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बिक्री में तेजी से मार्जिन कमी की भरपाई

राम प्रसाद साहू |  Jun 10, 2018 08:29 PM IST

पिछले सप्ताह सात दिनों के अंदर मारुति सुजूकी के शेयर में 4 प्रतिशत तेजी आई है। मई में कंपनी की बिक्री के  आंकड़े मजबूत रहने, 2018-19 में कारोबार में तेजी की उम्मीद और 2020 तक इलेक्ट्रिक व्हीकल उतारने की योजना के दम पर शेयर में तेजी देखी गई है। हालांकि कच्चे माल की ऊंची कीमतें और कमजोर रुपये से आयात जरूर महंगा हो गया है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अधिक बिक्री और मांग बढऩे से छूट में कमी होने से इसकी भरपाई हो जाएगी। इसके साथ ही मॉडलों में विविधता से भी कंपनी को लाभ मिलेगा। मारुजि सुजूकी और वाहन क्षेत्र दोनों के लिए बिक्री बढ़ी है। पिछले कुछ महीनों से एक अंक में वृद्धि रहने के बाद मई में बड़ी कंपनियों के लिए मांग की स्थिति अच्छी रही है। नए मॉडलों और देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी में क्षमता विस्तार से खासी मदद मिली है। 

 
मारुति सुजूकी की बिक्री में 25 प्रतिशत तेजी आई, जो पिछले एक दशक में सर्वाधिक है। बलेनो,ब्रेजा, डिजायर और स्विफ्ट जैसे मॉडलों की इसमें दमदार भूमिका रही है। ये सभी मॉडल पिछले कुछ सालों के दौरान उतारे गए हैं। कंपनी हरेक महीने 119,000 वाहनों का उत्पादन करती है, जिनमें इन मॉडलों की हिस्सेदारी आधी होती है। विश्लेषकों का कहना है कि स्वैच्छिक उपभोग में तेजी, ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढऩे और खरीदारी के आंकड़े बेहतर रहने के साथ ही वितरण नेटवर्क में विस्तार से कंपनी को 2017-18 में दो अंकों में वृद्धि हासिल करने में मदद मिली। कंपनी 2020 तक वैगनआर का इलेक्ट्रिक संस्करण उतारना चाहती है। इसका विनिर्माण ज्यादातर देसी कल-पुर्जों से ही होगा। शेयरखान के भारती जियानानी जैसे विश्लेषकों का मानना है कि इससे मारुति सुजूकी को मदद मिलेगी, क्योंकि टोयोटा के साथ इसकी साझेदारी से इलेक्ट्रिक एव हाइब्रिड वाहनों के खंड में खास तौर पर आसानी होगी। 
 
टोयोटा दुनिया की बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों में एक है और लगभग हरेक देशों में इसका कारोबार है और तकनीक के इस्तेमाल में भी यह आगे रहती है। मारुति इसका लाभ उठा सकती है। मजबूत मांग और प्रमुख मॉडलों का वेटिंग पीरियड अधिक होने से उत्पादन आंकड़ों में तेजी कंपनी के कारोबार के लिए सहायक होगी। कंपनी 2018-19 में वाहन उद्योग से वृद्धि दर के मामले में आगे बढऩा चाहती है। सबसे पहले कंपनी गुजरात संयंत्र में उत्पादन वित्त वर्ष 2018 के 157,000 यूनिट से बढ़ाकर मौजूदा वित्त वर्ष में 250,000 यूनिट करना चाहती है। गुजरात संयंत्र के दूसरे चरण के अगले साल जनवरी से उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है। विश्लेषकों को लगता है कि उत्पादन बढऩे और आपूर्ति में सुधार से ऑर्डर बुकिंग में कमी आएगी। इस समय ऑर्डर बुकिंग 110,000 है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और कमजोर रुपये को देखते हुए बाजार की नजर मार्जिन में सुधार पर भी रहेगी। मार्च तिमाही में परिचालन मुनाफा मार्जिन दिसंबर तिमाही के 14.2 प्रतिशत के मुकाबले 150 आधार अंक कमजोर रहा। इसका मुख्य कारण कीमतों में तेजी, मुद्रा विनिमय के प्रतिकूल प्रभाव, कर्मचारियों पर होने वाले खर्च और अन्य व्यय शामिल रहे। जापानी मुद्रा के खिलाफ रुपया कमजोर होने से कंपनी के लिए व्यय बढ़ जाता है, क्योंकि करीब 18 प्रतिशत व्यय येन में होता है। कुछ खर्च तो एक ही बार होते हैं, लेकिन कच्चे माल की कीमतों में तेजी समस्या बनी हुई है। हालांकि ऐक्सिस कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि इसकी भरपाई के लिए कंपनी के पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा,'जिंसों में तेजी और कमजोर रुपया मार्जिन के लिए मुश्किलें पैदा करते हंै, लिहाजा हमारा मानना है कि  स्केल बेनिफिट, आंतरिक खर्च नियंत्रण, उत्पादों में विविधता और आने वाले समय में छूट में कमी से मार्जिन में सुधार होगा।'
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