अनधिकृत कारोबार पर नियामक और सख्त

बीएस संवाददाता | मुंबई Sep 26, 2017 09:30 PM IST

अनधिकृत कारोबार पर लगाम कसने के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने ब्रोकरों को निर्देश दिया है कि वह क्लाइंट की तरफ से दिए जाने वाले ऑर्डर के संबंध में अपने पास सबूत रखें। अनधिकृत कारोबार के तहत किसी क्लाइंट के बदले ब्रोकर खुद ही खरीद या बिक्री का ऑर्डर देते हैं और इसमें क्लाइंट की तरफ से न तो निर्देश दिया गया होता है और न ही ऐसा करने के लिए उन्हें अधिकृत किया गया होता है।
 
बाजार नियामक ने कहा कि ये सबूत फिजिकल लिखित रिकॉर्ड और क्लाइंट की तरफ से हस्ताक्षरित, फोन के रिकॉर्ड, पंजीकृत ईमेल के जरिए निर्देश, इंटरनेट लेनदेन के लिए लॉग-इन, रिकॉर्ड मोबाइल संदेश या कानूनी तौर पर सत्यापन किए जाने वाले अन्य रिकॉर्ड के तौर पर हो सकते हैं। सेबी ने एक परिपत्र में कहा, जब विवाद पैदा होगा तो ऐसे कारोबार के मामले में इस तरह के सबूत के रिकॉर्ड सामने रखने की जिम्मेदारी ब्रोकरों की होगी। कई क्लाइंट ब्रोकरों को अपने खाते तक पहुंचने और उनके बदले कारोबार की अनुमति देते हैं। इसके चलते कई अस्पष्ट कारोबार होते हैं। सेबी ने कहा कि अनधिकृत कारोबारों से संबंधित कई शिकायतें निवेशकों से मिली है।
 
बाजार नियामक ने कहा, विगत में सेबी ऐसे कारोबार पर लगाम कसने के लिए कई कदम उठा चुका है। ऐसा पाया गया कि कदम उठाए जाने के बाद भी कई निवेशकों ने अनधिकृत कारोबार की शिकायत की है। ब्रोकरों ने कहा कि हमेशा उनकी तरफ से ही गलती नहीं होती। एक देसी ब्रोकिंग फर्म के अधिकारी ने कहा, कुछ क्लाइंट हमें अपने खाते के परिचालन की अनुमति देते हैं और नुकसान के समय वे कारोबार को विवादित बनाने की कोशिश करते हैं और सेबी के पास शिकायत कर देते हैं। अब जारी निर्देश से ब्रोकिंग समुदाय व निवेशक दोनोंं को मदद मिलेगी। हालांकि समय और अनुपालन की लागत में बढ़ोतरी हो जाएगी। मौजूदा नियामकीय ढांचे के तहत डेरिवेटिव मार्केट के ब्रोकरों को क्लाइंट की तरफ से दिए गए ऑर्डर का सबूत रखना होता है। हालांकि इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव और करेंसी डेरिवेटिव में इस तरह की जरूरत नहीं होती। सेबी ने कहा कि इस तरह के निर्देश से अनधिकृत कारोबार के खिलाफ नियामकीय प्रावधान और मजबूत हो जाएंगे।
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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