निजता कानून से बदलाव का मौका!

रोमिता मजूमदार और अलनूर पीर मोहम्मद |  May 28, 2018 12:01 PM IST

यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों में पिछले हफ्ते सामान्य डेटा संरक्षण नियमन (जीडीपीआर) कानून प्रभावी हो गया है और इन देशों में कारोबारी हित वाली भारतीय कंपनियां अपनी लय बरकरार रखने के लिए काफी समय खर्च कर रही हैं। सूचना-तकनीक (आईटी) कंपनियों के लिए उत्तरी अमेरिका के बाद यूरोप दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और यह जीडीपीआर नियमों के तहत खुद को तैयार कर रही हैं।

क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाता कंपनियां एक कदम आगे बढ़ते हुए केवल यूरोप के बजाय दूसरे देशों के लिए भी अपने उत्पाद जीडीपीआर के अनुरूप बना रही हैं। यूरोपीय ग्राहकों को सेवा देने वाली भारतीय कंपनियों पर जीडीपीआर नियम असर डाल रहा है। हालांकि फ्रेशवर्क और इका सॉप्टवेयर जैसी कंपनियों ने अपना प्लेटफॉर्म नए वैश्विक नियमों के अनुरूप बनाया है।

कमोडिटी प्रबंधन सॉफ्टवेयर समाधान सेवा प्रदाता कंपनी इका सॉफ्टवेयर के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी मानव गर्ग कहते हैं, 'हमने पूरा प्लेटफॉर्म जीडीपीआर के हिसाब से तैयार कर लिया है। हालांकि यह कानून केवल यूरोपीय कंपनियों और उपभोक्ताओं पर ही लागू होता है, लेकिन हमारे कई ऐसे अमेरिकी ग्राहक हैं जिनका कारोबार यूरोप में भी है।'

गर्ग कहते हैं, 'हम जानते हैं कि जीडीपीआर जैसे निजता संबंधी कानून सभी जगह कभी ना कभी आने ही हैं। इंतजार करने के बजाए क्यों ना अभी इनसे जुड़े बेहतरीन नियमों को लागू किया जाए।' इसी तरह, क्लाउड आधारित कारोबारी सेवा प्रदाता फ्रेशवर्क कंपनी ने भी अपनी सभी इकाइयों को जीडीपीआर के अनुरूप ढ़ाल लिया है।

फ्रेशवर्क में प्रोग्राम मैनेजर गौरव कुलकर्णी कहते हैं, 'हम डेटा प्रसंस्करण से जुड़े हैं और हो सकता है कि हम ऐसी अमेरिकी कंपनियों के साथ कारोबार कर रहे हों, जिनके कर्मचारी या उपभोक्ता यूरोपीय नागरिक हों। ऐसे मामले में हमारे ग्राहक भी जीडीपीआर के दायरे में आएंगे।' टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसी बड़ी भारतीय आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों में से अधिकांश पहले से ही यूरोपीय डेटा निजता कानून को अपना रही हैं।

उनकी कोशिश है कि विक्रेता और आपूर्तिकर्ता भी इनका पालन करें। भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टीसीएस ने जीडीपीआर और दूसरे डेटा संरक्षण नियमों को सुनिश्चित करने के लिए अलग से एक इकाई बनाई है। टेक महिंद्रा जीडीपीआर नियमों के तहत काम करने के लिए इजराइल आधारित साइबर सुरक्षा इकाई के साथ काम कर रही है, और इन नियमों को अपनाने के लिए उपभोक्ताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं को भी सहायता प्रदान कर रही है। विप्रो, इन्फोसिस और एलऐंडटी के यूरोपीय ग्राहकों की संख्या काफी अधिक है और जीडीपीआर नियमों को लागू करने से लाभ होगा।

भारतीय नागरिकों के लिए निहितार्थ
हालांकि जीडीपीआर नियम यूरोपीय देशों के लिए ही लागू है लेकिन इसके तहत वहां के निवासी ही नहीं, वरन लाखों गैर-यूरोपीय यूनियन निवासी, जैसे विद्यार्थी, यात्री और कार्यरत कर्मचारी भी आते हैं। इसका अर्थ है कि इन देशों से गुजरने वाले भारतीय भी जीडीपीआर के तहत आएंगे।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बैंक अपने डेटा प्रबंधन के लिए वैश्विक मानकों का पालन करते हैं, लेकिन उन्हें कई बार क्षेत्र विशेष संबंधी कानूनों का भी पालन करना पड़ता है, जैसे भारत में प्रस्तावित डेटा निजता और संरक्षण विधेयक। अगर दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियां किसी यूरोपीय नागरिक की जानकारी ले रही हैं, तो उन्हें जीडीपीआर नियमों का पालन करना होगा। अंतिम उपभोक्ता के आधार पर कंपनियों को अपनी सेवा या उत्पाद को जांचना होगा। 

 
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