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बैंकिंग सेक्टर फंड में करें 5-10 प्रतिशत निवेश

संजय कुमार सिंह |  Nov 05, 2017 07:00 PM IST

जब से सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के पुनर्पूंजीकरण की घोषणा की है तभी से उनके शेयरों में तेजी का सिलसिला बना हुआ है। उस घोषणा के बाद वाले सप्ताह में निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक 35.53 फीसदी तक चढ़ गया था। म्युचुअल फंड निवेशकों के लिए भी यह फायदा उठाने का अच्छा अवसर है।

 
समय पर तेजी
 
सरकारी बैंक लंबे समय से फंसे कर्ज को पहचानने में और उनके लिए प्रावधान की व्यवस्था करने में परेशान रहे हैं। अब ये बैंक पूरी तेजी के साथ ऐसे कर्जों की पहचान कर सकते हैं, अपने नफे-नुकसान के खाते पर दो तिमाहियों तक प्रावधान की चोट खा सकते हैं और कदम आगे बढ़ा सकते हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड के फंड प्रबंधक विनय शर्मा कहते हैं, 'जिस समस्या को सुलझाने में पहले कई तिमाहियां लग जातीं, अब उससे बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है क्योंकि हमें लगता है कि इन बैंकों को पूंजी की किल्लत नहीं होगी।'
 
पिछले करीब एक दशक से सरकारी बैंक बाजार में अपना हिस्सा निजी क्षेत्र के बैंकों के हाथों गंवाते आ रहे हैं। लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में इसमें तेजी आई है क्योंकि इन बैंकों ने छोटे और मझोले उद्यमों को उधारी देने तथा उपभोक्ताओं को कर्ज देने जैसे कामों से हाथ खींचना शुरू कर दिया था। ये बैंक बुरे कर्ज की समस्या से निपटने में ही फंस गए थे और उनके पास उधार देने के लिए पर्याप्त पूंजी भी नहीं थी। इसलिए रिटेल कर्ज देने वाले बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने इनके अच्छे खासे बाजार पर कब्जा कर लिया। शर्मा कहते हैं, 'इनकी बाजार हिस्सेदारी कम होने की रफ्तार अब घट सकती है।'
 
सरकार द्वारा जरूरी पूंजी मुहैया कराए जाने से सरकारी बैंकों के शेयरों में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और उनकी रेटिंग में तब्दीली भी उसी कारण हुई है। अभी तक बाजार यही मानता था कि वित्तीय सेवा क्षेत्र में निवेश करते समय आपको रिटेल पर केंद्रित निजी क्षेत्र के बैंकों और एनबीएफसी पर दांव खेलना चाहिए (कंपनियों पर केंद्रित निजी ऋणदाताओं पर भी रकम लगाई जा सकती है) तथा सरकारी बैंकों से परहेज करना चाहिए। लेकिन अब इसमें तब्दीली हो सकती है।
 
चूंकि सरकारी बैंकों ने एक बार फिर कर्ज देना शुरू कर दिया है, इसलिए उनके पुनर्पूंजीकरण से समूची अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है। वे उधार देंगे तो निजी क्षेत्र भी पूंजीगत व्यय शुरू कर सकता है। साथ ही बुनियादी ढांचे में निवेश को भी बल मिल सकता है। इससे सीमेंट और इस्पात जैसे क्षेत्रों को भी फायदा होगा। लेकिन निवेशक यह न मान लें कि सरकारी बैंकों की समस्याएं पूरी तरह से खत्म हो गई हैं। रिलायंस म्युचुअल फंड में इक्विटी इन्वेस्टमेंट्ïस के वरिष्ठï फंड प्रबंधक संजय पारेख कहते हैं, 'समस्या के दो हिस्से हैं। पहला हिस्सा है सार्वजनिक बैंकों के पास पूंजी की किल्लत। सरकार जो पूंजी देगी, उससे इन बैंकों को तगड़ी राहत मिल जाएगी। समस्या का दूसरा और अहम हिस्सा यह है कि संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार की रफ्तार तेज होनी चाहिए। कर्ज का सही तरीके से पुनर्गठन करना होगा, बैंकों को फंसे कर्ज में चोट खानी पड़ेगी और प्रावधान करना होगा।'
 
अन्य विशेषज्ञ भी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि निवेशकों को सरकारी बैंकों के शेयरों में चल रही तेजी के चक्कर में बहकना नहीं चाहिए और सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। फंड्ïसइंडिया डॉटकॉम में शोध प्रमुख विद्या बाला का कहना है, 'बहीखातों की सफाई करना, प्रतिस्पद्र्घी बनना और बाजार में अपना हिस्सा फिर हासिल करना आसान नहीं होगा।'
 
फिर फायदा कैसे उठाएं
 
खबरें सुनकर दांव लगाना आसान काम नहीं होता है। उसके लिए आपको पैनी नजर वाला और फुर्तीला बनना होता है। इसीलिए उन्हीं निवेशकों को बैंकिंग तथा वित्तीय सेवा फंडों में रकम लगानी चाहिए, जो इस क्षेत्र पर बारीक नजर रख सकें। मिंट वॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी कहते हैं, 'यह सुनिश्चित करें कि जिस फंड में आपने निवेश किया है, उसमें निजी बैंकों के शेयर भी हों, सरकारी बैंकों के भी हों और एनबीएफसी के भी हों।' वित्तीय सेवा क्षेत्र की मजबूत संभावनाओं को देखते हुए उनकी सलाह है कि निवेशक (अपने इक्विटी पोर्टफोलियो की) 10 फीसदी रकम इन फंडों में लगा सकते हैं। लेकिन उन्हें कम से कम पांच साल के लिए निवेश करने के बारे में सोचना चाहिए।
 
इस श्रेणी से फंड चुनते समय उसके पिछले रिकॉर्ड पर नजर दौड़ाएं और दीर्घावधि प्रतिफल को ही अधिक महत्त्व दें। इसके अलावा ऐसा फंड प्रबंधन चुनें, जो उस वर्षों में गिरावट थामने में अच्छा खासा कामयाब रहा था, जिन वर्षों में बैंकिंग सूचकांक लुढ़क रहा था।
 
पीएसयू ईटीएफ में न करें अल्पावधि निवेश
 
कुछ ऐसे एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) उपलब्ध हैं जो सिर्फ सरकारी बैंकों के शेयरों में ही निवेश करते हैं। पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर हो सकता है कि निवेशक उनमें रकम लगाने के लिए लालायित हो जाएं। विशेषज्ञ ऐसा न करने की चेतावनी देते हैं, कम समय के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। वे इसके कई कारण बता रहे हैं। सरकारी बैंकों के शेयरों में पहले ही तेजी आ चुकी है। ऐसे में अल्पावधि के लिए किया गया कोई निवेश नुकसानदायक साबित हो सकता है। इन ईटीएफ में निवेश कम से कम तीन से पांच साल के लिए किया जाना चाहिए। 
 
इसके अलावा अभी इसके बारे में सही जानकारी सामने नहीं आई है कि बैंकों के पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी। बनर्जी का कहना है, 'सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सरकारी बैंकों के प्रदर्शन का आकलन कर सकती है कि उनमें कितनी पूंजी लगाने की जरूरत है। कुछ कमजोर बैंकों को बड़े बैंकों द्वारा मदद मिल सकती है। किसी ईटीएफ में आपका निवेश सभी सरकारी बैंकों में होता है।' बेहतर पीएसयू शेयरों का चयन करने और अन्य शेयरों से परहेज करने का सक्रिय दृष्टिïकोण ऐसे समय में बेहतर  काम करेगा। 
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