'दिवालिया प्रक्रिया के लिए दिसंबर की समय-सीमा पर कायम रहें बैंक'

अनूप रॉय और अभिजीत लेले | मुंबई Aug 31, 2017 09:56 PM IST

सूत्रों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को अपने सबसे बड़ी गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) पर दिवालिया प्रक्रिया पूरा करने के लिए दिसंबर की समय-सीमा पर कायम रहने का निर्देश दिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि जून में सामने आए 12 नामों के अलावा उन कंपनियों के खिलाफ भी इस प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जाना चाहिए जो इसी तरह के परिचालन (फंसे कर्ज से संबंधित) के विभिन्न चरणों से जूझ रही हैं। विभिन्न बैंकों के वरिष्ठï अधिकारियों का कहना है कि डिफॉल्टरों के लिए प्रत्येक बैंक के कर्ज के आधार पर अलग अलग बैंकों के लिए अलग सूची तैयार की गई है, लेकिन इसके लिए कोई एक समान सूची नहीं है। 
 
बैंकरों का कहना है कि उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 30 खातों, पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) को 20 खातों, आईडीबीआई बैंक को 15-20 नामों और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 10 नामों की सूची मिली है। सूचियों में कई खाते एक समान हैं, क्योंकि उन्हें ऋणदाताओं के कंसोर्टियम द्वारा ऋण दिए गए थे। 13 जून को आरबीआई ने कहा था कि प्रमुख 12 खाते कम से कम 5,000 करोड़ रुपये (प्रत्येक) के फंसे कर्ज वाले हैं और उन्हें तुरंत दिवालिया कार्यवाही के लिए भेजा जाना चाहिए। केंद्रीय बैंक की आंतरिक सलाहकार समिति (आईएसी) ने 500 खातों की सूची तैयार की थी और बैंकों से 6 महीने के अंदर शेष 488 खातों के लिए समाधान योजना तैयार करने को कहा था। केंद्रीय बैंक ने ने जून में कहा था, 'जहां तक उन अन्य एनपीए खातों का सवाल है जो उपर्युक्त मानक (5000 करोड़ रुपये) के तहत नहीं आते, उनके लिए आईएसी ने सुझाव दिया है कि बैंकों को 6 महीने के अंदर रिजोल्यूशन प्लान को अंतिम रूप देना चाहिए। 
 
उन मामलों में जिनमें उचित रिजोल्यूशन प्लान 6 महीने के अंदर तैयार नहीं हो पाता है तो बैंकों को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया के लिए आवेदन करने की जरूरत होगी।' 6 महीने की अवधि दिसंबर में समाप्त हो रही है। बैंकरों का कहना है कि नई सूचना इसी समय-सीमा का 'रिमाइंडर' है। बैंकों के फंसे कर्ज का आंकड़ा लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का है। फंसे कर्ज से जुड़ी कंपनियां औद्योगिक घरानों समेत विभिन्न क्षेत्रों से हैं। बैंकों का कहना है कि कई मामलों में पुनर्गठन योजनाओं पर काम चल रहा है। ताजा परामर्श में बैंकों से इस प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। 
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