पीएसयू के ऋणपत्रों में डेट एमएफ ने घटाया निवेश

चंदन किशोर कांत | मुंबई Sep 06, 2017 10:09 PM IST

डेट म्युचुअल फंडों ने सरकारी कंपनियों की तरफ से जारी ऋणपत्रों में अपना निवेश अप्रैल से अब तक करीब 200 आधार अंक घटा दिया है। यह प्रगति कुछ सरकारी संस्थानों खास तौर से बैंकों की नरम होती वित्तीय सेहत के बीच हुई है। मार्च के आखिर में पीएसयू बॉन्डों व ऋणपत्रों में निवेश 1.33 लाख करोड़ रुपये था यानी कुल प्रबंधनाधीन ऋण परिसंपत्तियों का 11.7 फीसदी। जुलाई तक फंड मैनेजरों ने इसे घटाकर 1.26 लाख करोड़ रुपये पर ला दिया, जो कुल एयूएम का 9.9 फीसदी बैठता है।
 
दूसरी ओर डेट फंडों ने अपने पोर्टफोलियो में कुछ और सरकारी प्रतिभूतियां जोड़ी है। अप्रैल से अब तक फंड मैनेजरों ने सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद बढ़ाई है और आवंटन 1.33 लाख करोड़ रुपये यानी 10.45 फीसदी पर पहुंचा दिया है जो अप्रैल में 1.13 लाख करोड़ रुपये यानी 8.9 फीसदी रहा था। पीयरलेस म्युचुअल फंड के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) के. पांड्या ने कहा, नोटबंदी के दौरान बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों की तरफ आकर्षित होते देखा गया था। फंड मैनेजरों को शायद लगा होगा कि सरकारी प्रतिभूतियों में और तेजी की गुंजाइश है, लिहाजा वे इसमें निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हुए। कुछ महीने पहले तक फंड मैनेजर सरकारी प्रतिभूतियों में अपना निवेश घटा रहे थे। अब इनके पोर्टफोलियो में कॉरपोरेट बॉन्डों का अनुपात शायद और घट सकता है, वहीं सरकारी प्रतिभूतियों में इनका निवेश बढ़ सकता है। यह जानकारी एक सूत्र ने दी।
 
मध्यम आकार वाले फंड हाउस के डेट फंड मैनेजर ने कहा, सरकारी प्रतिभूतियां डिफॉल्ट के जोखिम को कम करने में मदद करती हैं। इसकी आपूर्ति में अवरोध है क्योंकि सरकार इसके जरिए रकम नहीं जुटा रही है। इसके बजाय वह सरकारी कंपनियों को बॉन्ड जारी करने को कह रही है। इस वजह से सरकारी प्रतिभूतियां एक बार फिर आकर्षक हो गई हैं। हाल के वर्षों में फंडों की ऋण श्रेणियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। पिछले एक साल में उनका औसत रिटर्न 6.5 फीसदी से 10 फीसदी के बीच रहा है, जो बैंकों की सावधि जमाओं में मिल रहे रिटर्न के मुकाबले ज्यादा है। 
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