नए नियमों से कई बड़ी फर्मों पर असर

समी मोडक | मुंबई Oct 06, 2017 09:57 PM IST

देश में कंपनियों के कामकाज में सुधार के लिए प्रस्तावित नियमों का बाजार पर व्यापक असर पडऩे की संभावना है। इससे कंपनियों को अपने बोर्डों का पुनर्गठन करना होगा, ज्यादा निदेशकों को बोर्ड में जगह देनी होगी और मोटा वेतन तथा रॉयल्टी देने के लिए शेयरधारकों से सहमति लेनी होगी। एनएसई में सूचीबद्घ 1,670 कंपनियों में से करीब 40 फीसदी कंपनियों में एक ही व्यक्ति चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पद पर तैनात है। इनमें से 144 का संबंध शीर्ष 500 कंपनी सूचकांक में शामिल कंपनियों से है जबकि 14 निफ्टी 50 सूचकांक में शामिल कंपनियों के सीएमडी हैं। इसमें शामिल कुछ प्रमुख नामों में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी, विप्रो के अजीम प्रेमजी और एचसीएल टेक्रोलॉजीज के शिव नाडर शामिल हैं। ओएनजीसी, कोल इंडिया और एनटीपीसी जैसी बड़ी सरकारी कंपनियों में भी सीएमडी का पद एक ही व्यक्ति के पास है। कंपनियों के कामकाज में सुधार के लिए सेबी द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति ने चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का पद अलग करने की सिफारिश की है। समिति ने निदेशकों की न्यूनतम संख्या 3 से बढ़ाकर 6 करने की सिफारिश की है। इस समय 256 यानी 15.4 फीसदी सूचीबद्घ कंपनियों के बोर्डों में 5 या इससे कम सदस्य हैं। प्राइम डेटाबेस द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक 19 कंपनियों के बोर्ड में केवल 3 सदस्य हैं जबकि 82 कंपनियों में 4 निदेशक हैं।
 
इस समय इन कंपनियों में वे महिलाएं निदेशक हैं जिनका संबंध प्रवर्तक समूह से है। इनमें से ज्यादात कंपनी के शीर्ष अधिकारियों की पत्नियां या रिश्तेदार हैं। समिति ने कंपनी बोर्ड में कम से कम आधा स्वतंत्र निदेशकों को शामिल करने की सिफारिश की है। अगर ऐसा होता है तो करीब 20 फीसदी सूचीबद्घ कंपनियों को अपने बोर्ड में और स्वतंत्र निदेशक शामिल करने होंगे।
 
कोटक महिंद्रा बैंक के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक उदय कोटक की अगुआई वाली इस 25 सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सूचीबद्घ कंपनियों के निदेशक मंडल की भूमिका में क्रमिक सुधार हुआ है लेकिन इसे और मजबूत करने के लिए एक समग्र समीक्षा की जरूरत है। समिति का मानना है कि सूचीबद्घ कंपनियों के बोर्ड में विविध पृष्ठïभूमि और दक्षता रखने वाले पर्याप्त निदेशक होने जरूरी हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि अगर कोई कंपनी अपने कार्यकारी को 5 करोड़ रुपये से ज्यादा या शुद्घ लाभ के 2.5 फीसदी से ज्यादा (इनमें से जो भी ज्यादा हो) वेतन देना चाहती है तो इसके लिए उसे आम शेयरधारकों से सहमति लेनी होगी। इससे बड़ी संख्या में कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।
 
2016-17 में कंपनियों द्वारा दिए गए पारिश्रमिक का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि आधी से अधिक कंपनियों को अपने कार्याधिकारियों के लिए मोटा वेतन जारी रखने के लिए विशेष प्रस्ताव लाने होंगे। निफ्टी 50 सूचकांक में शामिल 34 कंपनियों के कार्याधिकारियों का वेतन 5 करोड़ रुपये से अधिक है। कई कंपनियां ऐसी भी हैं जिनमें कई शीर्ष अधिकारियों की तनख्वाह प्रस्तावित सीमा से अधिक है।इसी तरह रॉयल्टी और ब्रांड भुगतान के प्रस्ताव से मारुति सुजूकी और कोलगेट पामोलिव जैसी कंपनियों पर असर पड़ेगा जो विदेशों में अपनी मूल कंपनियों को अपने राजस्व का 5 फीसदी से अधिक रॉयल्टी देती हैं। समिति ने इसके लिए कम से कम आधे अल्पांश शेयरधारकों की मंजूरी लेने की सिफारिश की है।
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