बैलेंस्ड फंडों की कार्य प्रणाली बदल सकता है सेबी

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Sep 20, 2017 09:48 PM IST

बाजार नियामक सेबी द्वारा म्युचुअल फंड योजनाओं के श्रेणी वर्गीकरण को आसान बनाने की प्रस्तावित पहल से बैलेंस्ड फंडों की परिभाषा में बड़ा बदलाव आ सकता है। सेबी ने पिछले कुछ वर्षों में बैलेंस्ड फंडों को स्वीकृति देने में सुस्ती दिखाई है और नई योजना की मंजूरी के लिए वह 50:50 इक्विटी-टू-डेट अनुपात पर अड़ा रहा है। मौजूदा समय में बैलेंस्ड फंडों की कोई मानक परिभाषा नहीं है। कई फंड हाउस ऐसी बैलेस्ंड योजनाओं की पेशकश पहले ही कर चुके हैं जो 65 प्रतिशत या इससे भी अधिक के इक्विटी आवंटन से जुड़ी हुई हैं। इससे उन्हें इन योजनाओं को इक्विटी योजना के तौर पर वर्गीकृत करने में मदद मिलती है, जिन पर कर लाभ का भी फायदा मिलता है। 
 
म्युचुअल फंड क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि चूंकि ज्यादातर डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड 70-100 प्रतिशत इक्विटी निवेश की पेशकश करते हैं इसलिए नियामक का मानना है कि बैलेंस्ड फंड द्वारा 65-75 फीसदी की पेशकश बड़ा अंतर नहीं है। वहीं फंड हाउसों ने बैलेंस्ड योजनाओं को 50:50 अनुपात के साथ शुरू करने को लेकर अनिच्छा जताई है, क्योंकि योजनाएं उन पुरानी बैलेंस्ड योजनाओं के मुकाबले प्रदर्शन नहीं कर पाएंगी जिनमें अधिक इक्विटी आवंटन की पेशकश की गई हो। फंड अधिकारी इसे लेकर चिंतित हैं कि बैलेंस्ड श्रेणी में पूंजी प्रवाह अधिक इक्विटी आवंटन वाली पुरानी बैलेंस्ड योजनाओं की तरफ मुड़ जाएगा।
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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