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चार क्षेत्रों की इन कंपनियों पर दांव फायदे का सौदा

राम प्रसाद साहू |  Jun 10, 2018 08:29 PM IST

ऐसे वर्ष में जब बीएसई के सेंसेक्स में 13 प्रतिशत मजबूती दर्ज की गई है, चार क्षेत्र के दिग्गजों ने बाजार के साथ साथ अपने प्रतिस्पर्धी सूचकांकों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। दरअसल, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को छोड़कर (जिसमें हाल के समय में कमजोरी आई है), सन फार्मा, अपोलो हॉस्पिटल्स और टाटा मोटर्स जैसे अन्य सभी दिग्गज पिछले पांच वर्षों के दौरान हर वर्ष नुकसान दर्ज करने वाले शेयर बन गए हैं। हालांकि वित्त वर्ष 2019 में शेयरधारकों के लिए हालात में बदलाव आ सकते हैं क्योंकि इन कंपनियों ने अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए रणनीति तैयार की है। यदि हालात अनुमान के अनुरूप रहते हैं तो इन क्षेत्रों की दिग्गज कंपनियों द्वारा चालू वित्त वर्ष में राजस्व, मार्जिन और शुद्घ लाभ में अच्छी बढ़त दर्ज किए जाने की संभावना है। निवेश के नजरिये से अन्य सकारात्मक बदलाव यह है कि ये शेयर आकर्षक मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं। पिछले सप्ताह स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में भारी गिरावट और ब्रोकरों द्वारा लार्ज कैप को पसंद किए जाने की वजह से इन शेयरों के लिए अब गिरावट सीमित रहने के आसार हैं।

 अपोलो हॉस्पिटल्स
 
लगभग 12,000 से अधिक बिस्तरों के साथ परिचालन कर रही देश की यह सबसे बड़ी हेल्थकेयर चेन पिछले कुछ वर्षों से निवेशकों के रडार से दूर बनी हुई है और इस शेयर की वैल्यू में वर्ष 2016 से 28 फीसदी की गिरावट आई है। स्टेंट और नी कैप्स जैसे चिकित्सा उपकरणों पर मूल्य निर्धारण की सीमा, और हेल्थकेयर सेवाओं, डायग्नोस्टिक तथा फार्मेसी पर नियामकीय सख्ती मुख्य चिंता है। अन्य चिंताओं में जीएसटी क्रियान्वयन और नोटबंदी की वजह से राजस्व प्रभावित होना भी शामिल है। विश्लेषकों का मानना है कि बड़े पूंजीगत खर्च, नए हॉस्पिटल की कमाई बढऩे, रिटेल हेल्थकेयर और फार्मेसी का दायरा मजबूत होने से परिचालन मुनाफा वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2020 में 20 प्रतिशत तक बढऩे का अनुमान है। विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2020 तक मार्जिन में 150 आधार अंक तक का सुधार होने का अनुमान है।
 
भारतीय स्टेट बैंक
 
परिसंपत्ति के लिहाज से भारत के इस सबसे बड़े ऋणदाता ने इस क्षेत्र की अन्य कंपनियों की तुलना में शेयर बाजारों पर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। यह वित्तीय सेवा क्षेत्र में निवेशकों के लिए काफी हद तक संतोषजनक स्थिति है, क्योंकि खासकर निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी पिछले कुछ वर्षों में अपनी रकम बढ़ाकर कई गुना करने में सफल रहे हैं। हालांकि मार्च तिमाही का प्रदर्शन भी फंसे कर्ज की वजह से प्रभावित हुआ, लेकिन यदि बैंक के प्रबंधन पर विश्वास किया जाए तो गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के संदर्भ में बुरा समय बीत चुका है। बैंक 10-12 प्रतिशत की ऋण वृद्घि और वित्त वर्ष 2020 तक एक प्रतिशत प्रतिफल (वित्त वर्ष 2018 में गिरावट की तुलना में) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब अपनी उधारी लागत को नियंत्रित करने और परिचालन प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर ध्यान दे रहा है। 
 
सन फार्मास्युटिकल
 
भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मास्युटिकल इस क्षेत्र में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में से एक है। पिछले तीन वर्षों के दौरान इस शेयर में 42 प्रतिशत की कमी आई है। अमेरिकी बाजार में मूल्य निर्धारण दबाव को देखते हुए कंपनी का राजस्व पिछले वित्त वर्ष में 14 प्रतिशत गिरा। वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2017 में इसमें एक अंक की वृद्घि दर्ज की गई थी। दूसरी तरफ, परिचालन मुनाफा मार्जिन वित्त वर्ष 2016 से 600 आधार अंक तक घटा है। कंपनी वित्त वर्ष 2019 में दो अंक की वृद्घि का अनुमान व्यक्त कर रही है। सीमित प्रतिस्पर्धा वाले उत्पादों की पेशकश और अमेरिकी एफडीए द्वारा हलोल संयंत्र को मंजूरी दिया जाना मुख्य सकारात्मक कारक हैं और इनसे इस वित्त वर्ष में मार्जिन में 400 आधार अंक तक की तेजी आने का अनुमान है।
 
टाटा मोटर्स
 
मझोले एवं भारी वाणिज्यिक वाहन (एमऐंडएचसीवी) सेगमेंट की दिग्गज टाटा मोटर्स का शेयर बाजारों में प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में अच्छा नहीं रहा है और इसमें 2016 से हर साल उसकी वैल्यू में 30 प्रतिशत की कमी आई है। कंपनी के दो विकास इंजन - भारतीय व्यवसाय के साथ साथ जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) में नए उत्पाद पोर्टफोलियो, लागत नियंत्रण उपायों और मांग चक्र में सुधार से बदलाव आने की संभावना है जिसका पिछले वर्षों में अभाव था। कंपनी ने वित्त वर्ष 2019 में सुधार के लिए बड़ा बदलाव किया है और परिचालन लाभ स्तर के साथ साथ शुद्घ लाभ वृद्घि पर इसका असर दिखने की संभावना है। हालांकि नए उत्पादों पर जेएलआर द्वारा भारी निवेश किए जाने से उसके नकदी प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता था और इससे कर्ज स्तर में भी कुछ इजाफा हो सकता है। जेएलएल के नए उत्पादों की पेशकश की सफलता पर भी नजर रखे जाने की जरूरत होगी, क्योंकि यह बिक्री में सुधार के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि टाटा मोटर्स की आय अगले दो वित्त वर्षों में औसतन 25 प्रतिशत तक बढ़ेगी। 
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