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रिटर्न भरें तो रखें बदलावों का ध्यान

तिनेश भसीन |  Jun 10, 2018 08:27 PM IST

करदाता आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाकर आयकर रिटर्न दाखिल करना शुरू कर सकते हैं। पिछले हफ्ते ही विभाग ने सातों प्रकार के आयकर रिटर्न फॉर्म अपने पोर्टल पर डाल दिए। जिन करदाताओं को देर से रिटर्न दाखिल करने की आदत पड़ी है, उन्हें लाइन पर लाने के लिए आयकर विभाग ने इस साल से विलंब शुल्क भी शुरू कर दिया है यानी पहले से तय तारीख के बाद रिटर्न दाखिल करने पर शुल्क भी भरना पड़ेगा। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई मुकर्रर की गई है। यह तारीख या समयसीमा उन लोगों के लिए है, जिनके खातों को ऑडिट करने की जरूरत नहीं है। अन्य लोगों के लिए आखिरी तारीख 30 सितंबर है। आयकर अधिनियम में नई धारा '234 एफ' जोड़ दी गई है, जिसमें विलंब शुल्क का प्रावधान किया गया है।

 
विलंब शुल्क भी रिटर्न दाखिल करने की तारीख के हिसाब से लगेगा। यदि कोई वेतनभोगी व्यक्ति 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है, लेकिन 31 दिसंबर से पहले कर देता है तो उसे बतौर विलंब शुल्क 5,000 रुपये भरने होंगे। लेकिन यदि रिटर्न 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच दाखिल किए जाते हैं तो शुल्क दोगुना यानी 10,000 रुपये हो जाएगा। हालांकि विभाग ने इस मामले में उन करदाताओं को कुछ राहत दी है, जिनकी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम है। उनके लिए विलंब शुल्क 1,000 रुपये ही रखा गया है।
 
31 मार्च, 2019 के बाद रिटर्न दाखिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। एचऐंडआर ब्लॉक इंडिया में कर अनुसंधान के प्रमुख चेतन चंडक का कहना है, 'आकलन की पूरी प्रक्रिया का अब कंप्यूटरीकरण हो चुका है। इसीलिए आयकर विभाग इस प्रक्रिया को एक वित्त वर्ष के भीतर ही पूरा कर लेना चाहता है। इससे विभाग का भी फायदा है और करदाताओं का भी। अगर प्रक्रिया तेज होगी तो आकलन तथा निर्धारण भी तेज होगा और रिफंड भी जल्दी मिलेंगे।' वक्त पर रिटर्न दाखिल करने के दूसरे फायदे भी हैं। क्लियरटैक्स के संस्थापक तथा मुख्य कार्य अधिकारी अर्चित गुप्ता कहते हैं, 'अगर आप वक्त पर रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो चालू वर्ष में हुए किसी भी घाटे को आप आगे के वर्षों में नहीं ले जा सकते हैं और आने वाले वर्षों में होने वाली आय पर उसके बदले कर छूट का फायदा नहीं ले सकते हैं।' गुप्ता के मुताबिक करदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देर से ही सही, उनका रिटर्न जरूर दाखिल हो जाए। वह कहते हैं, 'अगर करदाताओं से अधिक कर वसूल लिया गया है तो रिटर्न भरने से उन्हें उसके रिफंड का दावा करने में मदद मिलती है। इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि अगर आपने रिटर्न दाखिल किया है तो कर्ज या वीजा के लिए आवेदन करते समय अथवा कानून या बैंक की किसी प्रक्रिया से गुजरते समय आपको उसका फादया होता है।'
 
ध्यान रखिए कि इस साल आयकर रिटर्न के फॉर्म में जानकारी काफी विस्तार से मांगी गई है। उदाहरण के लिए वेतनभोगी व्यक्तियों को अपने वेतन के अलग-अलग घटक बताने होंगे और यदि किसी को मकान आदि संपत्ति से आय होती है तो करदाता को विस्तार से बताना होगा कि उसे कुल कितना किराया मिला और स्थानीय प्रशासन को उसने कितना कर दिया। रिटर्न के सत्यापन के लिए अब करदाता के पास पहले से ज्यादा विकल्प हैं। आधार के अलावा नेट बैंकिंग, पूर्व सत्यापित बैंक खाते, डीमैट खाते और बैंक एटीएम के जरिये भी रिटर्न के सत्यापन की सुविधा दी गई है। बैंक खाते अथवा डीमैट खाते के जरिये रिटर्न सत्यापित करने के लिए करदाता को पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर खाते को ही सत्यापित करना पड़ेगा।
 
पिछले महीने आयकर विभाग ने वेतनभोगी करदाताओं को चेतावनी दी थी कि रिटर्न दाखिल करते समय किसी भी अवैध तरीके का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाए। उसने कहा था कि इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कर विशेषज्ञों की सलाह है कि लोगों को ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) से तौबा कर लेनी चाहिए, जो 10 फीसदी कमीशन के एवज में अधिक से अधिक रिफंड का वायदा करते हैं।  एक सीए ने कहा, 'अपने क्लाइंट की ओर से रिटर्न दाखिल करते समय ऐसे सीए उन कटौतियों का भी दावा कर डालते हैं, जिनके लिए वह व्यक्ति योग्य ही नहीं है। खुद को बचाने के लिए वे क्लाइंट से हलफनामा भी पहले ही लिखा लेते हैं। आखिर में पकड़े गए तो क्लाइंट यानी करदाता को ही मार झेलनी पड़ती है।' उन्होंने यह भी कहा कि आयकर विभाग ऐसे फर्जीवाड़े वाले रिटर्न पर नजर रख रहा है।
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