अंबे वैली नीलामी : पुणे पुलिस को सहारा के पत्र से उच्चतम न्यायालय खफा

भाषा | नई दिल्‍ली Oct 12, 2017 05:59 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह द्वारा अंबे वैली में अपनी सपंत्ति के बारे में कानून व्यवस्था की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए पुणे पुलिस को पत्र लिखने पर आज कड़ी आपत्ति जताई। शीर्ष अदालत के आदेश पर इस संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में सेबी के आरोपों का संज्ञान लेते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एके सिकरी की तीन सदस्‍यी खंडपीठ ने कहा कि सहारा समूह को इस मामले में पुणे के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को इस तरह का पत्र नहीं लिखना चाहिए था, क्योंकि नीलामी का आदेश शीर्ष अदालत ने दिया है। पीठ ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि यह संपत्ति 48 घंटे के भीतर बंबई उच्च न्यायालय के आधिकारिक परिसमापक को सौंपी जाए। पीठ ने कहा, यदि नीलामी की प्रक्रिया में कोई भी किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न करेगा तो वह अवमानना कार्रवाई का जिम्मेदार होगा और उसे जेल भेजा जाएगा।

शीर्ष अदालत ने आधिकारिक परिसमापक को कंपनी न्यायाधीश की सीधे देखरेख में नीलामी प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि आधिकारिक परिसमापक इस मामले में बंबई उच्च न्यायलय के पीठासीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएस ओका से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे। इससे पहले सेबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने पुलिस अधीक्षक को भेजे गए पत्र का जिक्र किया और दावा किया कि इसकी वजह से पुलिस ने इस संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया है। सहारा समूह की ओर से मुकुल रोहतगी ने इस तर्क का जवाब देते हुए कहा कि संपत्ति पुलिस को नहीं सौंपी गई है और न्यायालय को प्रभावित करने के लिए ही पूरी तरह से गलत बयान दिया जा रहा है। पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह इस समय अवमानना कार्रवाई शुरू नहीं कर रही है। शीर्ष अदालत सहारा समूह के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के लिए सेबी के आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। सेबी का आरोप है कि समूह अंबे वैली की नीलामी प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है।

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