चूक के खुलासे पर सेबी होगा नरम

श्रीमी चौधरी | मुंबई Oct 03, 2017 09:46 PM IST

बनेगी गुंजाइश

 सेबी प्रस्तावित परिपत्र के कुछ विवादास्पद मसले पर दोबारा विचार कर रहा है
सेबी डिफॉल्ट के खुलासे का समय 24 घंटे के बजाय 30 दिन कर सकता है

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड कर्ज के भुगतान में चूक से जुड़े खुलासा नियमों में नरमी पर विचार कर रहा है और इसके लिए नरम ढांचा दोबारा जारी कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, बाजार नियामक की योजना कंपनियों को कर्ज के खुलासे और चूक की प्रकृति पर प्रावधान के लिए एक महीने का वक्त देने की है। 4 अगस्त के परिपत्र यानी पिछले प्रस्ताव के तहत (जिसका क्रियान्वयन टाल दिया गया है) सेबी ने कंपनियों को कर्ज भुगतान में चूक के 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक तौर पर इसका खुलासा अनिवार्य किया गया था। सूत्रों ने कहा कि सेबी प्रस्तावित परिपत्र के कुछ विवादास्पद मसलों पर दोबारा विचार कर रहा है, जिस पर बाजार के भागीदारों, उद्योग निकायों, बैंकों व रेटिंग एजेंंसियों ने ध्यान दिलाया है।

संशोधित निर्देश के तहत सेबी डिफॉल्ट के लिए खुलासे का वक्त 30 दिन कर सकता है और खुलासे के लिए कंपनियों को कुछ अतिरिक्त समय दे सकता है। इसके अलावा नियामक इसके लिए कुछ प्रावधान कर सकता है कि अगर डिफॉल्ट की प्रकृति तकनीकी है तो उसे कुछ और छूट मिल सकती है। सेबी और वित्त मंत्रालय के सामने पिछले एक महीने में कई लोगों ने अपना पक्ष रखा है, जिसमें कहा गया है कि सेबी का निर्देश व्यावहारिक नहीं है और इसके विस्तृत विश्लेषण की दरकार है।

एक सूत्र ने कहा, सेबी के विगत के परिपत्र में दो अहम मसले हैं। पहला, किसी कंपनी के लिए एक दिन में डिफॉल्ट का खुलासा करना व्यावहारिक तौर पर मुमकिन नहीं होगा। दूसरा, कर्ज के डिफॉल्ट की प्रकृति पर विचार नहीं किया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक टिप्पणी मांगे बिना और चर्चा पत्र जारी किए बिना परिपत्र जारी कर दिए गए थे। मोटे तौर पर सेबी नीतिगत बदलाव की घोषणा से पहले चर्चा पत्र जारी करता है। बैंकों ने भी इस परिपत्र से उन पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई है।

एक बैंक विश्लेषक ने कहा, 24 घंटे के भीतर लोन डिफॉल्ट के खुलासे ने बैंकों को विकट स्थिति में डाल दिया है। जब कोई कंपनी ऐसा खुलासा करती है तो क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को कंपनी की रेटिंग को डिफॉल्ट में तब्दील करने के लिए आगे बढऩा होगा। जब रेटिंग एजेंंसियां डिफॉल्ट रेटिंग देती हैं तो कर्ज से जुड़े जोखिम में इजाफा होता है तो बैंकों की पूंजी पर्याप्तता अनुपात पर असर पड़ता है। दूसरे शब्दों में बैंकों को रोजाना के कारोबार के लिए और पूंजी की व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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