भारतीय शेयर बाजार में बढ़ रहा कनाडा, जापान का निवेश

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Aug 24, 2017 10:11 PM IST

भारत की दीर्घावधि वृद्धि संभावना और स्थिर राजनैतिक माहौल के मद्देनजर कई देशों के निवेशक यहां अपना दांव बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि कनाडा पिछले एक साल के दौरान सूचीबद्ध भारतीय शेयरों में कनाडाई निवेशकों की शेयरधारिता बढ़कर दोगुनी हो गई। हालांकि ऐतिहासिक तौर पर कनाडा के निवेशकों ने कभी भी भारतीय शेयर बाजार में बड़ा निवेश नहीं किया है। लेकिन कनाडा अब भारत में सातवां सबसे बड़ा निवेशक बन चुका है और नॉर्वे, ब्रिटेन और लग्जमबर्ग को पछाड़कर शीर्ष पांच निवेशकों की सूची में शामिल होने के कगार पर है।
प्राइम डेटाबेस द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक भारतीय शेयर बाजार में कनाडाई निवेशकों की शेयरधाररिता बढ़कर 17,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई जो एक साल पहले 8,541 करोड़ रुपये रही थी। जबकि 2009 में कनाडा के निवेशकों की शेयरधारिता महज 150 करोड़ रुपये रहा था। प्राइम डेटाबेस द्वारा सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 1 फीसदी हिस्सेदारी वाले निवेशकों के शेयरधारिता आंकड़े को जुटाया गया।
जून में समाप्त पिछले एक साल के दौरान बीएसई सेंसेक्स में 14.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और पिछले आठ वर्ष के दौरान उसमें दोगुना वृद्धि दर्ज की गई।
भारत उभरते बाजारों के बीच एक चमकता सितारा दिख रहा है और यहां की राजनैतिक स्थिरता, जनतांत्रिक व्यवस्था और वृद्धि संभावनाएं इसे दीर्घावधि निवेश के लिहाज से एक सुरक्षित जगह बनाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्टï्रीय स्तर पर एक दशक पहले के मुकाबले अब कहीं अधिक तवज्जो दिया जाता है। इससे भारत में कई देशों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
कनाडा के प्रमुख निवेशकों में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (सीपीपीआईबी) और कैस डे डेपो एट प्लेसमेंट डु क्यूबेक (सीडीपीक्यू) शामिल हैं। जून के अंत तक उनकी एकीकृत शेयरधारिता का मूल्य 15,600 करोड़ रुपये है। अन्य प्रमुख निवेशकों में ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान और मावेर इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट शामिल हैं।
सीपीपीआईबी के एशिया प्रशांत प्रमुख सूई किम ने कहा, 'भारत के आर्थिक फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं और पिछले कुछ वर्षों से हम अर्थव्यवस्था में लगातार वृद्धि देख रहे हैं। हमारा मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक वृद्धि का एक प्रमुख स्रोत होगा और सीपीपीआईबी जैसे दीर्घावधि निवेशकों के लिए वहां आकर्षक संभावनाएं लगातार बरकरार रहेंगी।'
सीडीपीक्यू ने इस बाबत जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।
डाल्टन कैपिटल एडवाजर्स (इंडिया) के प्रबंध निदेशक यूआर भट्टï के अनुसार, भारत को अब उभरते बाजारों का महज एक सदस्य के बजाय मुख्य निवेश गंतव्य के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, 'यहां के बाजार का आकार पर्याप्त रूप से बड़ा है, मुद्रा एवं वित्तीय स्थिति स्थिर है और राजनैतिक तौर पर देश अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले कहीं अधिक स्थिर है।'
जापान के निवेशकों की शेयरधारिता भी जून के अंत तक पिछले एक साल के दौरान पांच गुना बढ़कर 5,014 करोड़ रुपये हो गया जिससे वह भारतीय शेयर बाजार के शीर्ष 10 निवेशकों में शामिल हो गया। अमेरिका, मॉरिशस, सिंगापुर, लग्जगमबर्ग और ब्रिटेन भारतीय शेयर बाजार के शीर्ष निवेश बने हुए हैं। भारतीय शेयर बाजार में अमेरिका और मॉरिशस की एकीकृत शेयरधारिता करीब 3 लाख करोड़ रुपये की है जबकि सिंगापुर, लग्जमबर्ग और ब्रिटेन की कुल शेयरधारिता 1.25 लाख करोड़ रुपये है।

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