योजनाओं के विलय नियम पर म्युचुअल फंडों को संशय

चंदन किशोर कांत | मुंबई Aug 29, 2017 09:41 PM IST

देश के 20 लाख करोड़ रुपये वाले म्युचुअल फंड उद्योग को योजनाओं के विलय पर नए नियम का डर सता रहा है। सेबी की तरफ से नियुक्त म्युचुअल फंड सलाहकार समिति की बैठक शुक्रवार को इस संभावना के साथ हो रही है कि फंड हाउस अब एक ही श्रेणी की विभिन्न योजनाओं को शायद जारी नहीं रख पाएंगे। अभी 40 म्युचुअल फंड हाउस करीब 2,042 म्युचुअल फंड योजनाओं की पेशकश कर रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि एक फंड हाउस औसतन 50 योजनाओंं की पेशकश कर रहे हैं। नियामक का मानना है कि निवेशकों को समझने, उनमें विभेद करने और उनमें से चुनने के लिहाज से काफी ज्यादा योजनाएं हैं। इसका यह भी मानना है कि एक ही श्रेणी में कई योजनाएं हैं, ऐसे में निवेशक भ्रमित होते हैं।
 
वरिष्ठ अधिकारी इससे सहमत हैं कि इस बारे में म्युचुअल फंड को पर्याप्त समय दिए गए थे। मध्यम आकार के एक फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, सेबी कई साल से इस बारे में सुझाव दे रहा था, विनम्रता के साथ, लेकिन इस क्षेत्र ने उम्मीद के मुताबिक बहुत कुछ नहीं किया। अब उन्हें परिणाम भुगतना होगा और इसका आरोप हम पर लगाया जाएगा। एक अन्य सीईओ ने कहा, अगर ऐसा फैसला होता है तो इसका मतलब योजनाओं का एकीकरण होगा, जो कुछ फंड हाउस के लिए अच्छा होगा जबकि अन्य के लिए मुश्किल भरा। खास तौर से उन्हें परेशानी होगी जिनकी एक ही श्रेणी में कई योजनाएं हैं।
 
उनके मुताबिक, निवेशकों व वितरकों को मुख्य रूप से फायदा होगा। निवेशकों के सामने स्पष्ट हो जाएगा कि योजनाएं क्या हैं और वितरकों के पास विश्लेषण के लिए कम योजनाएं होंगी और वे इसे निवेशकों तक आगे बढ़ा पाएंगे। हालांकि जब म्युचुअल फंडों के वितरण और विपणन की बात आती है तो क्षेत्र के अधिकारी व स्वतंत्र विश्लेषक किसी तरह के असर से इनकार करते हैं। एक बड़े फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, योजनाओं के एकीकरण से म्युचुअल फंडों के वितरण व विपणन पर असर नहीं पड़ेगा। इसकी बजाय यह गहराएगा क्योंकि इससे पेशकश घटेगी। हां, फंड प्रबंधन शुल्क में बदलाव हो सकता है। लेकिन इस पर अभी बात करना जल्दबाजी होगी।
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