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रिजर्व बैंक ने रीपो दर बढ़ाई, अब कैसे संभालें अपनी ईएमआई

जयदीप घोष और संजय कुमार सिंह |  Jun 10, 2018 08:28 PM IST

बैंकों में रकम जमा करने वालों के लिए यह खुश होने का वक्त है, लेकिन जिन्होंने कर्ज लिया है या ले रहे हैं, उनको थोड़ा संभलना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को रीपो दर में 25 आधार अंक का इजाफा किया। उसने चार साल में पहली बार दर में इजाफा किया है और माना जा रहा है कि बैंक भी जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाएंगे। ब्याज दरों में इजाफे के संकेत भी पिछले कुछ महीनों से मिल ही रहे हैं। इस साल मार्च से ही बैंक अपनी जमा और उधारी दरों में इजाफा करते आ रहे हैं। इजाफा थोड़ा-थोड़ा ही सही, लेकिन लगातार हो रहा है। इस महीने के पहले ही दिन भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉर्पोरेशन (एचडीएफसी) ने उधारी दरों में बढ़ोतरी की थी। कोटक महिंद्रा बैंक की अध्यक्ष - उपभोक्ता बैंकिंग शांति एकांबरम कहती हैं, 'कर्ज की मांग बढऩे के कारण और बैंकिंग प्रणाली में नकदी की हालत तंग होने के कारण पिछले 45 से 60 दिनों में बैंक दरों में लगातार इजाफा करते आ रहे हैं। धन की मांग और आपूर्ति के हिसाब से ऐसा चलता रहेगा।'

 
अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेख को लगता है कि बैंक दरों में अभी और इजाफा करेंगे। वह कहते हैं, 'प्रणाली के भीतर नकदी या तरलता की दिक्कत बैंकिग क्षेत्र के लिए रकम की लागत पर चोट करेगी। इसलिए बैंकों को जमा दरें बढ़ानी पड़ेंगी और उसके बाद उधारी दरें भी बढ़ेंगी।'
 
बैंकिग में तरलता कम
 
विशेषज्ञों को लगता है कि जमा में वृद्घि ही दिक्कत का सबब रही है। रिजर्व बैंक की वेबसाइट के मुताबिक 2017-18 में कुल जमा में केवल 6.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो पांच दशकों की सबसे कम वृद्घि थी। पारेख कहते हैं कि बैंक अपने यहां जमा आकर्षित कर ही नहीं पा रहे हैं क्योंकि बाजार की हालत इस समय काफी अच्छी है और उसका फायदा उठाने के लिए निवेशक बैंक जमा के बजाय म्युचुअल फंड में रकम लगा रहे हैं। एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ को भी लगता है कि दरों में वृद्घि का चक्र शायद अब शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा, 'मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता जा रहा है और रिजर्व बैंक ने महंगाई का जो अनुमान लगाया था, आंकड़े शायद उससे भी ऊपर निकल जाएंगे। ऐसे में हमें लगता है कि दरों में वृद्घि का चक्र यहां से शुरू हो रहा है।' बरुआ के हिसाब से इस साल के अंत तक रीपो दर में कम से कम एक बार इजाफा और किया जा सकता है और वह इजाफा भी 25 आधार अंक का होगा।
 
एफडी वालों की मौज
 
बहरहाल जमाकर्ताओं के लिए रिजर्व बैंक ने अच्छा पैगाम दिया है क्योंकि दरों में इजाफा होने पर उनकी सावधि जमा (एफडी) भी उन्हें पहले से ज्याद प्रतिफल देगी। लेकिन एक खटका उनके लिए भी है और वह है महंगाई। महंगाई लगातार बढ़ रही है, इसलिए प्रतिफल में वास्तविक इजाफा शायद उतना नहीं हो, जितना इस वृद्घि के बाद होना चाहिए था। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि कम अवधि की जमा में रकम लगानी चाहिए। जमा 6 महीने से ज्यादा की नहीं हो ताकि यदि भविष्य में दरें बढ़ती हैं तो अपनी मौजूदा एफडी पूरी होने पर आप ज्यादा ब्याज दर वाली एफडी करा सकें और फायदा उठा सकें।
 
ईएमआई पर चोट
 
उधार लेने वालों को इस खबर ने जरूर चोट पहुंचाई होगी क्योंकि उनकी जेब पर इसका झटका लगेगा। हालांकि अगर आप पहले ही कर्ज ले चुके हैं और आपके बैंक ने सीमांत लागत उधारी दर (एमसीएलआर) बढ़ा दी है तो आपकी मासिक किस्त में फौरन इजाफा शायद नहीं होगा। उसमें इजाफा तभी होगा, जब आपकी एमसीएलआर में बदलाव किया जाएगा। इसलिए अगर आपका कर्ज लंबी अवधि की (मान लीजिए छह महीने की) एमसीएलआर से जुड़ा है तो आपको इस बार की दर वृद्घि का असर बाद में महसूस होगा। लेकिन कम अवधि (जैसे एक महीने) की एमसीएलआर से जुड़े कर्ज वालों की ईएमआई जल्दी बढ़ जाएगी। हालांकि किस्त आज बढ़े या कल, बढ़ेगी जरूर क्योंकि अर्थव्यवस्था में ब्याज दर ऊंची होने पर आपकी ब्याज दर ऊंची होना भी लाजिमी है।
 
फिर बचें कैसे
 
ऊंची ब्याज दरों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कर्ज के मूलधन का कुछ हिस्सा समय-समय पर चुकाते रहना यानी प्रीपेमेंट करना। बैंकबाजार डॉट कॉम के सह-संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी आदिल शेट्टïी कहते हैं, 'जिनका कर्ज अभी शुरू ही हुआ है, उनके लिए यह खास तौर पर अच्छा कदम रहेगा।' कर्ज लेने के बाद शुरुआती दौर में आपकी मासिक किस्त में बड़ा हिस्सा ब्याज का होता है। अगर आप कुछ प्रीपेमेंट कर देते हैं तो ब्याज के मद में जाने वाली रकम को आप पहले जितना बनाए रख सकते हैं या कम कर सकते हैं। लेकिन जिनका कर्ज पूरा होने वाला है, उन्हें कुछ नहीं करना चाहिए। उन्हें कर्ज की अवधि पूरी करनी चाहिए और बदले में कर में मिलने वाली छूट का फायदा उठाना चाहिए। अंत में अपने कर्ज की ब्याज दर देखिए और बाजार में अगर उससे कम दर मिल रही है तो कर्ज वहां ट्रांसफर कर लीजिए।
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