भूषण स्टील और एस्सार स्टील खरीदारों के लिए अच्छा सौदा

अदिति दिवेकर | मुंबई Oct 06, 2017 10:09 PM IST

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की सूची में शामिल भूषण स्टील और एस्सार स्टील अपने नए खरीदार को काफी कम कीमत पर तैयार क्षमता तत्काल मुहैया कराएंगी। इन दोनों कंपनियों पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि भारी ऋण बोझ तले दबी इन इस्पात कंपनियों के प्रवर्तकों पर अब लेनदारों का भरोसा नहीं रहा। जबकि एलॉय क्षेत्र में विस्तार की चाहत रखने वाले घरेलू एवं विदेशी इस्पात खिलाडिय़ों के लिए जबरदस्त संभावनाएं दिख रही हैं।
 
एस्सार स्टील और भूषण स्टील अधिक मार्जिन वाले फ्लैट उत्पादों का कारोबार करती हैं। हालांकि घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बाजार में फ्लैट उत्पादों की जबरदस्त मांग के मद्देनजर ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इन दोनों कंपनियों की बिक्री जुलाई से सितंबर के बीच कमजोर मौसम के बावजूद पूरे साल भर मजबूत रहेगी। दूसरी ओर अपेक्षाकृत कम मार्जिन वाले इस्पात के लॉन्ग उत्पाद कारोबार में केवल घरेलू बाजार से मांग दिख रही है।
 
ऋणदाताओं द्वारा ऋण वसूली के तमाम प्रयास विफल रहने के बाद जून में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारी ऋण बोझ तले दबी करीब 12 कंपनियों की सूची एनसीएलटी को सौंपी थी ताकि उनके खिलाफ दिवालिया एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सके। रुइया परिवार की स्वामित्व वाली कंपनी एस्सार स्टील और बृजभूषण सिंघल द्वारा स्थापित कंपनी भूषण स्टील को भी अन्य कंपनियों के साथ इसी सूची में रखा गया है।
 
दिल्ली की कंपनी भूषण स्टील देश में द्वितीयक उत्पादन करने वाली देश की तीसरी सबसे बड़ी इस्पात कंपनी है। लौह अयस्क से भरपूर राज्य ओडिशा में भूषण स्टील की क्षमता 56 लाख टन है जबकि गुजरात में एस्सार स्टील की स्थापित क्षमता 1 करोड़ टन है। एक विश्लेषक ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'दोनों कंपनियां अपने कारोबार और बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से भारतीय बाजार में अच्छी स्थिति में हैं। लेकिन बहीखाते पर अधिक बोझ होने के कारण उनके खरीदार काफी मोलभाव कर सकते हैं। और इसलिए उनकी परिसंपत्ति मूल्य घटकर लगभग आधा रह गया है।' सेंट्रम ब्रोकरेज के वरिष्ठï विश्लेषक अभिसार जैन के अनुसार, नए मालिक इन परिसंपत्तियों से आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा, 'नई क्षमता पर पूंजीगत खर्च में उल्लेखनीय छूट हो सकती है लेकिन वह खास मामलों पर निर्भर करेगी।' 
 
31 मार्च 2017 के अनुसार भूषण स्टील का डेट-इक्विटी अनुपात 153.47 था जबकि एस्सार स्टील के मामले में यह आंकड़ा 32.60 था। बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से एस्सार स्टील की पश्चिमी एवं उत्तरी भागों में मजबूत उपस्थिति है जबकि भूषण स्टील का बाजार मुख्य तौर पर देश के मध्य एवं पूर्वी भागों में है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस्पात मंत्रालय के जबरदस्त समर्थन से घरेलू इस्पात उद्योग में सुधार हो रहा है। देश में सस्ते इस्पात के आयात पर रोक लगाने और नई परियोजनाओं में घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता देने जैसी सरकारी पहल से इस्पात उद्योग को काफी बल मिला है। यही कारण है कि ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि भले ही ये परिसंपत्तियां एनसीएलटी की सूची में शामिल हों लेकिन दीर्घावधि कारेाबारी संभावनाओं के लिहाज से नए खरीदार अच्छी स्थिति में होंगे।
कीवर्ड bhusan steel, NCLT,

  
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