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ऑनलाइन खरीदिए भारत सरकार के बॉन्ड

तिनेश भसीन |  Jun 03, 2018 09:54 PM IST

खुदरा निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (जीसेक)को खरीद पाना अब किसी शेयर में निवेश करने जैसा आसान हो गया है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज और बंबई स्टॉक एक्सचेंज ने सरकारी प्रतिभूतियों की ऑनलाइन खरीद सुविधा देने के लिए ई-जीसेक प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिये खरीदी गई प्रतिभूतियों को खुदरा निवेशक अपने डीमैट खातों में सुरक्षित रख सकते हैं। निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक की नीलामी में शामिल होकर सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कर सकते हैं। हालांकि वे इस नीलामी में एक्सचेंजों के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए ही शिरकत कर सकते हैं। जेरोधा के मुख्य परिचालन अधिकारी वेणु माधव कहते हैं, 'रिजर्व बैंक नीलामी के लिए रखी गई प्रतिभूतियों का पांच फीसदी हिस्सा गैर-प्रतिस्पद्र्धी नीलामी के लिए आरक्षित रखता है। छोटे निवेशकों को ये प्रतिभूतियां एक निर्धारित कीमत पर दी जाती हैं।' यहां तक कि महज 10 हजार रुपये जैसी राशि से भी एक सरकारी बॉन्ड खरीदा जा सकता है।

 
छोटे निवेशकों को भी प्रतिभूति नीलामी में शामिल होने का मौका मिलने से वे सावधि जमा (एफडी) की तुलना में थोड़ा अधिक रिटर्न कमा सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक 10 वर्ष की एफडी पर 6.75 फीसदी ब्याज दे रहा है जबकि 10 साल की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूति 7.7-7.8 फीसदी ब्याज दे रही है। ई-जीसेक प्लेटफॉर्म न केवल लंबी अवधि के बॉन्ड मुहैया करा रहे हैं बल्कि वहां पर 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन की परिपक्वता अवधि वाले ट्रेजरी बिल भी खरीदे जा सकते हैं।  अभी तक एक निवेशक अगर सरकारी प्रतिभूतियां खरीदना चाहता था तो उसके लिए सबसे आसान विकल्प गिल्ट फंड होते थे। हालांकि ये फंड काफी उठापटक वाले होते हैं। ब्याज दरों में गिरावट के समय गिल्ट फंड दोहरे अंकों में रिटर्न देते हैं लेकिन ब्याज दर चढऩे पर उनका रिटर्न नकारात्मक हो जाता है। अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव कहते हैं, 'निवेशकों को गिल्ट फंडों में निवेश करने और उन्हें निकालने के लिए समय चाहिए होता है और यह काम पेशेवर मदद से ही किया जाना चाहिए। गिल्ट फंड आम निवेशकों के लिए उपलब्ध उत्पाद नहीं होते हैं।'
 
एक खुदरा निवेशक नीलामी में सरकारी बॉन्ड खरीद तो सकता है लेकिन उसके पास उन गिने-चुने बॉन्ड की बिक्री के लिए कोई और बाजार नहीं है। एक्सचेंज के जरिये सरकारी बॉन्ड खरीदते समय निवेशक को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि उस बॉन्ड को तय अवधि तक अपने पास रखना होगा। राव कहते हैं, 'एक निवेशक ब्याज दरों में होने वाले बदलावों से फायदा उठाने के लिए इस माध्यम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। अगर भविष्य में ब्याज दर गिरती है और बॉन्ड पर मिलने वाला प्रतिफल बढ़ जाता है तो भी निवेशक अपने पास रखे बॉन्ड बेचकर उन्हें भुना नहीं पाएगा।'
 
ऋण प्रतिभूतियों में निवेश की मंशा रखने वालों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में प्रत्यक्ष निवेश करना लंबे समय के लिए परिसंपत्ति आवंटन का हिस्सा होता है। पॉजिटिव वाइब्स कंसल्टिंग ऐंड एडवाइजरी के पार्टनर मल्हार मजूमदार कहते हैं, 'निवेशकों को फिलहाल एफडी के विकल्प के तौर पर सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का सोचना चाहिए। इन प्रतिभूतियों के लिए कोई और बाजार विकसित नहीं होने और वहां पर कारोबारी अवसर उपलब्ध नहीं होने तक सरकारी प्रतिभूतियां एफडी का का विकल्प बन सकती हैं।' ऐसे निवेशकों के लिए एक और विकल्प भारत सरकार के बचत बॉन्ड हो सकते हैं जो 7.75 फीसदी रिटर्न की पेशकश करते हैं। हालांकि ये बॉन्ड केवल सात साल की अवधि के लिए ही खरीदे जा सकते हैं। सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों की मियाद कुछ महीनों से लेकर एक दशक से भी अधिक हो सकती है। लेकिन सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों में निवेश की एक अतिरिक्त लागत भी होती है। निवेशक को डीमैट खाते के रखरखाव का सालाना शुल्क भी देना पड़ता है जो 250 से 750 रुपये के बीच होता है। वैसे भारत सरकार के सेविंग बॉन्ड के लिए डीमैट खाता रखने की जरूरत नहीं होती है।
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