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किफायती आवास परियोजना में निवेश बनाएं फायदेमंद

तिनेश भसीन |  Jun 10, 2018 08:26 PM IST

रियल एस्टेट बाजार सुस्त चल रहा है और बिना बिके मकानों का वहां ढेर लग गया है, लेकिन कुछ अमीर निवेशक इस समय भी किफायती आवास के क्षेत्र में निवेश के मौके खंगालने में जुटे हैं। उसकी तीन प्रमुख वजहें हैं: कीमतें कम हुई हैं, सरकार से छूट पाने के लिए डेवलपर को उसी समय पर मकान देना होगा, जिसका उसने वायदा किया था और ऐसे मकानों की मांग भी बहुत अधिक है। कार्वी प्राइवेट वेल्थ में मुख्य कार्याधिकारी अभिजित भावे के कुछ ग्राहकों ने इस क्षेत्र में भी निवेश कर डाला है। भावे कहते हैं, 'किफायती आवास का क्षेत्र निवेश के लिहाज से आकर्षक विकल्प बन गया है क्योंकि ऐसे मकानों की मांग अच्छी खासी है।' उनके हिसाब से पिछले एक दशक में प्रमुख महानगरों के उपनगरीय इलाकों में बेहद तेजी से वृद्घि हुई है और इस समय उनमें भारी तादाद में आबादी रह रही है। मिसाल के तौर पर मुंबई में ही इस वक्त तकरीबन 90 लाख लोग अवैध या अनियोजित मकानों और झुग्गियों में बसर कर रहे हैं और उनकी बस्तियां या झुग्गियां शहर की केवल 6 से 8 फीसदी जमीन पर बसी हैं। किफायती आवास की दिशा में सरकार के कार्यक्रमों के कारण यह आबादी भी किफायती मकानों में पहुंच जाएगी।

 
लेकिन किफायती मकानों की ज्यादातर परियोजनाएं दूर-दराज के इलाकों में हैं। वहां जरूरी बुनियादी ढांचे की किल्लत है और शहर से संपर्क की समस्या भी है। लागत कम रखने के लिए डेवलपर ऐसी परियोजनाओं में ज्यादा सुविधाएं भी नहीं देते हैं। कोलियर्स इंटरनैशनल इंडिया में कैपिटल मार्केट्ïस ऐंड इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के राष्टï्रीय निदेशक गगन रणदेव की सलाह है, 'निवेशकों को महानगरों के नजदीक विकसित हो रहे ऐसे इलाकों में मकानों की तलाश करनी चाहिए, जहां बुनियादी ढांचा बिछाने का काम या तो शुरू हो गया है या उसकी योजना को मंजूरी मिल चुकी है। उन्हें लंबे समय के लिए निवेश बनाए रखने की सोचनी चाहिए और वाजिब प्रतिफल की ही उम्मीद लगानी चाहिए।' निवेश कम से कम सात साल के लिए किया जाना चाहिए। ऐसी परियोजनाओं में निवेशक सालाना 10 से 11 फीसदी औसत रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।
 
किफायती का मतलब सस्ता नहीं
 
किसी भी घर को खरीदे जाने की क्षमता वेतन से तय होती है और सबकी अलग-अलग क्षमता होती है। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि किफायती मकान सस्ते भी हों। आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने किफायती मकानों को आकार, कीमत और आय के आधार पर परिभाषित किया है। उदाहरण के लिए मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती मकानों का मतलब 600 और 1,200 वर्ग फुट के बीच के आकार और 12 लाख से 50 लाख रुपये के बीच कीमत वाले आवास से है। लेकिन निवेशक के लिए बेहतर यह है कि वह केंद्र सरकार की बताई परिभाषा पर चले क्योंकि उस परिभाषा के आधार पर ही डेवलपरों को तमाम रियायतें और कर संबंधी फायदे दिए जा रहे हैं। यदि डेवलपर चार महानगरों में 323 वर्ग फुट तक के कारपेट एरिया के साथ मकान बनाता है तो उसे छूट मिलती है। लेकिन देश के बाकी हिस्सों में 646 वर्ग फुट कारपेट एरिया रखने पर भी उसको छूट मिल जाती है। इस तरह की छूट और रियायतों से डेवलपर को मकानों की कीमत कम रखने में मदद मिल सकती है। आजकल बिना बिके मकानों की तादाद बढ़ती जा रही है और ऐसे में ज्यादातर खरीदफरोख्त किफायती मकानों के क्षेत्र में ही हो रही है और सरगर्मी भी उसी क्षेत्र में है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि किफायती मकानों की ऊपरी श्रेणी में यानी 25 से 50 लाख रुपये की कीमत के मकानों में कमाई की जा सकती है क्योंकि वहां इस समय सबसे ज्यादा मांग है। जब रियल्टी बाजार पटरी पर लौटेगा तो दूसरी श्रेणियों के मुकाबले इन मकानों की कीमतों में ज्यादा तेज इजाफा होगा।
 
महानगरों में बेहतर अवसर
 
रियल एस्टेट विश्लेषकों का कहना है कि महानगर और उनके आसपास के इलाकों में मझोले और छोटे शहरों के मुकाबले अधिक प्रतिफल मिलने के मौके हैं। उदाहरण के लिए दिल्ली-एनसीआर में निवेशक को गुरुग्राम और नोएडा जैसे इलाकों में परियोजनाएं तलाशनी चाहिए। इसी तरह मुंबई से नजदीकी की वजह से ठाणे और नवी मुंबई जैसे इलाके सस्ती आवास परियोजना में निवेश करने वालों के लिए बेहतर पैगाम ला सकते हैं। कोलकाता की बात करें तो सोनारपुर और बारासात में किफायती परियोजनाओं को खंगाला जा सकता है। चूंकि शहर के बाहरी इलाकों में विस्तार होता है, इसलिए इन इलाकों में निकट भविष्य में बेहतर बुनियादी ढांचे का विकास होने की पूरी संभावनाएं होती हैं। रणदेव कहते हैं, 'अच्छी परियोजना के चयन का तरीका बहुत सीधा है। आपको यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि जो मकान खरीद रहे हैं, वह आसानी से किराये पर चढ़ेगा या नहीं। साथ ही यह भी देखें कि आगे चलकर क्या आप अपने परिवार के साथ उस इलाके में रह पाएंगे।'
 
यदि इलाके में बुनियादी सुविधाओं की किल्लत है तो ठोक-बजाकर यह पक्का कर लीजिए कि बुनियादी ढांचा विकास की दिशा में वहां कुछ काम पहले से शुरू हो चुका है या नहीं। यह काम किसी भी तरह का हो सकता है, चाहे मेट्रो लाइन का विस्तार हो, नया रेलवे स्टेशन हो या नया राजमार्ग हो। हो सकता है कि बुनियादी ढांचा विकास में कुछ समय लगेगा, लेकिन इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संपत्ति की कीमत तेजी से बढ़ सकती है। साथ ही बिल्डर ऐसा चुनें, जिसका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो। अच्छी साख वाले कई डेवलपरों ने किफायती मकान की परियोजनाओं के लिए सहायक कंपनियां या दूसरे ब्रांड बना लिए हैं। टाटा हाउसिंग की कंपनी टाटा वैल्यू होम्स है, शापूरजी पलोनजी की जॉयविले है और महिंद्रा लाइफस्पेस ने हैप्पिनेस्ट नाम की परियोजना शुरू की है। ये डेवलपर निर्माण के मामले में गुणवत्ता से समझौता नहीं करते और इनमें से कई तो किफायती मकानों की श्रेणी में भी अच्छी सुविधाएं दे रहे हैं। रियल एस्टेट विश्लेषकों का यह भी कहना है कि प्रतिफल के मामले में निवेशकों को व्यावहारिक उम्मीदें ही रखनी चाहिए। सीबीआरई इंडिया में कैपिटल मार्केट्स कहते हैं, 'किफायती आवास के क्षेत्र में निवेश करने में सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कीमतें इस समय स्थिर हैं और अधिकतर बाजारों में बहुत धीरे से बढ़ रही हैं। अगर आपको लग रहा है कि हर साल कीमतों में तेज इजाफा होगा तो आपकी उम्मीदें शायद पूरी नहीं हो पाएंगी।'
 
फायदा पाने के दूसरे रास्ते
 
यदि आप उपयुक्त परियोजना नहीं तलाश पा रहे हैं या आप यह नहीं समझ पा रहे हैं कि उन्हें खरीदना सही है या नहीं तो आपके पास दूसरे विकल्प भी हैं। उन विकल्पों का इस्तेमाल करने पर आपको किफायती आवास क्षेत्र में भारी मांग का फायदा मिल सकता है। एडलवाइस प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट के प्रमुख अंशु कपूर कहते हैं, 'इसका एक तरीका तो यह है कि किफायती आवास के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों के शेयरों में निवेश कर दिया जाए। दूसरा तरीका है रियल एस्टेट फंड में सीधे रकम लगा देना। इसमें आप इक्विटी फंड भी देख सकते हैं और डेट फंड भी।' इनके अलावा तीसरा तरीका आवासीय क्षेत्र से रिश्ता रखने वाली कंपनियों मे ंनिवेश का हो सकता है। ये कंपनियां इस्पात बनाने वाली भी हो सकती हैं, मकान निर्माण के लिए सामग्री बनाने वाली हो सकती हैं या मकानों के लिए कर्ज देने वाली यानी हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां भी हो सकती हैं। आपको ध्यान यह रखना है कि कंपनी किफायती आवास क्षेत्र के लिए कर्ज देती हो।
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