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मेडिक्लेम बीमा: सभी कसौटियों पर कसें, उसके बाद ही फैसला करें

संजय कुमार सिंह |  May 27, 2018 11:27 PM IST

मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदना कोई बच्चों का खेल नहीं है। यह बेहद पेचीदा पॉलिसी होती है, जिसमें ऐसे कई फीचर होते हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना जरूरी हो जाता है। ज्यादातर ग्राहकों के लिए यह फैसला करना बहुत मुश्किल होता है कि कौन सी पॉलिसी खरीदी जाए और कौन सी छोड़ दी जाए। नए ग्राहकों को छोडि़ए, पुराने और मंझे हुए ग्राहक भी इस मोर्चे पर आकर पसोपेश में फंस जाते हैं। चलिए, हम आपका काम कुछ आसान कर देते हैं और आपको कुछ पैमाने बताते हैं, जिन पर विचार करने के बाद ही पॉलिसी खरीदें।

कम हो प्रतीक्षा अवधि 

सबसे पहले देखिए कि पहले से मौजूद बीमारियों और कुछ खास विकारों के बारे में प्रतीक्षा अवधि कितनी दी गई है। कुछ पॉलिसियों में दो साल की प्रतीक्षा अवधि होती है और कुछ अन्य में यह अवधि चार साल भी हो सकती है। जितनी कम प्रतीक्षा अवधि हो, उतना ही अच्छा है। इसीलिए आपको कम से कम प्रतीक्षा अवधि वाली पॉलिसी ही चुननी चाहिए।

दावों का निपटारा 

यह अनुपात बताता है कि कंपनी ने अपने पास आए दावों में से कितने चुका दिए हैं। सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस में मुख्य ग्राहक अधिकारी ज्योति पुंजा का कहना है, 'अगर दावा निपटारे का अनुपात अधिक है तो इसका मतलब है कि ग्राहकों के लिए वह कंपनी अच्छी साबित हुई है।'

 

लेकिन दावों के निपटारे के जो आंकड़े और अनुपात दिए जाते हैं, उन्हें पेश करने का तरीका कई बार भ्रामक भी होता है। अपोलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस के मुख्य परिचालन अधिकारी भवतोष मिश्र कहते हैं, 'अलग-अलग कारोबार (कॉरपोरेट, रिटेल और सरकारी) एक साथ मिलाकर पेश करने, कारोबारी पोर्टफोलियो पुराना होने से इस पैमाने पर असर पड़ता है।'

चूंकि ये आंकड़े अलग-अलग उपलब्ध नहीं होते, इसलिए उपयोगकर्ता को सही तस्वीर देखने में दिक्कत होती है। पॉलिसीबाजार के निदेशक धु्रव सरीन कहते हैं, 'यदि कंपनी के कारोबार में समूह बीमा योजनाओं की हिस्सेदारी ज्यादा होती है तो इस बात की पूरी संभावना रहती है कि वह अधिक से अधिक दावों का निपटारा कर देगी क्योंकि समूह बीमा योजनाओं में बहुत कम दावे ही खारिज किए जाते हैं। लेकिन व्यक्तिगत पॉलिसी में दावे खारिज किए जाने की आशंका बहुत अधिक रहती है।' वह कहते हैं कि दावा निपटान अनुपात पर विचार करने के साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि बीमा कंपनी का खुदरा और समूह बीमा कारोबार कितना-कितना है। यदि खुदरा यानी व्यक्तिगत बीमा का कारोबार अधिक है और दावों के निपटारे का अनुपात भी अधिक है तो ऐसी कंपनी से मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदना बेहतर रहेगा।

यदि किसी कंपनी में दावा निपटान का अनुपात 85 फीसदी से अधिक है तो आंकड़ा अच्छा माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ बीमा कंपनियों का दावा निपटान अनुपात वाकई में बहुत कम है। ऐसी कंपनियों को हटा देते हैं तो कम मगर अच्छी कंपनियां बचेंगी।

शिकायतें कितनी कम

बीमा कंपनियों की वेबसाइटों पर सार्वजनिक खुलासे वाले हिस्से में आपको कुछ बेहद अहम आंकड़े मिलते हैं। मसलन प्रति 10,000 दावों पर दावा संबंधित शिकायतों की संख्या और प्रति 10,000 पॉलिसियों में पॉलिसी संबंधित शिकायतों की संख्या। सिक्योर नाउ इंश्योरेंस ब्रोकर के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक कपिल मेहता कहते हैं, 'कंपनियों के इन आंकड़ों की तुलना कर आपको उनकी सेवा और दावा निपटान क्षमता के बारे में अच्छी तरह से पता चल सकता है।'

कमरे का किराया

कई पॉलिसी में अस्पताल के कमरे के किराये की सीमा भी तय होती है, जो आम तौर पर बीमा की कुल रकम की 1 फीसदी ही होती है। ऐसी पॉलिसी से परहेज करना चाहिए। अगर आपको जो पॉलिसी पसंद आ रही है, उसमें भी कमरे के किराये की अधिकतम सीमा 1 फीसदी ही है तो बीमा की रकम अधिक से अधिक रखनी चाहिए ताकि आपको शहर के अस्पतालों में सिंगल रूम हासिल हो सके। उदाहरण के लिए महानगरों में एक कमरे का किराया 6,000 रुपये से शुरू हो सकता है। वहां आपको कम से कम 6 लाख रुपये का बीमा कराना पड़ेगा। 

कुछ पॉलिसियों में अलग तरह की बंदिशें होती हैं। उनमें आपको सिंगल प्राइवेट कमरा मिल सकता है, लेकिन वह बेस कैटिगरी में ही उपलब्ध हो सकता है। सरीन कहते हैं, 'आप किसी अस्पताल में जाते हैं और बेस कैटिगरी में सिंगल प्राइवेट कमरा ही नहीं मिलता है तो आप क्या करेंगे? उस सूरत में आपको ऊंची श्रेणी वाले कमरे में रुकना पड़ सकता है और किराये की कुछ रकम दावा करते समय आपको अपनी जेब से देनी पड़ेगी।' जब आप ऊंची श्रेणी का कमरा चुनते हैं तो इलाज का कुल खर्च बढ़ जाता है। बीमा कंपनी केवल बेस पैकेज के तहत आने वाला खर्च भरेगी। उसके ऊपर जो भी खर्च आता है, वह आपको अपनी जेब से ही चुकाना पड़ेगा।

बड़ा कैशलेस नेटवर्क 

यह भी जरूर देख लें कि बीमा कंपनी के कैशलेस नेटवर्क में जो अस्पताल हैं, उनमें से कुछ आपके घर के आसपास हैं या नहीं और नेटवर्क बड़ा है या नहीं। इसमें वे अस्पताल जरूर शामिल होने चाहिए, जिनमें आप अक्सर जाते रहते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि बीमा कंपनी अगर नई है तो वह अपना नेटवर्क अभी तैयार ही कर रही होगी। अगर उसकी पॉलिसी वाकई अच्छी है तो केवल इसी आधार पर उसे नकार नहीं दें कि उसके नेटवर्क में फिलहाल कम अस्पताल हैं।

 

पॉलिसीबाजार जैसी एग्रीगेटर साइट आपको बता सकती हैं कि हरेक बीमा कंपनी के कैशलेस नेटवर्क में कितने अस्पताल शामिल हैं। इसके लिए आपको अपना पिन कोड डालना होगा और पूरी फेहरिस्त सामने आ जाएगी।

कैसा-कितना कारोबार

मेहता के अनुसार आपको मुख्य स्वास्थ्य बीमा कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। वह कहते हैं, 'ये कंपनियां इस व्यवसाय पर ही ध्यान लगाती हैं और इनके पास अच्छी योजनाएं होती हैं। निजी क्षेत्र की बड़ी सामान्य बीमा कंपनियों में से किसी एक को भी चुना जा सकता है।' 

खर्च के दावे का अनुपात

यह कंपनी द्वारा चुकाए गए कुल दावों का अनुपात है। यदि किसी बीमित व्यक्ति का खर्च दावा अनुपात 90 प्रतिशत से अधिक है तो इसकी अधिक संभावना है कि निकट भविष्य में इससे कीमत बढ़ सकती है। इसलिए ऐसी कंपनियों से परहेज करना चाहिए।

प्रीमियम दर

प्रीमियम की तुलना अपनी उम्र और बीमा की रकम को ध्यान में रखकर करें और उसी पॉलिसी का चयन करें जिसे आप चला सकते हों। इन सभी आंकड़ों से आपको अधिक उपयुक्त विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है। कई महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती हैं। कैशलेस बनाम रीइम्बर्समेंट निपटान अनुपात पर भी नजर रखें और  ऐसी कंपनी चुनें, जिसका कैशलेस निपटान अनुपात ऊंचा हो। 
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