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इंडियन होटल्स: बढ़ती मांग से होगी मजबूत

राम प्रसाद साहू |  Jun 03, 2018 09:51 PM IST

प्रतिकूल उद्योग परिदृश्य, वैश्विक सहायक कंपनियों के लचर प्रदर्शन और ऊंची लागत से जूझने के बाद भारत की सबसे बड़ी हॉस्पिटैलिटी कंपनी इंडियन होटल्स के लिए हालात में अब सुधार दिख रहा है। सुधरते मांग परिदृश्य से वर्ष 2018 के लिए घरेलू उद्योग के ऑक्यूपेंसी स्तर (होटलों में ग्राहकों के ठहरने की दर) और कमरों की औसत दर को मजबूती मिली है और यह पांच वर्षों में अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तरों पर पहुंच गई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि पूरे देश में 14,500 कमरों के स्पेस वाली होटल कंपनी इंडियन होटल्स घरेलू उद्योग में सुधार की प्रमुख लाभार्थी होगी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के राशेश शाह और देवांग भट्टï को इस क्षेत्र में मजबूत वृद्घि दर्ज किए जाने की संभावना है। 

 
अनुकूल मांग-आपूर्ति
 
पिछले 10 वर्षों के दौरान कमरों की वृद्घि घटकर आधी रह जाने से मांग में आपूर्ति की तुलना में तेजी से इजाफा हआ है और वित्त वर्ष 2018 की मांग वृद्घि को 5 प्रतिशत पर मानते हुए भी आपूर्ति 3.2 प्रतिशत पर पीछे बनी हुई है। घरेलू यात्रियों द्वारा अधिक खर्च करने, विदेशी पर्यटकों की आवक तेज होने और पर्यटन को बढ़ाने के लिए सरकारी उपायों आदि की वजह से ऑक्यूपेंसी स्तरों में सुधार आने की संभावना है। विदेशी पर्यटकों की आवक लगातार बढ़ी है और मार्च तिमाही में यह संख्या दो साल पहले के 20 लाख की तुलना में 31 लाख दर्ज की गई।
 
मार्च तिमाही में तेजी
 
मूल्य निर्धारण शक्ति और बड़ी इन्वेंट्री वाली कंपनी के लिए परिचालन दक्षता में सुधार से मांग परिदृश्य मजबूत हुआ है। होटल कंपनियों के लिए, चूंकि खर्च का बड़ा हिस्सा निर्धारित है, इसलिए बढ़ते राजस्व का मुख्य हिस्सा मुनाफे में तब्दील होता है। मार्च तिमाही के वित्तीय नतीजों ने स्पष्टï संकेत दिया है। जहां स्टैंडअलोन राजस्व (जिसका कुल राजस्व में लगभग 70 प्रतिशत का योगदान है) सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़ा, वहीं परिचालन मुनाफा समान अवधि के दौरान 30 प्रतिशत बढ़ा। 
 
अन्य कारक
 
मांग परिदृश्य में सुधार के अलावा, एचएसबीसी जैसे ब्रोकरों ने दो मुख्य कारकों की पहचान की है। पहला है अंतराष्टï्रीय परिचालन के मार्जिन में सुधार। जहां इंङ्क्षडयन होटल्स की अंतरराष्टï्रीय सहायक इकाई का मार्जिन एक अंक (5.5-8.5 प्रतिशत) पर रहा, वहीं घरेलू व्यवसाय में मुनाफे में तेजी आई, और 2017-18 का समापन 24 फीसदी के मार्जिन के साथ हुआ। 17.6 प्रतिशत पर एकीकृत मार्जिन सुधरने की संभावना है, क्योंकि कंपनी ने अपने कम मुनाफे वाले अंतरराष्टï्रीय निवेश में कमी की है और घरेलू मार्जिन में सुधार दर्ज किया है। मार्च तिमाही का वित्तीय परिणाम दर्ज कर चुकी कंपनी ने अगले चार वर्षों के लिए परिचालन मुनाफा मार्जिन में 8 प्रतिशत तक के सुधार की रणनीति तैयार की है और इसे समान रूप से राजस्व वृद्घि (प्रबंधन शुल्क, नए इन्वेंट्री, प्रति कमरा राजस्व) और लागत नियंत्रण उपायों के बीच विभाजित किया है। विश्लेषकों को भविष्य में अच्छी मार्जिन वृद्घि की संभावना है।  
 
कंपनी की ऐसेट-लाइट स्ट्रेटेजी से भी ब्याज लागत और मूल्यह्रïास को कम बनाए रखने में मदद मिलने का अनुमान है जिससे मुनाफे को मजबूती मिलेगी। इसी तरह, अपने किफायती ब्रांड जिंजर के कायाकल्प से भी मुनाफे को मदद मिलेगी। अंतरराष्टï्रीय सहायक इकाइयों में किसी तरह के कायाकल्प और बिक्री तथा लीजबैक और गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों (आईटीडीसी शेयर, आवासीय अपार्टमेंट, भूमि बैंक आदि) की बिक्री से भी कर्ज घटाने में मदद मिलने की संभावना है जो वित्त वर्ष 2018 के अंत में 24.27 अरब रुपये पर था। पिछले साल राइट इश्यू के जरिये 15 अरब रुपये जुटाने वाली इंडियन होटल्स को अपना कर्ज वित्त वर्ष 2017 के अंत के 33.83 करोड़ रुपये से घटाने में मदद मिली। इसके अलावा, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में किसी तरह के बदलाव से और राहत मिल सकती है। 7,500 रुपये से अधिक दर वाले कमरों के लिए जीएसटी फिलहाल 28 प्रतिशत जबकि पहले यह 19 प्रतिशत था। कर दरों में किसी तरह का बदलाव इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकता है और इंडियन होटल्स को इसका ज्यादा लाभ मिल सकता है क्योंकि वह अपने ज्यादातर कमरों के लिए 10,000 रुपये प्रति दिन की दर से अधिक का शुल्क वसूलती है। 
 
मूल्यांकन
 
इंडियन होटल्स का शेयर वर्ष 2019 की अपनी उद्यम वैल्यू के 25 गुना पर है और घरेलू व्यवसाय में कुछ सुधार उसकी कीमतों में दिख चुका है, लेकिन कर्ज में और कमी, मार्जिन में तेजी के अलावा दरों में नरमी को मुख्य अनुकूल बदलावों के तौर पर देखा जाना चाहिए। मुख्य जोखिमों में मांग में अनुमान की तुलना में धीमी वृद्घि, या प्रतिस्पर्धा की वजह से आक्रामक मूल्य निर्धारण शामिल हैं। 
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