बीमा कंपनियों की बड़ी बिकवाली

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Sep 04, 2017 10:05 PM IST

देसी बीमा कंपनियों ने लगातार आठवें महीने अगस्त में शेयरों की भारी बिकवाली की है और इस साल अब तक उनकी शुद्ध बिक्री 4 अरब डॉलर के पार (25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) निकल गई है। यह देसी म्युचुअल फंडों के निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की तरफ से खरीदारी के उलट है, जो इस साल अब तक भारतीय शेयरों के शुद्ध खरीदार रहे हैं।
 
विदेशी संस्थागत निवेशकों के अलावा बीमा कंपनियां भारतीय शेयरों को आगे बढ़ाने में अहम रही हैं। विगत में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम ने तीव्र गिरावट के मुकाबले बाजार को आगे बढ़ाने में मदद की है। इस साल अब तक बेंचमार्क सेंसेक्स 19 फीसदी चढ़ा है। इस अवधि में एफपीआई ने 7.1 अरब डॉलर की शुद्ध खरीदारी की है जबकि म्युचुअल फंडों ने 10.8 अरब डॉलर के शेयर खरीदे हैं। दूसरी ओर बीमा कंपनियों ने 4.3 अरब डॉलर की बिकवाली की है।
 
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय शेयर महंगे हो गए हैं। साथ ही हाल में हुआ निवेश निवेशकों की तरफ से रकम निकासी के अनुरोध के साथ हुआ है, खास तौर से यूलिप्स में। फ्यूचर जेनराली लाइफ इंश्योरेंस की मुख्य निवेश अधिकारी ज्योति वासवानी ने कहा, यूलिप के निवेशकोंं में लॉक इन अवधि समाप्त होने के बाद निकासी की प्रवृत्ति होती है, खास तौर से तब जबकि बाजार उच्च स्तर पर हो। हालांकि बीमा कंपनियां सतर्क रही हैं क्योंकि भारतीय इक्विटी बाजार में पिछले कुछ महीनों में खासी तेजी दर्ज हुई है। जीडीपी के हालिया आंकड़े और कंपनियों की आय अनुमान से कम रहने के चलते इन स्तरों पर आक्रामकता के साथ खरीदारी का परिदृश्य धुंधला नजर आ रहा है।
 
यूलिप योजनाओं में संपत्तियों का आवंटन एक ग्राहक से दूसरे ग्राहकों का अलग होता है, लेकिन मोटे तौर पर करीब 75 फीसदी का निवेश शेयरों में होता है। पारंपरिक योजनाएं मसलन टर्म, एन्डॉमेंट और पूर्ण जीवन बीमा पॉलिसी लंबी अवधि के होती हैं और शेयरों में 5 से 20 फीसदी का निवेश किया है। ये योजनाएं निवेशकों के मुकाबले फंड मैनेजरों की तरफ से ज्यादा आगे बढ़ाई गई हैं।
 
सूत्रों ने कहा, एक अन्य वजह यह हो सकती है कि इस वित्त वर्ष के सरकारी विनिवेश कार्यक्रम के लिए एलआईसी अपने हाथ शायद सख्त किए हुए है। बीमा दिग्गज ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 40,000 करोड़ रुपये निवेश किया था और मोटे तौर पर यह हर साल शेयर निवेश में करीब 15 फीसदी का इजाफा करती है। वित्त वर्ष 2018 में विनिवेश के जरिए सरकार का इरादा 72,000 करोड़ रुपये हासिल करने का है, जिसमें अल्पांश बिक्री, रणनीतिक निवेश और सरकारी बीमा कंपनियों की सूचीबद्धता शामिल है।
 
देसी संस्थागत इक्विटी निवेश में बढ़ोतरी ने भारतीय इक्विटी बाजार को अलग करना शुरू कर दिया है, जो मोटे तौर पर अब तक विदेशी निवेश की धार से तय होता था। ऐतिहासिक तौर पर एफपीआई बाजार में कीमत तय करने के मामले में वर्चस्व की स्थिति में रहे हैं क्योंकि उनका निवेश आदि ज्यादा रहा है। पिछले कुछ सालों में बदलाव के संकेत मिले हैं और देसी संस्थागत निवेशकों का निवेश बढ़ा है और ये बाजार को दिशा देने लगे हैं। इक्विटी म्युचुअल फंड की योजनाओं में एसआईपी के जरिए रिकॉर्ड निवेश खास तौर से उत्साहजनक रहे हैं। मासिक एसआईपी निवेश 4,000 करोड़ रुपये के पार निकल गया है। इस साल जुलाई तक म्युचुअल फंडों ने 50,000 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हासिल किया है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों से मिली।
कीवर्ड insurance, बीमा पॉलिसी यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप),

  
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