निर्यातकों की मदद के लिए बनाया जाएगा कोष!

दिलाशा सेठ |  Sep 27, 2017 09:37 PM IST

सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत निर्यातकों की नकदी की चिंता को दूर करने के उपाय पर विचार कर रही है। सरकार निर्यातकों द्वारा कच्चे माल पर चुकाए गए कर के रिफंड में तेजी लाने और उसे समय पर चुकाने के लिए एक  कोष बनाने का विचार कर रही है। इनपुट टैक्स क्रेडिट के चक्र की अवधि को कम करने और निर्यातकों की कार्यशील पूंजी की जरूरतों को देखते हुए 20,000 से 30,000 करोड़ रुपये के कोष पर विचार हो रहा है। सरकार के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'पहले से ही दबाव में चल रहे निर्यातकों की मदद और उनकी नकदी की किल्लत को दूर करने के लिए कोष बनाने पर फिलहाल शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है।'
 
उन्होंने कहा कि इस मसले पर राजस्व सचिव हसमुख अढिया के नेतृत्व वाली समिति की पिछले हफ्ते हुई बैठक में चर्चा की गई थी। इस समिति का गठन जीएसटी को लेकर निर्यातकों की चिंता दूर करने के लिए किया गया था। अगर समिति इसकी मंजूरी देती है तो प्रस्ताव को जीएसटी परिषद के पास भेजा जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली वीडियो कॉन्फ्रें सिंग के माध्यम से अगले हफ्ते जीएसटी परिषद की बैठक में शामिल होंगे।
 
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोटर््स ऑर्गेनाइजेशन के अजय सहाय ने कहा कि इस तरह के कोष से 90 प्रतिशत निर्यातकों की समस्या दूर हो जाएगी। सहाय ने कहा, 'हमने रिफंड के मकसद से इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट सुविधा का सुझाव दिया था। लेकिन इसमें समय लग सकता है क्योंकि जीएसटी नेटवर्क पर पहले से ही काफी दबाव है।' रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा बढ़ाने से भी निर्यातकों की चिंता बढ़ रही है क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी कार्यशील पूंजी लंबे समय के लिए अटक सकती है। ऐसे में समर्पित कोष से उन्हें मदद मिल सकती है। इसके अलावा बुनियादी सीमा शुल्क के तहत नहीं आने वाले आयातित इनपुट पर एकीकृत जीएसटी से पूरी तरह छूट देने के विकल्प पर भी सक्रियता से विचार किया जा रहा है। निर्यातकों को आयातित वस्तुओं पर आईजीएसटी का भुगतान करना पड़ता है और बाद में उन्हें जीएसटी के तहत रिफंड का दावा करना होता है।
 
निर्यातकों की समस्या के समाधान पर विचार अर्थव्यवस्था को गति देने एवं रोजगार सृजन को ध्यान में रखकर भी है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्घि दर घटर तीन साल के निचले स्तर 5.6 फीसदी पर आ गई है। निर्यातकों ने जुलाई-अक्टूबर की अवधि के लिए 65,000 करोड़ रुपये रिफंड का दावा किया है जो अटका हुआ है। निर्यातक समिति की पिछले हफ्ते हुई बैठक में कोष के अटकने जैसे विभिन्न मसलों के समाधान के उपायों पर चर्चा की गई। समिति ने आठ क्षेत्रों के निर्यातकों से भी बात की, जिन्होंने अपनी समस्याओं के बारे में समिति को अवगत कराया। राज्स सरकार के साथ ही केंद्र सरकार के अधिकारियों से जीएसटी के पहले के केंद्रीय उत्पाद एवं मूल्य वर्धित कर के लंबित रिफंड दावों को तत्काल निपटाने को कहा गया है ताकि निर्यातकों को थोड़ी राहत मिल सके। तमाम मुश्किलों के बावजूद अगस्त में देश का निर्यात 10.29 फीसदी बढ़ा जबकि जुलाई में 3.94 फीसदी की तेजी आई थी। हालांकि निर्यातकों का कहना है कि उनके ऑर्डर बुक में कमी आई है, जिसका असर आने वाले महीनों में निर्यात के आंकड़ों में दिख सकता है।
कीवर्ड export, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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