 फीसदी और सालाना भुगतान चुनने पर 8.3 फीसदी प्रतिफल मिलता है। डाकघर मासिक आय योजना में 7.3 फीसदी प्रतिफल मिलता है और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की 5 से 10 साल की एफडी पर अभी वरिष्ठ नागरिकों को 7.25 फीसदी ब्याज मिलता है। 
 
पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव ने कहा, 'एफडी पर ब्याज दरें बढ़ रही हैं। अगर ब्याज दरों में यूं ही मजबूती रही तो एफडी पर ब्याज की दरें साल भर के भीतर ही 8 फीसदी के पार पहुंच जाएंगी।' हालांकि छोटे बैंक एसबीआई से ज्यादा ब्याज देते हैं, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उनकी धनराशि पूरी तरह सुरक्षित रहे। वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा ध्यान उस अवधि पर देना चाहिए, जिसके लिए वह ब्याज दर सुनिश्चित (लॉक) कर सकते हैं ताकि ब्याज दरों में गिरावट के माहौल में उनकी मासिक आय कम न हो। 
 
वरिष्ठ नागरिक या बुजुर्ग प्रधानमंत्री वय वंदना योजना में 10 साल के लिए निवेश कर सकते हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में निवेश की अवधि केवल 5 साल है। राइट होराइजंस के मुख्य कार्याधिकारी अनिल रेगो ने कहा, 'लंबी अवधि के नजरिये से वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में दोबारा निवेश करने का झंझट और जोखिम रहेगा क्योंकि इसकी अवधि कम है।' इसके बाद हमें निवेश की सीमा देखनी चाहिए। पहले प्रधानमंत्री वय वंदना योजना में निवेश की सीमा 7.5 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक के लिए 15 लाख रुपये कर दिया गया है। इस योजना में पति-पत्नी दोनों कुल 30 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं। यह निवेश सीमा वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के समान है। 
 
व्यक्ति डाकघर मासिक आय योजना में अकेला 4.5 लाख रुपये और पत्नी के साथ मिलकर कुल 9 लाख रुपये निवेश कर सकता है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में निवेश पर धारा 80सी के तहत आयकर छूट हासिल की जा सकती है। सरकार ने इस साल के बजट में धारा 80टीटीबी शुरू की है, जिसमें वरिष्ठ नागरिक बैंक एफडी पर मिले 50,000 रुपये तक के ब्याज पर आयकर छूट हासिल कर सकते हैं।  सबसे अंत में हमें निवेश को भुनाने के पहलू पर ध्यान देना चाहिए। राघव ने कहा, 'वरिष्ठ नागरिक बचत से निकासी तुलनात्मक रूप से आसान है। आपको निकासी की वजह बताने की जरूरत नहीं है। आप एक मामूली जुर्माना चुकाकर निकासी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना में निकासी इतनी आसान नहीं है। इससे आप गंभीर बीमारी जैसा एक वाजिब कारण बताकर ही निकासी कर सकते हैं।' हालांकि निवेशक प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के निवेश पर ऋण भी ले सकता है। 
 
वित्तीय योजनाकारों का सुझाव है कि निवेशकों को निवेश से पहले कर चुकाने के बाद हाथ में आने वाले प्रतिफल की दर का आकलन करना चाहिए और निवेश को भुनाने के पहलू भी गौर करना चाहिए।  रेगो ने कहा, 'अगर व्यक्ति को लगता है कि उसे पैसे की जरूरत नहीं होगी या उसे मामूली पैसे की जरूरत होगी तो वह प्रधानमंत्री वय वंदना योजना में निवेश कर सकता है। दूसरी ओर यदि किसी को पूरी पूंजी की जरूरत हो सकती है तो उसके लिए वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में निवेश करना बेहतर रहेगा।' सर्वोच्च आयकर वर्ग में आने वाले निवेशक कर मुक्त बॉन्डों के बारे में भी विचार कर सकते हैं, जो इस समय द्वितीयक बाजार में परिपक्वता पर करीब 6 फीसदी प्रतिफल दे रहे हैं।
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