भारत में 42 साल में पहली बार आई अमेरिकी तेल की खेप

निर्माल्य बेहड़ा और शाइन जैकब | भुवनेश्वर/नई दिल्ली Oct 02, 2017 09:52 PM IST

भारत में 42 साल में पहली बार अमेरिका से कच्चे तेल की  खेप ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर सोमवार को पहुंची। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम (बीपीसी) की ओर से हाल में अमेरिकी तेल खरीदने की प्रतिबद्धता के बाद यह खेप पहुंची है। आईओसी ने कहा है कि दोनों कंपनियों ने मिलकर अमेरिका से 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल का ऑर्डर किया है और 'दोनों देशों के बीच तेल का द्विपक्षीय कारोबार 2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।'

 
कच्चे तेल की ढुलाई करने वाले एक बड़ा क्रूड कैरियर एमटी न्यू प्रॉस्पैरिटी अमेरिकी खाड़ी के तट से 19 अगस्त को चला था, जिसकी क्षमता 20 लाख बैरल है। यह सोमवार को पारादीप बंदरगाह पर पहुंचा। आईओसी इस कच्चे तेल का प्रसंस्करण अपने पूर्वी तट स्थित रिफाइनरियों पारादीप, हल्दिया, बरौनी और बोंगाईगांव में करेगी। आईओसी भारत के सार्वजनिक क्षेत्र का पहला रिफाइनर है, जिसने अमेरिका से कच्चा तेल मंगाया है और उसने अमेरिका से कुल 39 लाख बैरल तेल मंगाने का ऑर्डर किया है। 
 
भारत के दो अन्य सरकारी रिफाइनर हिंदुस्तान पेट्रोलियम और बीपीसी ने भी क्रमश: 10 लाख और 29.5 लाख बैरल तेल के लिए ऑर्डर किया है। यह कच्चा तेल उनकी विशाखापत्तनम और कोच्चि रिफाइनरियों के लिए अमेरिका से मंगाया जाएगा। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा इस समय कुल 78.5 लाख बैरल कच्चे तेल का ऑर्डर किया गया है। तीनों रिफाइनर अपनी रिफाइनरियों के लिए स्वीट, सोर और हैवी क्रूड मंगा रही हैं, जहां इसका शोधन होता है। 
 
सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की भारतीय कंपनियों ने यूएस शेल ऐसेट में भारी मात्रा में निवेश किया है, जो करीब 5 अरब डॉलर है। घरेलू कंपनियों ने अमेरिका से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) मंगाने के लिए भी समझौता किया है, जिसकी पहली खेप जनवरी 2018 में भारत में पहुंचने की संभावना है। नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि मैरीके कार्लसन ने नई दिल्ली में कहा, 'अमेरिका और भारत ऊर्जा के क्षेत्र मेंं सहयोग बढ़ा रहे हैं, जिसमें स्वच्छ जीवाश्म ईंधन, अक्षय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देश ऊर्जा दक्ष तकनीकों में भी एक दूसरे के निकट आ रहे हैं। हम भविष्य में भी अमेरिका के कच्चे तेल की बिक्री भारत में करने की संभावनाएं तलाशेंगे और भारत में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल की संभावनाओं का विस्तार करेंगे।'
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