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शानदार तिमाही परिणामों से फार्मा शेयरों में आई तेजी

राम प्रसाद साहू |  Jun 03, 2018 09:51 PM IST

सन फार्मा में 7 प्रतिशत और ल्यूपिन में 4.7 प्रतिशत से अधिक की वृद्घि कीमदद से बीएसई फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा चढऩे वाले सेक्टोरल सूचकांकों में एक है। मूल्य निर्धारण दबाव, नियामकीय चिंताओं और धीमी राजस्व वृद्घि से जूझ रहे इस सेक्टर में तेजी मार्च तिमाही के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन की वजह से आई है। कम से कम चार तिमाहियों में, अमेरिका में मजबूत उपस्थिति वाली ज्यादातर भारतीय जेनेरिक फार्मा कंपनियों ने अपने अमेरिकी व्यवसाय में अच्छा सुधार दर्ज किया है। जहां सन फार्मा का मार्च तिमाही का राजस्व दिसंबर तिमाही की तुलना में 11.6 प्रतिशत ज्यादा रहा, वहीं ल्यूपिन के लिए यह आंकड़ा 4.7 प्रतिशत रहा है। कैडिला और सिप्ला ने भी मार्च तिमाही में 4 प्रतिशत का त्रैमासिक सुधार दर्ज किया है।

 
सेंट्रम रिसर्च के रंजीत कपाडिया का कहना है, 'कई बड़ी भारतीय दवा कंपनियों के लिए अमेरिकी व्यवसाय में त्रैमासिक सुधार दर्ज किया गया है। जहां पिछले साल फार्मा सेक्टर के लिए कीमत गिरावट 13-15 प्रतिशत के दायरे में रही थी, वहीं औसत आधार पर यह अब 8-10 प्रतिशत पर है। हम अमेरिकी बाजार में भारतीय जेनेरिक कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर सकते हैं।' इसमें आश्चर्य नहीं है कि सीएलएसए और मैक्वायरी ने सन फार्मा की रेटिंग में सुधार किया है। जहां सीएलएसए को स्पेशियलिटी उत्पादों के मजबूत प्रवाह की वजह से कंपनी की आय अगले कुछ वर्षों के दौरान दोगुनी हो जाने का अनुमान है, वहीं मैक्वेरी का मानना है कि रिस्क-रिवार्ड अधिक संतुलित है। इन दोनों फर्मों का कहना है कि अमेरिकी बिक्री में मजबूती के संकेत दिख रहे हैं।
 
हालांकि वितरण चैनल के समेकन की वजह से मूल्य निर्धारण दबाव बना हुआ है, लेकिन कुछ ऐसे भी रुझान दिखे हैं जिनसे सुधार को बढ़ावा मिला है। विश्लेषकों का कहना है कि दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक कंपनियां तेवा और सैंडोज ने अमेरिकी बाजार में कई मोलेक्यूल की बिक्री बंद कर दी है जिससे छोटी कंपनियों को वहां अपना दायरा बढ़ाने में मदद मिल रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यह रुझान बरकरार रहने की संभावना है क्योंकि बड़ी कंपनियां अपने मुनाफे में सुधार लाने के लिए मूल्यवर्धित उत्पादों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
 
सुधार का अन्य कारण यह है कि बड़ी तादाद में उत्पाद मंजूरियां मिली हैं। इससे इन कंपनियों का उत्पाद पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ा है। एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, 'नए उत्पादों से जेनेरिक कंपनियों को फायदा हो रहा है।' उदाहरण के लिए कैडिला हेल्थकेयर ने संकेत दिया है कि वह वर्ष में 50 उत्पाद पेश करेगी जिससे उसे अपनी बिक्री की रफ्तार को भविष्य में बरकरार रखने में मदद मिल सकती है। कंपनी उन कुछ बड़ी जेनेरिक कंपनियों में भी शुमार है जिन्हें संयंत्र से संबंधित समस्याओं से नहीं जूझना पड़ रहा है जिससे उसे नए लॉन्च के मजबूत पाइपलाइन की दिशा में आगे बढऩे में मदद मिल रही है।
सन फार्मा के लिए स्पेशियलिटी उत्पादों जबकि कैडिला के लिए विशिष्टï अवसरों को देखते हुए बड़ी कंपनियों के लिए मुनाफे में सुधार आने का अनुमान है। कैडिला के प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वह वित्त वर्ष 2019 के लिए मार्जिन को बरकरार रखेगी।
 
अन्य सकारात्मक बदलाव घरेलू बाजार में बिक्री में दिखा है जो जीएसटी के क्रियान्वयन से प्रभावित हुई थी। पिछली तीन तिमाहियों के दौरान 5-6 फीसदी पर वृद्घि जीएसटी की वजह से धीमी रही, हालांकि बिक्री वृद्घि मजबूत रही है। कई विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में यह (बिक्री वृद्घि) दो अंक में पहुंच जाएगी। डॉयचे बैंक के कार्तिक मेहता का मानना है कि फार्मा क्षेत्र में वृद्घि 2018 की जून तिमाही से बढ़कर 9-10 प्रतिशत हो जाएगी। उनके अनुसार, जीएसटी से वृद्घि पर 3 प्रतिशत तक का प्रभाव पड़ा। भारत में वृद्घि की रफ्तार में फिर से तेजी जरूरी है क्योंकि इसका सिप्ला और टॉरंट की बिक्री में 40 प्रतिशत का योगदान है जबकि सन फार्मा, ल्यूपिन, कैडिला और ग्लेनमार्क के लिए यह 30 प्रतिशत है। 
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